मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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तुम सुन्दर नहीं हो

Posted On: 29 Jul, 2011 Others में

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यह कैसी सुंदरता –

जिसने एक सूबेदार के प्राण ले लिए –

और घायल कर दिया –

दो सिपाहियों को|
पाकिस्तान ने शूर्पणखा को भेजा है|

और कैसे भूलूँ? तुम –

हमसे मिलने के पूर्व –

मिल आई हो –

गिलानी, मीरवाइज और यासीन मालिक जैसे –

लफंगे, जेहादी काश्मिरिओं से|
सुंदरता, सत्यता और शिवता में निहित है|

हमारे देश के शहीदों की –

सडती हुई लाशों से –

फूटती हुई सड़ांध –

तुम्हारी कंचन काया से निकल –

हमारी नासिका को प्रदूषित करती है|

और असर भी तो हुआ है –

प्रदूषण का|

देख, हमारे देश का भटका हुआ नौजवान –

तुमसे शादी करना चाहता है|

हिना! तुम सुन्दर नहीं हो –

भले ही सत्रह लाख का पर्स,

तेरह लाख की घडी –

सब कुछ लूटा दो –

अपनी कल्पित सुंदरता के साथ –

इस अनन्य भारत पर|

फटे – पुराने चिथड़ों में –

किसी तरह अपनी लाज बचाती,

किन्तु,

स्वाभिमानी,

उपले बीनने वाली,

एक परित्यक्त ग्रामीण कन्या –

तुमसे कहीं अधिक सुन्दर है|



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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
September 29, 2011

और सुन्दर हो भी नहीं सकती, क्योंकि तुमने अपने नाम के साथ ‘खर’ जो जोड़ कर रखा है जो तुम्हारे आवाज के साथ मेल खाती है. खर का मतलब हमलोग समझते हैं. भगवान् हमारे कृष्ण को बचाएं!

sumandubey के द्वारा
August 21, 2011

मनोज जी अच्छी रचना है । हमारे नेता तो बस एक ही राग अलापते रह्ते है समझौते का और वो सैनिकों की जान गंवाते रह्ते ।

Nikhil के द्वारा
August 3, 2011

प्रिय मनोज भाई, मन के मेल को चमरे के रंगों से छिपाना आसन नहीं है. काले चश्मे और गोरी चमरे के पीछे की चालाकी शायद हमारे नेता-गन देख नहीं पा रहे हैं. शानदार रचना!

chaatak के द्वारा
August 3, 2011

प्रिय मनोज जी, इस पाकिस्तानी सूर्पनखा का बिलकुल सही चित्रण किया है आपने| इस हिना से ज्यादा खूबसूरती उन ग्रामीण स्त्रियों में है जो श्रम करते हुए अपनी रंगत को तो जला लेती हैं लेकिन उनका तेज़ ऐसी हजारों कमनीयों को लजाने के लिए काफी है| वन्देमातरम !

neelamsingh के द्वारा
July 30, 2011

मनोज भाई जिस सौंदर्य में विकृति हो , वह प्रशंसा के काबिल नहीं , मुझे तो वह बकरी कहीं से भी सुन्दर नहीं लगती क्योंकि उसकी नीयत में खोट है , आपकी कविता काबिले तारीफ़ है एक सच्चे हिन्दुस्तानी के कलम की आवाज है |

Alka Gupta के द्वारा
July 30, 2011

मनोज जी , हमारी प्रवृत्ति ही यह है कि अपने ही घर में विद्यमान सौन्दर्य को नज़रंदाज़ कर देते हैं और अपने मुख्य उद्देश्य को भूल कर किसी बाहरी व्यक्तित्त्व की बाह्य सौन्दर्य से प्रभावित हो जाते हैं अति उत्तम भावाभिव्यक्ति !

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 30, 2011

नयन कटारी नहीं चलेगी भारत माँ के लालो पर देख रहे हम काले धब्बे उनके सुन्दर गालो पर मुह में राम बगल में छूरी पहले इसको तुम त्यागो नफरत के फिर भाव भूल कर प्रेम हमारा तुम मांगो प्रिय श्री मनोज जी , जय भारत |

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 30, 2011

    अहह, प्रेम शाश्वत, सुन्दर है – सत्य, सनातन धारा है – किन्तु हमारी चिंतन पद्यति को पछुवा ने मारा है| विकल रागिनी जब प्राणों में – बजती, स्वर्ग दहल जाता| निष्ठा और श्रद्धा की गर्मी से पाषाण पिघल जाता| यह तो जिनका ह्रदय सरस है और चेतना बाकी है| जिनको अपने से भी बढ़कर – गैरों की आजादी है| कण-कण में जिनको शिव शंकर, अणु अणु में जिनको भगवान| उन्हें प्रेम की सुधा मिलेगी, उन्हें प्रेम की है पहचान| खड्ग बनाकर प्रेम उतारो, गर्दन झुकने को तैयार| किन्तु प्रेम से तुम्हे शत्रुता, बचो, कर रहा हूँ मैं वार| आदरणीय वाजपेयी जी….सादर चरण स्पर्श| माँ भारती को समर्पित आपकी बेहतरीन काव्यात्मक प्रतिक्रिया का कोटिशः आभार, जय भारत, जय भारती|

Arunesh Mishra के द्वारा
July 30, 2011

बहुत खूब मनोज जी.

J L SINGH के द्वारा
July 30, 2011

पाकिस्तान ने शूर्पणखा को भेजा है| फटे – पुराने चिथड़ों में – किसी तरह अपनी लाज बचाती, किन्तु,स्वाभिमानी, उपले बीनने वाली, एक परित्यक्त ग्रामीण कन्या – तुमसे कहीं अधिक सुन्दर है| काश! अगर हमारी सरकार समझ पाती! तो आपके आक्रोश is प्रकार न फूट पड़ते. vande matram aur sadar namaskar!

rudrapunj के द्वारा
July 29, 2011

पाकिस्तान ने शूर्पणखा को भेजा है…………………………….इस पंक्ति की कोई तुलना नहीं है लेकिन मयंक जी आज कल के अख़बार और चैनल इस कथित शूर्पणखा की खूबसूरती के कायल है और मुझे तो लगता है की इस कलियुगी शूर्पणखा की सुन्दरता पर अनेक मंत्री नेता घायल है

vinitashukla के द्वारा
July 29, 2011

ओजपूर्ण भाषा में लिखी यह कविता देश के भटके हुए नौजवानों को एक बहुत ही सशक्त सन्देश देती है. कोटिशः बधाई.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 29, 2011

    आदरणीय विनीता जी, सादर वंदे मातरम। काश कविताओं से काल्पनिक चित्रपट और नश्वर दैहिक सुंदरता की वासनामयी खोज में लिप्त हमारे देश का अभिमन्यु राष्ट्रद्रोहियों के चक्रव्यूह का क, ख, ग भी समझ पाता.शायद मेरा लिखना सार्थक होता. आपकी प्रतिक्रिया को सादर नमन।जय भारत, जय भारती

nishamittal के द्वारा
July 29, 2011

बहुत सुन्दर भाव मनोज जी,पाकिस्तान की घिनौनी चाल तो है ही और उससे अधिक मूर्ख हैं उसमें उलझने वाले.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 29, 2011

    आदरणीय निशा जी, सादर चरण स्पर्श| आपकी ममतामयी प्रतिक्रिया को सादर नमन|हाँ, यह बात निराश कर देने वाली है की जब भी हमारे देश में कोई विदेशी राजनयिक आता है तो हम असल मुद्दों को भूल उसकी बाह्य सुंदरता और कुत्ते – बिल्लियों तक की तारीफ़ करने लगते है और हमारा मीडिया अपनी टी आर पी बढ़ाने के चक्कर में इन्ही बेहूदा ख़बरों को निहायत ही गैर जिम्मेदाराना ढंग से नाजायज तरजीह देता है|जय भारत, जय भारती|


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