मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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कुछ बोलूँगा, तो बोलोगे की बोलता है|

Posted On: 1 Oct, 2011 Others में

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इतिहास में एक से बढ़कर एक क्रूर शासक हुए हैं|चंगेज खान, हलाकू, नादिर शाह, तैमूर लंग, जनरल डायर….और भी न जाने कितने? इनमे से सभी ने अपने देश के नागरिको पर कोई भी जुल्म नहीं ढाया|इनका हर जुल्म बाहरियों के लिए था, विदेशियों के लिए था|वर्तमान सरकार इसकी एकमात्र अपवाद है|जिसने सत्ता सँभालने के पहले दिन से ही अपने नागरिकों का खून चूसना शुरू कर दिया और आज भी बड़ी बेरहमी से हलाल करती जा रही है|मैं कभी कभी भावावेश में बहुत कुछ बोल देता हूँ|ज्यादातर संबोधनात्मक शैली का प्रयोग करने के कारण सीधे मुखातिब होता हूँ|ताजातरीन उदहारण ४ जून २०११ को दिल्ली के रामलीला मैदान में निद्रा के आगोश में सोने की तयारी कर रहे बाबा रामदेव के निहत्थे समर्थकों पर कांग्रेस के इशारे पर, डायर को भी लज्जित करने वाला बर्बरतम लाठीचार्ज है|अब भी कोई कहेगा की ४ जून को बाबा के इनकाउंटर की तैयारी नहीं थी?

स्पष्ट है यदि रामदेव ने कृष्ण नीति का  प्रयोग न किया होता तो शायद हम उन्हें जिन्दा भी न पाते, और यह सब किसलिए? १५ करोड़ मुसलामानों का एकतरफा वोट कांग्रेस को प्राप्त हो इसलिए गेरुवा पहनने और योग सिखाने वाले रामदेव को निपटा देने की कोई भी कोर कसर बाकी नहीं रखी गयी|अब यदि आप कहते हैं की रामदेव एक शख्सियत हैं और यदि ऐसा होता भी तो भारत की जनता विद्रोह कर देती तो आपकी बुद्धि का भगवान ही मालिक है|लगातार ११४ दिन तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करते हुए माता राजबाला ने अपनी बलि दे दी और आप क्या कुछ कर पायेंगे?ठीक यही बाबा रामदेव के साथ भी होता|जिस सरकार ने अबू हसन को खुल्लमखुल्ला प्रवर्तन निदेशालय के मानकों की धज्जी उड़ा देने की खुली छुट दे रखी हो वही बालकृष्ण के मामले पर मुखर है|क्या आप कुछ कर सकते हैं? जिसने सत्ता में आते ही अपने एजेंटों को राज्यपाल बना कर विपक्षी दलों के माथे पर दुधारी तलवार लटका दी वह सत्ता के लिए किसी का खून कर दे तो इसमें कोई भी आश्चर्य नहीं|क्या आपको याद है की जिस बूटा सिंह को बचाने के लिए पूरा कांग्रेस एकजुट हो गया था उसे कोर्ट ने धक्के मार कर बाहर करने को कहा था|

संविधान हमें शोषण के विरुद्ध अधिकार देता है और कांग्रेस हमारा भावात्मक शोषण करती है|क्या हमें विरासत में यह नहीं सिखाया गया की सन ४७ करे पुकार, लाओ नेहरु की सरकार जैसे भावनात्मक नारे लगाकर कांग्रेस ने हमसे सत्ता हस्तानान्तरण की कीमत मांगी थी? और गांधी के हत्यारों को वोट देना पाप है जैसे आधारहीन, तर्कहीन, तथ्यहीन, मनगढंत, झूठे और बेबुनियाद आरोपों के आधार पर झूठ और असत्य का सहारा लेकर सन १९५२ में चुनाव लड़ा गया और जीतने पर पंचशील का बीन बजाकर हमें पुरे विश्व के सामने नंगा कर दिया गया और हम कुछ भी नहीं कर पायें|नेहरु के मंत्रिमंडल में जीप घोटाला हुआ और नेहरु ने बेहयाई की हद तक अपने मंत्री का समर्थन किया|इंदिरा गांधी ने भ्रष्टाचार हो शिष्टाचार बना कर प्रस्तुत किया|राजीव ने कहा की विकास का १ रुपया लाभार्थी तक १० पैसे भी नहीं रहता लेकिन वे अपने पुरखों के पाप नहीं धो पायें और जनता ने क्या कर लिया?

अटल जी ने जब भी स्थिति को बदलने का प्रयास किया तो ममता बनर्जी से लेकर लालू पासवान तक सभी एक सुर में हुआ हुआ करने लगे|जार्ज फर्नांडीज पर ताबूत घोटाले के झूठे आरोप लगाये गएँ..सारी स्थितियां साफ़ हो जाने के बावजूद जनता ने क्या कर लिया?प्याज की कीमतें बढ़ीं तो तहलका मच गया और आज कांग्रेस के आते ही सबकुछ सस्ता हो गया है|३२ रुपये की हैसियत रखने वाले अमीर हो गए हैं|इतनी डरी हुई, निक्कमी और भ्रष्टाचारी सरकार तो भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार है|विश्व के प्रत्येक देश का नेता पत्रकार वार्ता करता है, हमारे प्रधानमंत्री संपादक वार्ता करते हैं|जब इनके कमजोर प्रधानमंत्री होने की बात कही जाती है तो अर्थशास्त्री को शायरी का शौक चर्राने लगता है|विश्व मंच पर जाते हैं तो जर्मन इनसे हाँथ जोड़ कर मिलते हैं और ये हाँथ मिलाने लग जाते हैं|क्या आपको मनमोहन कहीं से भी प्रधानमंत्री नजर आते हैं|एक बेबस अव्वल दर्जे का लिजलिजा जीव हमारा प्रधानमंत्री कैसे हो सकता है?

राहुल की कलावती ने संसद को गुंजायमान कर दिया|गरीबों का इनसे बेहतर मसीहा तो कोई हो ही नहीं सकता|अब कहाँ है? क्या ३२, ३२ रूपये के ढेर सारे बण्डल कलावातियों को बाँट दिए गए हैं|लालजी टंडन का साडी वितरण समारोह तो सबको याद रहता है लेकिन कांग्रेस को वोट दो कह कर ठुमके लगाती अर्धनग्न बालाएं किसी को क्यों नहीं याद रहता? कहाँ चला गया कांग्रेस का वह एम पी जिसने अपनी कनपटी पर रिवाल्वर तानकर सोनिया को प्रधानमंत्री बनने का नारा बुलंद किया था? सोनिया इस देश की अघोषित प्रधानमंत्री हैं|इस देश पर स्पष्ट रूप से इटली का शासन चल रहा है ..इस बात को हमारे देश के लोग क्यों नहीं स्वीकार करते?क्या आपको कभी कभी २ रूपये के सिक्के में इसा मसीह का क्रास नहीं दीखता? लक्षित हिंसा निवारण अधिनियम के मार्फ़त इस देश से हिंदुओं को खत्म करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है और जनता कुछ भी नहीं बोलती|

इस सरकार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए|यह सरकार हत्यारी है, इस पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए|माँ राजबाले तुम्हारे निधन से राष्ट्र को अपूरणीय क्षति हुई है और हाँ हे माते! अब यह देश कलंकित हो चूका है|परमपिता परमेश्वर आपकी आत्मा को शान्ति दे|क्रीं



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193 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahrul jadon के द्वारा
April 9, 2012

lagta hai aap rss agent hai. bhajpa ke dalal hai.sir desh jodne ki baat karo todne ki nahi.aap jaise logo ki bajah se hi desh bahut pichhe hai.likhane ka itna hi shok hai to logo ko shikcha aur takniti ke baare me batao. aatank mat failao . desh ke logo ki shoch badal rahi hai badlane do. aap jaise log itane desh bhakt hote to kuch achha hi likhte. dekha jaye to aap jaise log hi aatank faila rahe hao.desh ka vikas sachche deshbhakt pad likhkar aur takniki sikcha hasil kar karenge.aap jasise log desh ka vikas nahi vinas chahte hai. partiyo me mat jayo desh ki sabhi parti corupt hai chahe bhajpa ho ya congres. jago reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee tata tea piyo yaar . bharat mata ki jay vandemataram.

rahul के द्वारा
April 9, 2012

lagta hai aap rss agent hai. bhajpa ke dalal hai.sir desh jodne ki baat karo todne ki nahi.aap jaise logo ki bajah se hi desh bahut pichhe hai.likhane ka itna hi shok hai to logo ko shikcha aur takniti ke baare me batao. aatank mat failao . desh ke logo ki shoch badal rahi hai badlane do. aap jaise log itane desh bhakt hote to kuch achha hi likhte. dekha jaye to aap jaise log hi aatank faila rahe hao.desh ka vikas sachche deshbhakt pad likhkar aur takniki sikcha hasil kar karenge.aap jasise log desh ka vikas nahi vinas chahte hai. partiyo me mat jayo desh ki sabhi parti corupt hai chahe bhajpa ho ya congres. jago reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee tata tea piyo yaar

rahulpriyadarshi के द्वारा
October 4, 2011

मैं विशेष रूप से कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ परन्तु संक्षेप में इतना ही कहूँगा कि मैं इस आलेख से अक्षरशः सहमत हूँ और अपना आभार प्रकट करता हूँ मनोज जी के प्रति,जिन्होंने हमेशा ही निर्भीकता से सत्य का समर्थन किया है एवं झूठे सामजिक बदलाव की आंधी में भी अपना पैर मजबूती से अपनी जड़ों पर जमाये रखा है,आपके लेख हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं,मनुष्य अपनी उम्र और वाचालता की वजह से नहीं वरन अपने कृत्यों से सम्मान पता है,आप निश्चय ही सम्मान के अधिकारी हैं.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 4, 2011

    प्रिय राहुल भाई, सस्नेह वन्देमातरम| आपकी प्रतिक्रिया ने ह्रदय को गदगद कर दिया|यह तो आपका मेरे प्रति स्नेह है जिसने मुझे सम्मान का अधिकारी समझा अन्यथा मैं तो एक सामान्य सा जीव हूँ और अधिकांशतः मानव प्रवृति के अनुसार ही मुझे भी तमाम तरह की व्याधियाँ पीड़ित करती रहती हैं|’कुमति,सुमति सब के हिय रहहीं” मुझ पर भी अक्षरशः लागू होती है|मेरे विचार से सम्मान की अधिकारी केवल महामाया चंडिका ही हैं और कोई भी नहीं|आभार…जय भारत, जय भारती|

syeds के द्वारा
October 2, 2011

प्रिय मनोज भाई, बेशक यह सरकार पैसे के लालच में अंधी हो गयी है….इसे सच्चे और सीधे लोग नहीं भाते…यह हर ऐसे आन्दोलन को ख़त्म कर देना चाहती है जो …इनके भ्रष्ट चेहरे को उजागर करता हुआ हो… यह शर्न्म्नाक है इस देश के लिए की कसब जैसे राक्षसों के लिए बिरयानी की व्यवस्था कर रही है सरकार…और साधू सन्यासियों पे लाठी चार्ज… ये असुरों की प्रविर्ती वाली बात है…. बेशक चार जून को को ऐसी घटना हुयी जिसके सामने जनरल डायर भी शर्मा जाए…वोह खबर को सुनकर मेरे मन में एक लेख ‘आज का जनरल डायर’ शीर्षक से लिखने का विचार आया था जो किसी कारणवश नहीं लिख सका था.. लेकिन वह कमी आप ने यहाँ पूरी कर दी… सिर्फ एक बात जिससे मई सहमत नहीं हूँ वह यह है की यह लाठी चार्ज मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए की गयी…मेरे विचार में यह सिर्फ अपने भ्रष्ट चेहरों को छिपाने के लिए… और सच्चाई को दबाने के लिए की गयी कार्यवाही थी…. बेहतरीन लेख के लिए बधाई के पात्र हैं… http://syeds.jagranjunction.com

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 4, 2011

    प्रिय सईद भाई, वंदे मातरम| आपकी स्नेहमयी प्रतिक्रिया से ह्रदय प्रफुल्लित हो गया और जहां तक मुझे लगता है की मात्र आप ही नहीं बल्कि कोई भी राष्ट्रवादी मुसलमान इस सरकार के घृणित कार्यों को कभी भी जायज नहीं ठहरा सकता लेकिन यह बात इस सरकार के शीर्षस्थ नेताओं को पता चले तब तो|उन्हें लगता है की स्वामी रामदेव पर लाठी बरसा कर वे हिन्स्तान के १५ करोड़ मुस्लिम अवाम को अपने हक में कर लेंगे और जरूरत पड़ी तो किसी मौलाना को कांग्रेस के साथ जोड़ कर अल्पसंख्यकों की बुनियादी समस्याओं पर पर्दा डाल सकेंगे|भाई उन्होंने स्वामी रामदेव के समर्थकों पर लाठी तो इसी उद्देश्य से चलाई थी, यह बात दीगर है की कोई भी मजहबी मुसलमान उनके इस कार्य का कभी समर्थन नहीं करेगा|आपने भी इस विषय पर लिखने का मन बनाया था यह जानकार अतीव प्रसन्नता हुई|मैं चाहूँगा की आप इस विषय पर इसी शीर्षक से फिर लिखें|हो सकता है कालनेमि के मार्ग पर चल रही इस सरकार को सद्बुद्धि आये और वह अपने ही नागरिकों को प्रताडित करने से बाज आये|आपकी ख़ूबसूरत प्रतिक्रिया का एक बार फिर शुक्रिया|जय हिंद|

jlsingh के द्वारा
October 1, 2011

अब मंच में गर्माहट आने लगी है! पर, फेविकोल का जोड़ तुराए कौन? बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन? २०१४ या २०१२ इसबार देश को जोड़नेवाला सूत्र आजमाना होगा. हमें मतदान केंद्र तक जाना होगा! मनोज जी, आपने पहले लिखा था – मैं फिर से लौट आया हूँ! अब अहसास होने लगा है आपके क़दमों की आहट सुनाई पड़ने लगी है! उम्मीद है ठंढे खून में भी गर्मी आ जायेगी!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    आदरणीय जवाहर जी, सादर वंदे मातरम| फेविकोल का मजबूत जोड़ हो या फेविकुइक का मुझे तो लगता है की पहले ही चुनाव में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन करने वाली इस सरकार का अपवित्र जोड़ टूटने वाला ही नहीं है|बिल्ली (सत्ता पक्ष) के गले में बिल्ली (माननीय अन्ना हजारे) ही घंटी बाँधने का असफल प्रयास कर चुकी है अबकी बार कुछ और प्रबंध करना होगा|भाजपा से भी तो कोई विशेष लाभ होता नहीं दिखता|मुझे तो लगता है राजनाथ सिंह जैसे आधारविहीन नेता इसको पूरी तरह लीप कर ही मानेंगे|शायद इसीलिए परम पूज्य डॉक्टर साहब संघ के राजनैतिक क्षेत्र में प्रवेश के विरुद्ध थे|अब तो इन महोदय ने संघ के कुछ नेताओं को भी पता नहीं कौन सी घुट्टी पिला दी है जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी ”त्वदीयाय कार्याय बद्धा: कटीयं” छोड़कर बाबा नाम ही केवलम में ही पूर्ण विश्वास हो चला है| आपकी स्नेहमयी प्रतिक्रिया को सादर नमन…जय भारत, जय भारती|

    Janese के द्वारा
    July 12, 2016

    Yes! Please get rid of this moron. How in the hell did someone like him get to become Prneidest of the United States. Voters wakeup next election.

akraktale के द्वारा
October 1, 2011

मनोज जी नमस्कार, पहले तो मैंने आपके आलेख कि लम्बाई देखी, मगर जैसे ही पढना शुरू किया तो आलेख के ख़त्म होने पर ही दूसरी सांस ली. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने. यह सरकार तो कब से जनता का विश्वास खो चुकी है.हमारे वश में होता तो कब से इनको घर पहुंचा दिया होता, या तो ये सब तिहाड़ में व्यवस्था होने का इन्तजार कर रहे हैं ताकि सभी साथ साथ रहें.यकीनन यह आजाद भारत कि पहली सबसे निक्कमी सरकार है. उम्दा आलेख के लिए हार्दिक बधाई.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    आदरणीय AKRaktle जी, सादर वंदे मातरम| निःसंदेह जनता द्वारा चुनी गयी यह सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है वैसे भी कुछेक मतों के हेर फेर से सरकार बना देना और चलती हुई सरकार को फोड कर बीच में ही गिरा देना कांग्रेसियों की पुरानी आदत है|”पट्टाभिसीतारमैया की हार मेरी हार है” कह कर कांग्रेसी भावनाओं का शोषण करना भी खूब जानते हैं|तिहाड तो एक ऐसा वी आई पी जेल हो गया है की बस पूछिए मत, भला जिस जेल में खरबपति कैदी हो उस जेल में जाने का किसका मन नहीं करेगा? मुझे भी लगता है की सारे माननीय अब वहीँ रेस्ट करने का प्रोग्राम बना रहे है हो सकता है कल को संसद भवन ही स्थानान्तरित करना पड़े|आलेख पर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया को कोटिशः नमन …जय भारत, जय भारती|

abodhbaalak के द्वारा
October 1, 2011

मनोज भाई बीएस आप कहते रहें, ये न सोचें की कौन क्या कहते है …… :) वैसे इसमें किसी के कहने के लिए कुछ है कहाँ, सुन्दर रचना तो है ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    भाई अबोधबालक जी, मैं तो कहता ही रहता हूँ और कहता ही रहूँगा, कौन क्या कहता है इसका तो कभी परवाह ही नहीं किया, वैसे अगर कोई अड़चन आती भी है तो आपलोगों के सहयोग से निपटाने का पूरा प्रयास करता हूँ| ;) रचना आपको पसंद आई इसके लिए कोटिशः आभार …जय भारत, जय भारती

Vinita Shukla के द्वारा
October 1, 2011

कुर्सी की होड़, वोटों की छुद्र राजनीति और अपनी जेबें भरने में लगे नेतागण, भला जनहित की परवाह क्यों करेंगे? लोकतंत्र की आड़ में तानाशाही चलाने वाली इस सरकार की, जितनी भी निंदा की जाये, कम होगी. यह सुन्दर और ओजपूर्ण लेख पढ़कर प्रसन्नता हुई. आशा है, आगे भी ऐसे लेख पढने को मिलते रहेंगे. साधुवाद.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    आदरणीय विनीता जी सादर वंदे मातरम, जो निंदा का पात्र है उसकी निंदा ही होनी चाहिए और इस सरकार को देखकर कहीं से भी सत्कार का भाव पैदा नहीं होता|आपको मेरा लेख पसंद आया इसके लिए आपका आभारी हूँ आगे भी प्रयास करता रहूँगा|बहुमूल्य प्रतिक्रिया को नमन …जय भारत, जय भारती|

vikasmehta के द्वारा
October 1, 2011

मनोज कुमार जी …..आपकी यह पोस्ट वाकई एक देशभक्त की आवाज़ लगती है और मै आपकी भावनाओ की कद्र करता हूँ इसी तरह राष्ट्र की सेवा करते रहिये

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    श्रीमान विकास मेहता जी, सादर वंदे मातरम, आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया का कोटिशः आभार….स्नेह बनाये रखियेगा …जय भारत, जय भारती

    Finch के द्वारा
    July 12, 2016

    FN, you are kind with your astute analysis of their issues but I doubt they will listen.I hope this collection of proaossienfl whiners and hysterics actually read it. Otherwise, they will promote Sarah Palin to the world as their only hope.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 1, 2011

प्रिय मनोज भाई, अहंकार और सत्ता के मद में आकंठ लिप्त इन हुक्मरानों के साथ शठे शाठ्यं समाचरेत को ध्यान में रख कर ही व्यवहार किया जाना चाहिए। आपके लौटने के साथ ही इस मंच पर से विलुप्तप्रायः हो चुकी एक ज्वाला पुनः धधक उठी है। हम सभी उम्मीद करते हैं कि अब आपका साथ बना रहेगा। आभार,

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    प्रिय वाहिद भाई सादर वन्देमातरम.. निःसंदेह यही किया जाना चाहिए, हुक्मरानों द्वारा जिस तरह से जन जीवन में कडवाहट घोली जा रही है और नैतिकता को प्रदूषित किया जा रहा है …वह अब असह्य हो चला है, सुदामा की दरिद्रता टूटती ही नहीं क्योंकि मोहन प्यारे को राजीवप्रिया ने रोक रखा है. मित्र अब मैं इस मंच पर कुछ लोगों से अपना पुराना हिसाब किताब बराबर करने आया हूँ लिहाजा अब मैं यहाँ पर रहना चाहता हूँ…आपका सहयोग हमेशा मिला है और मिलता रहेगा…जय भारत, जय भारती|

Santosh Kumar के द्वारा
October 1, 2011

आदरणीय मनोज भाई ,.वन्देमातरम …. माता ने बड़ी समझदारी से पहले कांग्रेस पर कब्ज़ा किया ,…फिर भाड़े पर मोहन प्यारे को लेकर देश पर ,…अब बाबा रामदेव से खतरा लग रहा है तो,..उनको निपटाने के लिए पूरा जोर लगा दिया ,..सत्ता, चर्च,..चमचों ,…मिडिया ,….सबकी ताकत साथ होते हुए भी उनको हार साफ़ दिखने लगी है ,..तो अब शायद अवैध रूप से बनी NAC के द्वारा उन गरीबों को रिझाने का प्रयास करेंगे ,..जिनकी गरीबी का सबसे बड़ा कारण नेहरू खानदान ही है ,……तुष्टिकरण तो उनका सबसे गन्दा हथियार है ही ,…आम जनता मूरख है ,.. भूखा थाली में सड़े गेंहू की रोटी पाकर खुश हो जाता है ,…फिर सत्ता का हाथ चाहे धीरे धीरे उसके गले पर फंदा कस ही रहा हो ,… अत्यंत प्रखर सार्थक आलेख ,….हार्दिक साधुवाद जय भारत ,जय भारती

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    प्रिय संतोष भाई सादर वन्देमातरम| इटली माता ने जिस दिन यह घोषणा की थी की मैं भारतीय राजनीति में भाग लेने की अपेक्षा इटली की सड़कों पर भीख मांगना अधिक पसन्द करुँगी मुझे उसी दिन ऐसा लग गया था की अब भारत की खैर नहीं है, फिर सीताराम केशरी को जिस तरह से हटाया गया|पुराने क्षत्रप पी ए संगमा और माधव राव सिंधिया को जिस तरह ठिकाने लगाया गया|शरद पवार के राष्ट्रवादी कांग्रेस की हवा निकाली गयी और चुन चुन कर सोनिया के प्रशंसको को कभी सीधे राजनैतिक तो कभी विभिन्न दवाब समूहों में नियुक्त किया गयाउससे यह पूरा विश्वास हो गया की अब शीघ्र हो केन्द्रीय सत्ता का सोनियाकरण होने जा रहा है और यही हुआ भी|आपकी प्रतिक्रिया का कोटिशः आभार …जय भारत, जय भारती|

ashvinikumar के द्वारा
October 1, 2011

अनुज सुप्रभात ,,,,भारतीय मीडिया मौन है राहुल को भी चैन है मनमोहन मुस्कुरा रहे हैं काश फिर ऐसा करने का सुअवसर प्राप्त हो यही मना रहे हैं ,,यार अल्पसंख्यकों का वोट तो हाथ आयेगा राजबाला का खून रंग तो लाएगा ,,उनको तो बस अल्पसंख्यक ही भा रहे हैं ,यार लोग उन्हें अपना दामाद बना रहे हैं मोदी तो देश द्रोही है कांग्रेश ही खालिश दूध से धुली है कमीनेपन की भी हद होती है शैतान की भी एक सरहद होती है लेकिन यहाँ तो बेलगाम घोड़े हैं शुरू से आखिर तक कातिल और लुटेरे हैं एक ने चीन के युद्ध के समय पंचशील अपनाया साला ऐसी कम्पनी को आर्डर दिया कि माल अभी तक बन के नही आया भाई देश अपना तिनसुखिया मेल बन गया है अम्मा जी खिंचवा रही हैं और यह चल रहा है दिग्गी के बोल और चिदम्बरम के होल प्रणव का अंदाज और मनाने का अनोखा रिवाज वाह वाह यही तो बहुरंगी भारत है एक ने कहा जनता में दस पैसा पंहुचता है पर नब्बे तो आखिर उसको ही मिलता है अब स्विस बैंक वाले रो रहे हैं अपने आसुवों से रामदेव को भिगो रहे हैं बेचारों का पन्द्रह प्रतिसत खत्म हो गया वह तो अम्मा जी के बेनामी बांड में जज्ब हो गया अब रामदेव क्या ख़ाक पायेंगे अधिक हो हल्ला मचाएंगे तो भाग जायेंगे इटली थोड़े ही बताएगा यह तो उसके सगे वाले हैं इनको पालने में बैठाएगा…………….जय भारत

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    आदरणीय अग्रज, सादर वन्देमातरम, वाह मजा आ गया बड़े भैया|फेसबुक पर आपकी व्यंय रचना ये मुर्ग ये मुसल्लम भी पढ़ी|हँसते हँसते लोट पोट हो गया|कहाँ से लाते हैं भाई?……………. एक ने चीन के युद्ध के समय पंचशील अपनाया साला ऐसी कम्पनी को आर्डर दिया कि माल अभी तक बन के नही आया|एकदम तगड़ा प्रहार किया है भाई और तब से अब तक ऑर्डर पर आर्डर दिए जा रहे है लेकिन माल है की कमबख्त बन के आने का नाम ही नहीं ले रहा है|वैसे हम भारतीय होते बड़े संतोषी है अभी तक यह उम्मीद लगाये बैठे हैं की आज नहीं तो कल..इस जनम में नहीं तो अगले जन्म में, धरती में नहीं तो स्वर्ग अथवा नरक में कहीं न कहीं लोकपाल भी बनेगा, काला धन भी वापस आएगा और हो सकता है माल के साथ मालदार भी मिल जाय| शंकराचार्य ने लिखा भी है न …..अंगम गलितं, पलितं मुंड, दशन विहीन जातं तुंड ….तदपि न मुन्च्त्याशा पिण्डं ….आशा जाय नाहीं तन स्वासा|जय भारत, जय भारती|

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 1, 2011

प्रिय मनोज भाई ….वन्दे मातरम ! हम तो हमेशा से ही सुनते आये है की परीक्षा में 33 नम्बर वाला पास होता है लेकिन आज पता लगा की 32 रूपये पाने वाला गरीबी की रेखा से उपर होता है अरे कम्बख्तो एक रुपया काहे को कम रख दिया 32 की बजाय 33 की सीमा रेखा बना देते तो तुम्हारे बाप का क्या चला जाता ?…. सच ही कहा है की पढ़ाई में और वास्तविक जीवन में अंतर होत है …. **************************************************************************************************** आपसे यह उम्मीद है की कभी आप स्वामी निगमानंद (शहीद ) जी पर भी चंद शब्द लिख कर अगर बताए तो मुझको बहुत ही खुशी होगी ….. क्योंकि उन पर नाममात्र ही लिखा गया है -क्योंकि उनकी शाहदत को जागरण ने अपना साप्ताहिक टापिक नहीं बनाया था ….. इस देश में से भ्रष्टाचार रूपी रावण का समूल नाश हो तभी आदरणीय राजबाला जी की आत्मा को शांति मिल पायेगी …… जय भारत जय हो माता जगत जननी जी की :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 2, 2011

    प्रिय श्री राजकमल भाई सादर वन्देमातरम, मैंने कहीं पढ़ा था की महान पुरुषों की दो ही गति होती है, जंगल में खिले पुष्प की भाँती या तो वे वनदुर्गा के मस्तक पर विराजते हैं अथवा यूँ ही सूख कर समाप्त हो जाते हैं|हमारे देश का राष्ट्रीय आन्दोलन इसका साक्षी है|पता नहीं कितनी अज्ञात हुतात्माओं ने स्वातंत्र्य यग्य में अपनी आहुति किन्तु पूजन के अधिकारी चंद व्यापारी ही बने|आज की स्थिति और परतंत्र भारत की स्थिति में मुझे कोई विशेष अंतर नहीं लगता|सब कुछ तो वैसे ही चल रहा है, बल्कि और बदतर रूप में|काले अंग्रेजों ने मैकाले की उपासना में कोई कोर कसार बाकी नहीं रखी है|आपका आदेश सर माथे पर …ज्योंही कुछ समय मिला मैं शहीद संत निगमानन्द पर भी लिखूंगा|जय भारत, जय भारती|

    Boss के द्वारा
    July 12, 2016

    Dear Peggy N.Tanhk you. Please pray that things work out by the weekend for both horses. Yes, Gabby seems ready to go again to try for her Maiden win. Love and Hugs, JB

krishnashri के द्वारा
October 1, 2011

भाई जी ,आपका वीरोचित आलेख पढ़ कर संतोष हुआ कि ऐसे लोग भी अभी हैं जो सही को सही कहने की हिम्मत रखते हैं . आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं . नव रात्रि शुभ हो .

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2011

    आदरणीय कृष्णश्री जी, सादर वंदे मातरम …. आपकी प्रतिक्रिया पाकर पुलकित हुआ…स्नेह बनाये रखियेगा|शक्ति पूजा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं|जय भारत, जय भारती|


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