मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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निर्वाचन चालीसा

Posted On: 9 Mar, 2014 Others,कविता में

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संविधान की ले शपथ, उसको तोडनहार |

कछु पापी नेता भये, अनुदिन भ्रष्टाचार ||

जोड़ तोड़ के गणित में, लोकतंत्र भकुआय |

हर चुनाव समरूप है, गया देश कठुआय ||

अथ श्री निर्वाचन चालीसा | जिसने भी जनता को पीसा ||१||

वह नेता है चतुर सुजाना | लोकतंत्र   में  जाना  माना ||२||

धन जन बल युत बाहुबली हो | हवा बहाए बिना चली हो ||३||

झूठी शपथ मातु पितु बेटा | सब को अकवारी भर भेटा ||४||

रसमय चिकनी चुपड़ी बातें | मुख में राम बगल में घातें ||५||

अपना ही घर आप उजाडू | झंडे पर लटकाये झाड़ू ||६||

करिया अक्षर भैंस समाना | लैपटाप का हो दीवाना ||७||

आनन ग्रन्थ पढ़े दिन राती | कुर्सी देख फड़कती छाती ||८||

संसद में करवा दे दंगा | पद मिलते ही होय निहंगा ||९||

अनुदिन मुसलमान रटता हो | राष्ट्रवाद पर वह कटता हो ||१०||

वन्देमातरम को हटवा दे | देशभक्ति के चिन्ह मिटा दे ||११||

खुद को धर्म तटस्थ बतावे | मुरदों पर चादर चढ़वावे ||१२||

क्षेत्रवाद का लिए सहारा | जातिवाद का देता  नारा ||१४||

सांसद और विधायक भाई | बेटा बेटी लोग लुगाई ||१३||

दे कम्बल फोटो खिचवावे | फिर फिर शिलान्यास करवावे ||१४||

खुद ही गोप और खुद गोपी | इसके सर पर उसकी टोपी ||१५||

उजला कुरता मधुरि बानी | दगाबाज की इहै निशानी ||१६||

भय अरु लाजमुक्त अभिमानी | बाहर से दिखता बलिदानी ||१७||

सब कुछ घोंटा सब कुछ टाला | आयेदिन करता घोटाला ||१८||

धरना और प्रदर्शन चारी | दिवस खाय निशि अनशनकारी ||१९||

कविवर कुरता फाड़ अमेठी | परदे के पीछे माँ बेटी ||२०||

तरुणी दीन चढ़ी इक हांथी | नोटों की माला दे साथी ||२१||

पासवान की लिए लंगोटी | राजनाथ बैठाते गोटी ||२२||

नीति अनीति भूल गठबंधन | टकले पर शोभित है चन्दन ||२३||

खींचतान चौचक भाजप्पा | कडुआ थू मीठा गुलगप्पा ||२४||

मोदी जब फोटू खिचवावे | अगल बगल सब खीस दिखावे ||२५||

नंदा पुष्कर सरग सिधारी | शशि थरूर की दूर बिमारी ||२६||

शीला महामहिम पद सोहै | दिल्ली में पगड़ी मन मोहै ||२७||

सयकिल वाहन चढ अखिलेशा | सात समन्दर पार नरेशा ||२८||

उहाँ अमरीका आजम पायो | कुम्भ प्रशासन पाठ पढ़ायो ||२९||

भैंस खोजता फिरे प्रशासन | धरने पर बैठा है शासन ||३०||

अन्ना जी की हरियर पगड़ी | ममता देख भुजाएं फड़की ||३१||

लोकपाल के हम दीवाने | केवल गाँधी जी को माने ||३२||

कहने को खांटी देशी हैं | पंच कोटि बंगलादेशी हैं ||३३||

चीन हमारे सर पर चढ़ता | पाक हमेशा आगे बढ़ता ||३४||

जिनमे दो कौड़ी का दम है | हम उनके सम्मुख बेदम हैं ||३५||

बेकारी का घाव बड़ा है | भत्ता ले चुपचाप पड़ा है||३६||

युवा नशे में चकनाचूरं | कह हनूज दिल्ली है दूरं ||३७||

नकसलवाद दे रहा धमकी | मनबढ़ इस्लामिक आतंकी ||३८||

नर को नारी से लड़वाते | जन को आजादी दिलवाते ||३९||

भैंसा आगे बजी बीन है | बिजली पानी सड़क हीन है ||४०||

सड़सठ सालों से सतत, लहू रहे हैं सोख |

भारत माता रो रही, लजा गयी है कोख ||



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