मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

76 Posts

19068 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1151 postid : 454

मैं फिर से लौट आया हूँ

Posted On: 28 Sep, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

काफी दिनों से जागरण जंक्शन से दूर रहा|कभी तकनिकी समस्याओं के चलते तो कभी समय की अनुपलब्धता के चलते|अब मैंने पुख्ता इंतजामात कर लिए हैं|शक्तिपूजा के ही पर्व पर एक वर्ष पूर्व मैंने इस मंच को विदा कहा था|शक्ति पूजा के ही पर्व पर मैं पुनः एक नयी कांति के साथ इस मंच पर उपस्थित हूँ|तब भी ब्लॉगबाजी मेरा शौक था और अब भी ब्लॉग बाजी मेरा शगल है|इस बीच जागरण जंक्शन की ही तरह हमारे राष्ट्र ने भी काफी उथल पुथल झेले हैं और यह मंच सर्वदा इस उथल पुथल का साक्षी रहा है|

मेरे सभी पुराने साथी और जागरण जंक्शन भी मेरे नजरिये से प्रारम्भ से ही परिचित रहा है और मजे की बात तो यह है की इतना लंबा अरसा बीतने के बाद भी मेरे नजरिये में कोई अंतर नहीं आया है|मैं facebook पर काफी सक्रीय रहा हूँ|यह तो नहीं कह सकता की मैं वहाँ पर लोकप्रिय हूँ और मेरी मित्र संख्या लाखों में है किन्तु micro blogging cite होने के कारण वहाँ पर ब्लॉग्गिंग करना मेरे लिए मुफीद था|यह बुद्धिजीवियों का मंच है, किसी ने मेरे प्रतिरुद्ध यह बात कहा भी था|भाई मैं कोई बुद्धिजीवी नहीं और सरस्वती का उपासक होने के बावजूद अपने आपको बुद्धिजीवी कहलाना पसंद भी नहीं करता, लेकिन मन में कुछ मथता है|कुछ ऐसा जो बराबर चुभता रहता है|मैं यह नहीं जानता यह कौन सी वेदना है, कौन सी टीस है, कौन सी चुभन है जो मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है लेकिन उन अनुभूतियों को शब्दों में पिरोने का एक अकिंचन प्रयास अवश्य करता हूँ|मैं मूलतः एक कवि हूँ, जिसे ठीक से type भी करना नहीं आता|बार बार transliteration की मदद लेनी पड़ती है|दायें हाँथ की तर्जनी न होती तो मैं शायद कुछ लिख भी न पाता|खैर अब यदि प्रारब्ध ने साथ दिया और मैं धकिया कर बाहर नहीं कर दिया गया तो मैं बराबर यहाँ पर मौजूद रहूँगा|

यह वाममार्गी चरम दक्षिणपंथी न तो पल्लू छोड़ेगा, न तो पहलू बदलेगा और न ही पीछे हटेगा ………….

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नहीं है, भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नहीं है|


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

27 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashvinikumar के द्वारा
September 30, 2011

प्रिय अनुज सुप्रभात ,, प्रथम माँ दुर्गा को समर्पित ,,,,नमस्ते शरण्ये शिवे ,सानुक्म्ये ,न्मस्त्ये जगत व्यापिके विश्वरूपे ,,न्मस्त्ये जगद्वन्द पादारविन्दे ,नम्स्त्ये जगत्तारिणी त्राहि दुर्गे ,,नमस्ते जगन्चित्य्मान स्वरूपे नम्स्त्ये म्हायोगिनी ज्ञान रूपे,,नमस्ते नमस्ते स्दानन्दरूपे ,नमस्ते जगत्तारिणी त्राहि दुर्गे ,,सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ,शरण्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ,ब्रम्हरूपे सदानन्दे परमानन्द स्वरूपिणी ,दूत सिद्धिप्रदे देवि नारायणी नमोस्तुते ,शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणी नमोस्तुते ,,,सिह्स्था शशिशेखरा मर्कात्प्रख्येश्चतुभिर्भुर्जेः शंखं चक्रधनुः शरांश्च दधती नेत्रेसित्रिभिः शोभिता ,,, सुस्वागतम ,,,ना दैन्यं ना पलायनम …………………………………………………….जय भारत

syeds के द्वारा
September 29, 2011

प्रिय मनोज भाई, मंच पर एक बार फिर आपका स्वागत है, और वादा कीजिए की मंच छोड़कर नहीं जायेंगे आप…भले ही हमारे विचारों में कितना भी अंतर हो… दिलों में नहीं होगा… जय हिंद जय भारत….

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय syeds भाई, सादर वन्देमातरम| आपकी स्नेह सिक्त प्रतिक्रिया को हार्दिक अभिवादन|मैं यह स्पष्ट कर चूका हूँ की वैचारिक अंतर समष्टिगत एकता को कहीं से भी प्रभावित नहीं करती|मनुष्य के सम्पूर्ण विचार तो अपनी स्वयं की पत्नी से भी नहीं मिलते|फिर भी दोनों में अद्वितीय प्रेम रहता है|स्रष्टि का प्रत्येक कण एक दुसरे से सम्बंधित है और कई मसले पर तो इतनी निकटता है की वैचारिक भिन्नता का पूर्ण लोप ही लोप ही प्रतीत होता है|अब मैं इस मंच पर स्थायी रूप से अपना डेरा जमाना चाहता हूँ|ये वादा रहा|जय भारत, जय भारती|

Rajkamal Sharma के द्वारा
September 29, 2011

तुम आ गए हो नूर आ गया है नहीं तो चिरागों से लो जा रही थी :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/26/“वेश्यावृत्ति-को-कानूनी/

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय राजकमल भाई, सादर वन्देमातरम| कभी राम बनके, कभी श्याम बनके, चले आना, प्रभुजी!चले आना| नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती| इ आपका emoticon कॉपी करने के चक्कर में मेरा एक ३२ रुपये वाला कमेन्ट खो गया, अब मैं अमीर कैसे बनूँगा भाई?………..चलिए कोई बात नहीं…आप हमारे दोस्त हैं…अब वह वाला कमेन्ट तो आ नहीं सकता, ye बताईये emoticon डालते कैसे हैं?

chaatak के द्वारा
September 29, 2011

प्रिय मनोज भाई, सादर वन्देमातरम, आपकी वापसी की जानकारी पाकर मन गदगद हो उठा, निश्चय ही आपकी उपस्थिति हृदय को बहुत अखर रही थी| ऐसा नहीं कि मंच से आपके अनुपस्थित रहने के कारण की जानकारी न रही हो फिर भी जब कभी भी मंच पर दृष्टिपात किया तो सबकुछ अपना सा महसूस होते हुए भी स्वयं को प्रकट करने में और किसी भी तरह की अभिव्यक्ति कर पाने में असमर्थ पाया| आज जब आपकी पोस्ट देखी तो लगा जैसे आपकी नहीं वरन स्वयं मेरी वापसी हुई हो! स्वागत है, वन्देमातरम!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय चातक भाई, सादर वन्देमातरम| सही कहते हैं आप|अब आपसे क्या छुपाना|हमारे घर से आपकी दूरी भले ही लगभग 350 kilometer हो, कभी ऐसा लगा नहीं|सपना आप भी देखते हैं, सपना मैं भी देखता हूँ और इसीलिए हम दोनों दुबले पतले हो गए हैं, पर क्या करूँ आदत है छुटती ही नहीं|मैंने भी जब जागरण का दीदार किया एक नालायक मिल गया, मन किया की दूं एक थप्पड़ घुमा कर, बहुत कुछ सोच कर और थोड़ी सी मालिश कर निकल आया|क्या करूँ मुझे लगा की मुझे गाली दे रहा है, अबकी बार कुछ दायें बाएं किया तो राम कसम छोडूंगा नहीं| नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती|

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 29, 2011

भाईसाहब, आपको तो वैसे भी नहीं जाने देते हम लोग। आपका स्टैंड तो हमेशा ही अटल रहा है शाश्वत सत्य की तरह। मैं आपके साथ हूँ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय वाहिद भाई, सादर वन्देमातरम| बस इसीलिए तो रेशमी धागे से बंधे आयेंगे सरकार मेरे और मैं आ गया|मैं भी आपको कहाँ जाने दूंगा?अरे भैया आप हमारे पडोसी ही हो न|जब भी मौका मिला दनदनाता पहुँच जाउंगा आपके पास अपनी रामप्यारी पर सवार होकर| नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती|

    Santosh Kumar के द्वारा
    September 30, 2011

    मनोज जी ,.आपकी रामप्यारी मोटर साईकिल है या कार ,..बुरा मत मान लेना मैं अपनी मोटरसाइकिल को रामप्यारी ही कहता था ,..साभार

आर.एन. शाही के द्वारा
September 29, 2011

देर आयद, लेकिन दुरुस्त आयद मनोज जी । उम्मीद है अब नियमित सत्संग का सौभाग्य प्राप्त अवश्य होता रहेगा । बधाई !

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    आदरणीय शाही जी, सादर वन्देमातरम| देर तो हो ही गयी है, पता नहीं क्या क्या छुट गया|ज्ञानी जी के बहुत से संस्करण शायद छुट गएँ हैं|आपके तर्कों की मार और व्यंगात्मक धार का महुवर की भाँती मादक प्रहार, अभी भी मेरे मनः पटल पर सजीव हैं|जिस तरह से बिना देखे प्रत्येक चिट्ठाकार का चरित्र चित्रण आपने अपनी अनूठी शैली में किया है वह एक सामर्थ्यवान लेखनी में ही संभव है|आपकी प्रतिक्रया पाकर गदगद हुआ हूँ|नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती

Vinita Shukla के द्वारा
September 29, 2011

स्वागत है!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय बहन विनीता जी, सादर वन्देमातरम| आपकी प्रतिक्रिया को सादर नमन|आभार|नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती

roshni के द्वारा
September 29, 2011

मनोज जी नमस्कार आपका इस मंच पर फिर से हार्दिक सवागत है आशा है की अब आप इस मंच को विदा नहीं कहेगे .. और अपने कीमती विचार हम से सांझे करते रहिएगा आभार सहित

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय बहन रोशनी जी, सादर वन्देमातरम| आपकी प्रतिक्रिया को सादर नमन|अब नहीं छोडूंगा|इस मंच को विदा कहना मेरी मजबूरी थी, अब जब तक मेरे यह मंच मुझे लिखने की इजाजत देगा मैं लिखता रहूँगा|नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती

Santosh Kumar के द्वारा
September 29, 2011

आदरणीय मनोज जी ,.सादर अभिवादन मैं इस मंच पर नया हूँ ,..आपकी कुछ रचनाये पढ़ी हैं,.. “तुम सुन्दर नहीं हो”.. बहुत सुन्दर लगी … अब आप दुबारा इस मंच पर आ गए हैं ,…बहुत हर्ष हुआ…. मैं आप की बात से सहमत हूँ ,.. यह मंच बुद्धिजीविओं का है,… मैं तो निपट मूरख हूँ ,..मुझे नहीं पता चरम दक्षिणपंथी क्या होते हैं ,…चलो इस मंच के प्रताप से यह भी पता चल जाएगा … छोटे भाई की तरफ से आपको हार्दिक शुभकामनाये … http://santo1979.jagranjunction.com/

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय भाई संतोष जी, सादर वन्देमातरम| आपकी ब्लॉग एड्रेस १९७९ से ऐसा प्रतीत हुआ की हम और आप एक ही वर्ष इस धरती पर पधारे हैं|मैंने एक साल पहले लिखना शुरू किया तो इसका यह मतलब थोड़े ही है की मैं बड़ा लिक्खाड़ हो गया|आपको मेरी रचनाएं अछि लगी यह जानकार मैं अभिभूत हुआ हूँ|यदि आप मुरख हैं तो मैं कम मूरख नहीं हूँ और यकीन जानिये जो मूर्ख होते हैं वही माता के अच्छे बेटे होते हैं ऐसा मेरा मानना है बाकी तो गाल ही बजाते रहते हैं|मेरा पक्ष भारत माता है यही दक्षिण पंथ है भाई और जो भी इस पर दृढता पूर्वक कायम है वह चरम दक्षिण पंथी|नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती

    Santosh Kumar के द्वारा
    September 30, 2011

    प्रिय मनोज भाई जी ,. वन्देमातरम आपकी बात बिलकुल सही है ,..लिखना आपने एक साल पहले शुरू किया मैंने भी करीब ९-१० महीने पहले ,..कमाल है मुझे इस बात का भान ही नहीं कि मैं भी दक्षिण पंथी हूँ ,..आपका कोटिशः आभार ,.आपने इतने सरल शब्दों में समझाया ,…जिस बात को समझने के लिए मुझे ३२ वर्ष जीना पड़ा उसको …पुनः आभार आपकी शुभकामनाये ह्रदय छु गयी ,.. जगत जननी माँ दुर्गा आपको सदैव अपनी शक्ति प्रदान करती रहें ,. जय माँ भारती

abodhbaalak के द्वारा
September 29, 2011

मनोज भाई आपका मंच पर फिर से स्वागत है, सच में आपकी कमी सब ने ही महसूस की थी और इस लए आपके आने से……. विचारों में मतभेद होने से कोई गैर नहीं हो जाता, भाई भाई में विचारों की एकता नहीं होती तो ….. वैसे आपभी मेरे “वाद” से परिचित हैं पर आपका सम्मान सदा किया है, और करता रहूँगा….. आशा है की आपसे पहले की भांति इस बार भी ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रिय भाई अबोधबालक जी (क्षमा कीजियेगा मैं आज तक आपका संबोधन नहीं ढूंढ़ पाया) सादर वन्देमातरम| विचारधारा में अंतर किसी को किसी का जानी दुश्मन थोड़े ही बनाता है| प्रिय भाई मैं आपकी विचारधारा से परिचित हूँ और आपके शाश्वत प्रेम से भी|आपका भी ध्येय वही है जो मेरा है और इसीलिए आपककी प्रतिक्रियायों के माध्यम से मेरे अपने मन की वेदना भी प्रतिध्वनित होती है बस अंतर केवल एक बात का है की आप गुड से भी ज्यादा मीठे हैं और मैं नीम से भी अधिक कड़वा|जो भी हो, विचारधारा एक है इसलिए मुझे आपकी उपस्थिति का सर्वदा इन्तजार रहा है और रहेगा|नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती

Alka Gupta के द्वारा
September 29, 2011

मनोज जी , इस मंच पर पुनरागमन हेतु हार्दिक स्वागत है ! मंच पर आपकी उपस्थिति प्रशंसनीय व आनंददायक है…..पूर्व की भांति आपकी ओजपूर्ण रचनाएँ अब पुनः पढने को मिलेंगी…….हार्दिक आभार !

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    आदरणीय अलका जी, सादर वन्देमातरम| शायद ही मेरा कोई ऐसा पोस्ट होगा जिस आपकी प्रतिक्रिया न हो आपकी ममतामयी उपस्थिति मुझे आपका ऋणी बनाती हैं और सच पूछिये तो मुझे आपके प्रतिक्रियाओं का इन्तजार भी रहता है अब जब आ गया हूँ तो कुछ न कुछ तो लिखता ही रहूँगा ओज का निर्धारण आपकी प्रतिक्रियाएं करेंगी|Facebook पर आपकी प्रतिक्रियाएं मेरा उत्साहवर्धन करती हैं और यहाँ भी करती रहेंगी यह मुझे पूर्ण विश्वास है|नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय भारत, जय भारती

jlsingh के द्वारा
September 29, 2011

मनोज जी, आपकी कवितायेँ मैं facebook पर भी पढता रहा हूँ, और अन्दर की ज्वाला को जगाने का प्रयास कर रहा हूँ. आपने मेरी प्रतिक्रिया को वहां भी देखा होगा. पर क्षमा चाहूँगा कि सभी कविताओं को पढने के बाद भी सब पर प्रतिक्रिया नहीं ब्यक्त कर पाया हूँ, पर मैंने अन्दर ही अन्दर आपके देश प्रेम की ज्वाला को महसूस किया है. अन्य लोगों में भी आपने देश भक्ति के बहव पैदा किये हैं, ऐसा मैं अनुभव करता हूँ. jj पर लौटने का आपका स्वागत और शुब्कामना!– जवाहर!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    आदरणीय जवाहर जी, सादर वन्देमातरम| Facebook पर आपकी प्रतिक्रियाएं मेरा उत्साहवर्धन करती हैं और यहाँ भी करती रहेंगी यह मुझे पूर्ण विश्वास है|कई बार चाहते हुए भी व्यक्ति असमर्थ होता है इस निमित्त प्रतिक्रियाएं देना अथवा न देना यह कहीं से भी प्रदर्शित नहीं करता की आपकी मेरे प्रति स्नेह में किचित भी न्युनता है नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं सहित भारत, जय भारती

Ramesh Bajpai के द्वारा
September 29, 2011

प्रिय श्री मनोज जी आपकी उपस्थिति ने मन को जैसे उपकृत कर दिया है | ” मैं यह नहीं जानता यह कौन सी वेदना है, कौन सी टीस है, कौन सी चुभन है जो मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है लेकिन उन अनुभूतियों को शब्दों में पिरोने का एक अकिंचन प्रयास अवश्य करता हूँ|मैं” ज्यादा नहीं लिख रहा पर ,आप मेरे मनो भावो को समझ लीजिये गा | माँ जगदम्बा सदा मंगल करे | हार्दिक शुभ कामनाओ सहित |

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 29, 2011

    आदरणीय वाजपेयी जी, सादर वन्देमातरम| नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं|इस नवरात्रि में तीनों महाशक्तियां और नवोंदुर्ग को भेदने वाली नवोंदुर्गा अपनी दिव्य शक्तियों से आपको आप्लावित करें|आप हमारे परम स्नेही है और सदा हमसे जुड़े रहने के कारण आपके पितातुल्य स्नेह से मैं सदा अनुग्रहीत होता रहता हूँ|प्रतिक्रिया को सादर नमन|जय भारत, जय भारती|


topic of the week



latest from jagran