मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

76 Posts

19068 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1151 postid : 731435

मयंक कवि विरचित मोदी चालीसा

Posted On: 13 Apr, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

श्री गणेश का नाम ले, धर शारद के पाँव |

राजनीति की धूप में, मोदी तरु की छाँव ||

अटल, सत्य संकल्प है, सदा नमो के पास |

उद्यत करने को हुये, हर संकट का नाश ||

भीतर, बाहर सभी विरोधी | जनता कहती मोदी मोदी ||१||

बसपा, सपा असुर हैं भारी | कांग्रेस टोटल अत्याचारी ||२||

तुष्टिकरण, अनुचित आरक्षण | लोकतंत्र का करते भक्षण ||३||

कलि के कुटिल नराधम पापी | झाडू ले फिरते आआपी ||४||

कमल चिन्ह का बजा है डंका | मोदी भारत विमल मयंका ||५||

सुखी होय जग, खिले सरोजा | मोदी मोदी कहे मनोजा ||६||

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति के साधक | जगदम्बा के श्रेष्ठ अराधक ||७||

नौ दिन निराहार व्रत रहते | भारत, भारत, भारत कहते ||८||

वन्देमातरम के अनुरागी | द्वेष, दम्भ, छल, छिद्र विरागी ||९||

अदना चाय बेचने वाला | संघर्षों ने जिसको पाला ||१०||

अब कहती है दुनिया सारी | राजनीति में यह अवतारी ||११||

खेले भारत माँ की गोदी | हर हर मोदी, घर घर मोदी ||१२||

आतंकी इण्डिया विरोधी | डर डर मोदी, थर थर मोदी ||१३||

संघ कार्य के राज्य प्रणेता | संत सदृश सज्जन जननेता ||१४||

दीन दशा जब भारत लख्या | सोमनाथ से चले अयोध्या ||१५||

जन्म लियो घर अति साधारण | उगा सूर्य जनु तम संहारण ||१६||

हीराबेन लला जनु मानिक | श्रद्धा भाव निखिल निगमादिक ||१७||

सादर है जन जन से नाता | मोदी भारत भाग्य विधाता ||१८||

कार्गिल जुद्ध कियो अरि भारी | प्रतिपक्षी दल बने मदारी ||१९||
भारत की प्रभुता संकट में | लख भारत माता सांसत में ||२०||

सेना के हित बने प्रवक्ता | गरज उठा शावक बन वक्ता ||२१||

पहना प्रलयंकर का चोगा | गोली का जवाब बम होगा ||२२||

आयो भुज भूकंप भयंकर | सवा साल में आठ लाख घर ||२३||

टाटा को गुजरात बुलायो | फ़ाइल में लाइफ ले आयो ||२४||

इधर धर्म अपनाने वाले | उधर देश को खाने वाले ||२५||

बहु विधि भारत के अपकारी | बहु प्रकार नर भ्रष्टाचारी ||२६||

सबके उर भय एक तुम्हारा | तुम नैया के खेवनहारा ||२७||

स्वयं साधना करके देखा | तुम भारत की जीवन रेखा ||२८||

बहुत दिनों से धरती बंजर | तुम छाये बन मेघ धुरंधर ||२९||

विश्वनाथ जी का अनुमोदन | राजनीति में हो संशोधन ||३०||

इसीलिये तुम काशी आये | धर्मप्राण हरिजन हर्षाये ||३१||

जय जय जय मोदी जन नायक | जड़ता हरो विकास प्रदायक ||३२||

कर्मकुशल संशाधन दोहक | रिपुजन दलन सर्वजन मोहक ||३३||

विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा | तुमने एक रंग सब रंगा ||३४||

सबके दिल में कमल खिलाने | ऐक सूत्र जन सभी मिलाने ||३५||

पूरे सारे काज करेगा | यह दिल्ली में राज करेगा ||३६||

शुभ चुनाव का बिगुल बजा है | देवासुर संग्राम मचा है ||३७||

गूँज उठा है सारा अम्बर | यह अंतिम निर्णय का अवसर ||३८||

तैंतिस कोटि देव जागे हैं | देवसुतों से मत मांगे हैं ||३९||

जागो माता बहनों भाई | हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई ||४०||

सावधान मन कह रहा, पूरा भारत देश |

कमल बटन गंगा सदृश, कटे पाप अरु क्लेश ||



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

321 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran