मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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बम बम बोला - Holi Contest

Posted On: 18 Mar, 2011 में

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काशी में होली मनावें भवानी, भूत-प्रेत संग औघड़ दानी |

खाय भाँग का गोला , जगत का कण कण, बम बम बोला ||

अंग भभूत गले मुंडमाला,

कटी पर बांधे हैं मृगछाला|

करुणामय नयनों से देखे ,

मस्त, मस्त का टोला ||

जगत का कण कण, बम बम बोला |

इधर अघोर रूप करुणामय,

सर्वेश्वरी हैं उधर दयामय |

रास अलौकिक, दिव्य जगत में

सिद्धगणों का होला ||

जगत का कण कण, बम बम बोला |

इधर विनायक, भैरव नाचे,

महारुद्र का डमरू बाजे |

मन-मयूर पर चढ़कर कार्तिक

गाये सोरठा, रोला ||

जगत का कण कण, बम बम बोला |

सिंहवाहिनी कर पिचकारी,

सभी देवता देते ताली|

संसृति के अनेक रंगों में

एक रंग ही घोला ||

जगत का कण कण, बम बम बोला |

इंद्र देवता भी मुस्काए,

रंग बिरंगे बादल छाये|

नभ से रंग बरसता झम झम

भींग गया यह चोला||

जगत का कण कण, बम बम बोला ||

रंगोत्सव के शुभ अवसर पर श्री गुरुदेव जी के चरणों में इस अकिंचन का यह काव्यमय प्रसून सादर समर्पित है|

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vinitashukla के द्वारा
March 22, 2011

भोले भंडारी की रसमयी लीला से युक्त होली का ये वर्णन आत्मविभोर कर देने वाला है. भक्ति के रंग में रंगी सुन्दर रचना. बधाई स्वीकार करें.

vinitashukla के द्वारा
March 22, 2011

भोले भंडारी की रसमयी, ओजस्वी लीला की झलक आपकी इस कविता में मिली. भक्ति के सौन्दर्य से युक्त होली का यह अलौकिक वर्णन आत्मविभोर कर देने वाला है. इस सुन्दर कृति के लिए बहुत बहुत बधाई.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 23, 2011

    आदरणीय विनीता जी सादर वन्देमातरम, आपको गीत अच्छा लगा,यह जानकार प्रसन्नता हुई|प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आभार|बाबा का तो दरबार ही ऐसा है की जो एक बार भी सच्चे मन से शरण में जाता है,उसका इहलोक और परलोक दोनों ही धन्य हो जाता है..बाबा ने प्रेरित किया सो लिख दिया और कंटेस्ट में भी डाल दिया,पुरस्कार की कोई कामना नहीं|साभार जय भारत,जय भारती

ashvinikumar के द्वारा
March 21, 2011

मनोज भाई होली की हार्दिक शुभकामना ,, भाई नीचे शायद राजकमल जी को भंग चढ़ा है चकाचक के अंदाज में टूट दे हैं ,,जय हो राजकमल भाई की ,,:) कुमकुम ऐसा बिखरा ,जैसे बिखरी हो ऊषा की लाली , निविड़ निशा में संसृति की ,निर्झर सी बहती हरियाली ,, वासन्ती का वैभव वह ,जिसका पंचम स्वर पिक सा हो , फिर गूंज उठे नस नस में यूँ ,लावा बन के जो मचलता हो ,, हिल्लोल भरा यह फागुन हो ,गोधुली की सी ममता हो, जागरण प्रात सा हंसता हो ,जिसमे आध्यात्म निखरता हो ,, फूलों की कोमल पंखुरियाँ,करतीं जिसका अभिनन्दन हों , उज्जवल वरदान चेतना का ,सोंदर्य भी बम बम जैसा हो ,, …..जय भारत

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    सत्यं शिवं सुन्दरं आदरणीय अग्रज राजकमल भाई का अंदाजे बयां ही कुछ ऐसा है की चमत्कृत हो जाने का मन करता है|एक अत्यंत ही ओजस्वी कविता के माध्यम से हर हर बम बम करती आपकी प्रतिक्रिया को शत शत नमन …..जय भारत,जय भारती

rajan के द्वारा
March 21, 2011

मित्र मनोज जी !!!! आपके जैसे शिष्य को पाकर गुरु की महिमा पुरे संसार और फैलती है . जैसे स्वामी विवेकानंद ने राम कृष्ण परमहंस को पाया था . होली की आपको हार्दिक शुभकामनाएं ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    प्रिय मित्र राजन जी, यह तो आपका मेरे प्रति स्नेह है….जो आपने मेरी तुलना एक ऐसे महापुरुष से कर दी जो मुझे हमेशा प्रेरित करते रहते हैं और मेरे सर्वोच्च आदर्श है….सपरिवार होली की मंगलकामनाओं सहित…जय भारत, जय भारती

kmmishra के द्वारा
March 20, 2011

मनोज जी सादर वंदेमातरम ! ब्रज की होली तो बहुत सुनी थी आज काशी का होला भी देख लिया । आपका यह काव्य काशीविश्वनाथ को भी प्रिय होगा । होली की आपको हार्दिक शुभकामनाएं ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    आदरणीय मिश्रा जी, सादर वन्देमातरम आपको प्रिय है तो काशी विश्वनाथ को भी प्रिय है…काशी की होली जगत विख्यात है….भूतभावन बाबा भोलेनाथ से होली खेलने का आनंद ही कुछ और है …जस दूल्हा तस बनी बराता की तर्ज पर काशी की होली होला ही है, आपको भी बीते हुए और आगामी समस्त होलियों की सपरिवार हार्दिक बधाईयां|क्षमा कीजियेगा उत्तर देने में विलम्ब हो गया|

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 19, 2011

इधर अघोर रूप करुणामय, सर्वेश्वरी हैं उधर दयामय | रास अलौकिक, दिव्य जगत में सिद्धगणों का होला || प्रिय श्री मनोज जी शब्दों का यह विन्याश अलौकिक , अद्वितीय व अकथनीय है इन दिब्य भावो का माधुर्य तो बस आत्मसात ही हो पाया | बहुत बहुत बधाई

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    आदरणीय वाजपेयी जी, सादर चरण स्पर्श| मैंने भरसक प्रयास किया है की इस गीत को आत्मसात करने लायक बना सकूँ,आपको पसंद आया यह जानकार मैं कृतार्थ हुआ बहुत प्रयास करने पर भी ण तो मैं छुटता है और ण अहं|शायद इस जन्म में छुट भी न|फिर भी प्रयास करता रहता हूँ | आपको बीते हुए और आगामी समस्त होलियों की सपरिवार हार्दिक बधाईयां|क्षमा कीजियेगा उत्तर देने में विलम्ब हो गया|

div81 के द्वारा
March 19, 2011

मनोज जी, आप को और आपके परिवार को होली कि रंगीन खुशियों भारी शुभकामनाएं ……………खूबसूरत रचना पर बधाई!………….कंटेस्ट के लिए शुभकामनाएं और

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    प्रिय बहन दिव्या सादर वन्देमातरम| आपको भी बीते हुए और आगामी समस्त होलियों की सपरिवार हार्दिक बधाईयां|क्षमा कीजियेगा उत्तर देने में विलम्ब हो गया|जय भारत, जय भारती

आर.एन. शाही के द्वारा
March 19, 2011

मनोज जी, महादेव को समर्पित आपकी यह होली की रोली दिव्य आभास कराने वाली है । उम्मीद है टिकाऊ रहकर आप भी अपना आभास कराते ही रहेंगे । होली की बहुत बहुत बधाइयां ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    आदरणीय शाही जी, सादर वन्देमातरम… आपको भी बीते हुए और आगामी समस्त होलियों की सपरिवार हार्दिक बधाईयां|क्षमा कीजियेगा उत्तर देने में विलम्ब हो गया|मैं तो हमेशा टिकाऊ रहना चाहता हूँ किन्तु क्या करूँ विवश हो जाता हूँ |आगे भी टिकाऊ रहने का प्रयास करूँगा|रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं|जय भारत, जय भारती

rajeev dubey के द्वारा
March 19, 2011

मनोज जी, यह रचना बड़ी ही भायी मन को … इसे संगीतबद्ध करवा कर किसी भक्ति गायक की वाणी में प्रचलन में लाया जाए तो बड़ा ही अच्छा होगा… होली पर शुभकामनाओं सहित

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    प्रिय राजीव भाई, रचना आपको पसंद आई यह जानकार कृतार्थ हुआ …कामना तो यही है की इसे किसी सुमधुर कंठ में उतर कर स्वर भी दिया जा सके…प्रिय मित्र वाहिद जी से बात भी हो गई है…सोचता हूँ उन्ही के कंठ में इसी मंच पर प्रस्तुत करूँ|एक प्रयास रहेगा|होली की बधाई देने में विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ |सपरिवार बधाईयाँ|जय भारत, जय भारती

March 19, 2011

मनोज जी इस शिवमय होली के लिए हार्दिक बधाई. होली की हार्दिक शुभकामनाये.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    प्रिय श्री राजेन्द्र जी…. सादर वन्देमातरम| आपको भी बीते हुए और आगामी समस्त होलियों की सपरिवार हार्दिक बधाईयां|क्षमा कीजियेगा उत्तर देने में विलम्ब हो गया|जय भारत, जय भारती

March 19, 2011

मनोज जी इस शिवमय होली के लिए हार्दिक बधाई. होली की हार्दिक शुभकामनाये

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 22, 2011

    प्रिय श्री राजेन्द्र जी…. सादर वन्देमातरम| आपको भी बीते हुए और आगामी समस्त होलियों की सपरिवार हार्दिक बधाईयां|क्षमा कीजियेगा उत्तर देने में विलम्ब हो गया|

chaatak के द्वारा
March 19, 2011

मनोज जी, ये काव्य प्रसून निश्चय ही गुरुदेव के लिए रंगों की सर्वोत्तम बौछार होगा| कंटेस्ट के लिए शुभकामनाएं और इस खूबसूरत रचना पर बधाई!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    प्रिय मित्र चातक जी| बोर्ड की परीक्षाओं में व्यस्तता के बावजूद आपकी स्नेह सिक्त प्रतिक्रिया को नमन है|आपको सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक सुभकामनाए|माँ भारती का यह वरद पूत सर्वदा राष्ट्र और मानवता को अपनी ओजस्वी रचनाओं से कृतार्थ करता रहे|जय भारत, जय भारती

वाहिद काशीवासी के द्वारा
March 19, 2011

भाई साहब, अब आप आ गए हैं और अश्विनी भाई भी आ गए हैं तो मेरे जैसे नामुराद की की क्या मजाल कि कुछ भी लिख सकूं… पिछले कॉन्टेस्ट के दरमियान ही मैंने सार्वजनिक रूप से क़सम उठा ली थी कि अब मैं किसी भी कॉम्पटीशन में हिस्सा नहीं लूँगा यदि जागरण जंक्शन उसका आयोजन करता है तो… इसके अलावा मैं उसी विषय पर लिखूंगा जो मंच द्वारा आयोजित किया गया है… पर मैं कॉन्टेस्ट के दायरे से बाहर रहने का प्रयास करूँगा…शीघ्र ही कोशिश होगी कि होली पर्व के पावन अवसर पर आप सब के समक्ष कुछ प्रस्तुत कर सकूं… अन्यथा… आप सब का सहयोग और सहकारिता तो पहले से ही प्राप्त है…| शुक्रिया इस स्नेह और आदर के लिए….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 19, 2011

    और हां… बम बम बोला का नारा इधर से भी है….

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    प्रिय मित्र वाहिद जी, सादर वन्देमातरम| मेरा इस मंच पर पुनरागमन मात्र कांटेस्ट के लिए ही नहीं है| हम सभी तो एक सूत्र में ही पिरोये हुए हैं|आपसे आपेक्षा है की आप भी इस कांटेस्ट में भाग ले, कारण मैं तो कांटेस्ट को एक चुनौती मानता हूँ…और चुनौती मानकर ही इसे स्वीकार किया है|पिछले कांटेस्ट में प्रिय मित्र चातक जी और आदरणीय निशा जी का विजयी होना ही यह सिद्ध करता है की युद्ध हो या प्रेम राष्ट्रवादी ही हमेशा विजयी होते हैं…और होली तो इस प्रेममय जगत की सर्वोच्च भारतीय अभिव्यक्ति है|वसंतोत्सव से लेकर होली तक पूरा एक माह तक चलने वाली पवित्र प्रेम की यह विशुद्ध भारतीय अभिव्यक्ति अंतर्राष्टीय स्तर पर भी विख्यात है….जागतिक से पराजागतिक तक|जय भारत जय भारती

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    बम बम भोला की तो बात ही निराली है…..धन धन भोलेनाथ तुम्हारी कौड़ी नहीं खजाने में, तिन लोक बस्ती में रख कर अपना रहे वीराने में| अभी देखता हूँ …

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 19, 2011

    मनोज जी, आपका अपनत्व ही यहाँ तक बार-बार खींच लाता है। मैं भी समझता हूँ कि आप सभी बंधु कॉन्टेस्ट के लिए यहाँ नहीं आये हैं और जो सूत्र हमें पिरोये हुए है उसे तोड़ने की क्षमता किसी में भी नहीं है। फिर भी कॉन्टेस्ट में हिस्सा नहीं ले सकता क्यूंकि तब मैं अपने वचन से पीछे हट जाऊँगा। इस बात के लिए क्षमा चाहूँगा।रही बात त्यौहार कि तो जैसे ही कुछ नया सूझता है आप सब के सामने फ़ौरन पेशगी होगी| वंदे मातरम..

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 18, 2011

आदरणीय मनोज जी ….. पैरीपैना लता दीदी की एक पैरौडी प्रस्तुत है :- तुम्हे और क्या दूँ मैं बधाई के “सिवाय” कि तुमको हमारी “नजर” लग जाए ….. इस राज्कम्लिया हरकत को सहन कर लीजियेगा कहीं गुस्से में डिलीट मत कर देना ….. होली कि पिचकारी भर -२ के शुभकामनाये भगवान shशिजी और माता पार्वती जी के श्री चरणों में प्रणाम

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    आदरणीय राजकमल जी| सादर वन्देमातरम| लता दीदी का तो मैं एक पंखा ही हूँ विशेषकर “ये मेरे वतन के लोगों” का|आपको सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक सुभकामनाये|जय भारत, जय भारती

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 18, 2011

आदरणीय निशा जी …..सादर प्रणाम ! लता दीदी की एक पैरौडी प्रस्तुत है :- तुम्हे और क्या दूँ मैं बधाई के “सिवाय” कि तुमको हमारी “नजर” लग जाए ….. इस राज्कम्लिया हरकत को सहन कर लीजियेगा कहीं गुस्से में डिलीट मत कर देना ….. होली कि पिचकारी भर -२ के शुभकामनाये भगवान shiv aur mata bhwaani ji ko prnaam

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    बड़े भैया…आदरणीय निशा जी को संबोधित यह टिपण्णी बहक कर मेरे पास आ गयी है|इसे मैं रख लेता हूँ| आप निशा जी को दूसरा भेज दीजियेगा|

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 18, 2011

आदरणीय मनोज जी …..सादर प्रणाम ! लता दीदी की एक पैरौडी प्रस्तुत है :- तुम्हे और क्या दूँ मैं बधाई के \"सिवाय\" कि तुमको हमारी \"नजर\" लग जाए ….. इस राज्कम्लिया हरकत को सहन कर लीजियेगा कहीं गुस्से में डिलीट मत कर देना ….. होली कि पिचकारी भर -२ के शुभकामनाये भगवान शिव जी और माता भवानी जी को प्रणाम

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    बड़ा भाई अगर प्रणाम करने लगे तो समझाना चाहिए की होली आ गयी है|अरे भैया मैं तो वाहिद जी की पुन्यप्रदा नगरी काशी का एक निवाशी हूँ जहाँ बड़े भाई साहब सांड पर भी होली की खुमारी देखते ही बनती है|चलिए अब आशीर्वाद देने का भी पुनीत कृत्य कर ही दे रहा हूँ| कुछ भूलचूक हो गयी हो तो माफ़ कर दीजियेगा|सादर आपका वन्देमातरम|

nishamittal के द्वारा
March 18, 2011

इतने अन्तराल के बाद होली पर शिव-पार्वती को आपके साथ हमारा कोटिश प्रणाम.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    आदरणीय निशामित्तल जी| सादर वन्देमातरम| आपकी संतुलित रचनाएं हमेशा ही हमारा मार्गदर्शन करती रहती है|रंगोत्सव होली के सुभ अवसर पर आपको सपरिवार मंगलकामनाएं|जय भारत, जय भारती

Alka Gupta के द्वारा
March 18, 2011

मनोज जी , बहुत दिनों के बाद रंगोत्सव के इस शुभ अवसर पर आपकी उत्कृष्ट कोटि की रचना पढने को मिली ! होली की मंगल कामनाएं !

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    आदरणीय अलका जी| सादर वन्देमातरम| आपको सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक मंगलकामनाएं| होलिकोत्सव पर जागरण परिवार द्वारा आयोजित होली कॉन्टेस्ट की हार्दिक शुभकामनाएँ | जय भारत जय भारती

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 19, 2011

    यार तुम कहाँ से आ गए?चलो अच्छा है होली है| जाओ बख्श दिया|तुम भी क्या याद रखोगे|

allrounder के द्वारा
March 18, 2011

मनोज भाई, नमस्कार बम – बम भोला करती बेहतरीन कृति पर बधाई ! होली और होली कांटेस्ट के लिए हार्दिक शुभकामनायें !

    atharvavedamanoj के द्वारा
    March 18, 2011

    प्रिय मित्र सचिन जी वन्देमातरम प्रतिक्रिया के लिए साभार…आपको रंगों का यह त्यौहार होली मंगलमय हो


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