मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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अल्लाह के नाम पर

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नाम – स्वस्तिका|

उम्र  – ११ माह १९ दिन|

तारीख – इस्लामी हिजरी १४३१ के  आखिरी महीना जिल्हिज्जा का आखिरी दिन |

स्थान – इबलीस के नुमाइंदों का काबा, दारुले हरब का केन्द्र बनारस|

समय – मुशरिकों की इबादत का समय, जब काफिर बड़ी संख्या में अपने माबूद की इबादत कर रहे हों|

आदेश – और तुम्हारा ईलाह एक अल्लाह है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं| (सूरा बकरा – १६३ )

एक धमाका |

परिणाम – वह (काफ़िर) हमेशा इसी हालत में रहेंगे, इनकी न तो सजा ही हलकी की जायेगी और न इनको मुहलत ही मिलेगी| (सूरा बकरा – १६३)

व्याख्या – और लोगों में कुछ ऐसे भी हैं जो अल्लाह के सिवा और को भी बराबर ठहराते हैं ( आधुनिक गांधीवादी और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष) की जैसी मुहब्बत अल्लाह से रखनी चाहिए वैसी मुहब्बत उनसे रखते हैं (ईश्वर, अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान अथवा एस डी वाजपेयी का गीता और कुरआन) और ईमानवाले जो हैं, उनको तो सबसे बढ़कर मुहब्बत अल्लाह से ही होती है ( इसी ब्लॉग मंच पर सिद्ध हो चूका है), और क्या ही अच्छा होता की इन अन्यायियों (काफ़िर, बुतपरस्तों) को सुझाई दे जाता जो उस समय सुझाई देगा (१३-२ -२०१०,२६-११-२००८,३०-१०२००८,२९-९-२००८,२७-९-२००८,१३-९-२००८,२६-७-२००८,२५-७-२००८,१४/१५-८-२००८,२८-७-२००५,७-३-२००६,२२-५-२००७,२३-११-२००७,१-१-२००८ इत्यादि,इत्यादि ) जब अजाब उनके सामने होगा की सारी ताकत ( ए के ४७ ,बम से लेकर छुरे  तक ) अल्लाह के ही अधीन है और यह की अल्लाह कड़ा अजाब देने वाला है| ( सूरा बकरा – १६५ )

अब चाहे कितने ही बुद्धिहीन, बुद्धिजीवी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मसखरे यह सिद्ध करने का प्रयास करें की वाराणसी में जो कुछ भी हुआ उसका कोई धार्मिक आधार न होकर मात्र एक विधिक समस्या है और उसका इस्लाम से कोई वास्ता नहीं, कुरान के आलोक में यह बात पुरी तरह से स्पष्ट है की बनारस में इंडियन मुजाहिद्दीन द्वारा जो कुछ भी किया गया है वह दीनी है और अल्लाह के मुसलमानों के साथ हुए अहद के मुताबिक है| अलहम्दुलिल्लाह रब्बिलाल्मिन अर्थात सब और की प्रशंसा सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के लिए है और जलिकल किताबु ला रैब ज साला फीहिज अर्थात यह वह किताब है, जिसमे कोई संदेह नहीं|

मैं आना ही नहीं चाहता था,अश्विनी भाई के साथ हुई दुखद दुर्घटना और मंच पर एक बड़े वर्ग द्वारा सत्य को झुठलाये जाने की प्रवृत्ति ने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया था लेकिन मंगलवार के दिन वाराणसी में हिंदू आतंकवादियों के निर्लज्ज आचरण ने एक बार फिर से मुझे इस मंच पर आने के लिए बाध्य कर दिया| हिंदू आतंकवादियों ने अल्लाह के नाम पर धमाका करने के लिए शीतला घाट जैसा जगह चुना अगर यह धमाका दशाश्वमेघ घाट पर हुआ होता तो शायद कुछ और कुर्बानियां मिल सकती थी|

भारतीय समय के अनुसार छह बजकर पांच मिनट पर गंगा आरती प्रारंभ हुई, छह बजकर ३५ मिनट पर जय,जय भागीरथ नंदिनी, मुनिचय चकोर चन्दिनी पूरा भी नहीं हो पाया था आरती स्थल से मात्र २० मीटर की दुरी पर एक शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ| बम कूड़ा फेकने वाले डिब्बे में रखा गया था|विस्फोट इतना शक्तिशाली था की शीतला घाट की रेलिंग के परखच्चे उड़ गए|पत्थर के मजबूत बोल्डर उखड गए और धमाके की आवाज २ किलोमीटर तक स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ी|विस्फोट के तत्काल बाद हिंदू आतकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन की और से समाचार एजेंसियों ही नहीं कुछेक राष्ट्रवादी ब्लोगरों को भी कुरान की आयत को उद्धृत करते हुए एक इ मेल प्राप्त हुआ जिसमे कहा गया की यह बम विस्फोट इंडियन मुजाहिद्दीन की तरफ से विश्व के महानतम लोकतंत्र में ६ दिसंबर की घटना के उत्तर में है, जब तक मुसलमानों को उनके प्यारे बाबरी खंडहर की क्षतिपूर्ति न कर डी जाय| ऐ कमीने शिव और पारवती के यौनांगो को पूजने वाले मुर्ख भरोसा रख की इंडियन मुजाहिद्दीन,महमूद गजनी,मुहम्मद गोरी,कुतुबुद्दीन ऐबक,फिरोज शाह तुगलक और औरंगजेब (अल्लाह इनको अपनी कुदरत से नवाजे)के बेटों ने यह संकल्प लिया है की तुम्हारे कोई भी मंदिर तब तक सुरक्षित नहीं रहेंगे जब तक की भारत भर में हमारे सारे कब्जे वाले मस्जिद मुसलमानों को सम्मान के साथ लौटा न दिए जांय|

ठीक ऐसी ही शब्दावली मेरे द्वारा लिखित ब्लॉग ”क्या कहता है कुरान हिंदुओं के बारे में भाग-१ ‘ में आज से तीन महीने पहले रमजान में ही किसी अज्ञात टिप्पणीकार द्वारा दाल डी गई थी| अब भी जहाँ भी कुरान की बात होती है ठीक इसी तरह की प्रतिक्रिया ब्लोगरों को प्राप्त होती है|मैं अपने ही द्वारा लिखे गए ब्लॉग पर आई टिपण्णी को उद्धृत करना चाहूँगा………………………

music के द्वारा

August 24, 2010

वाह बेटा तो यह अब मंच की गरिमा के अनुरूप नहीं है. और जो तुमलोगों ने शुरू किया है शायद वोह मंच के लिए सही है. अब ले मैं यह सारी बात हिंदी शब्दों में लिख देता हूँ. तब शायद समझ में आ जाएगा.

अगर तुम हिन्दुओं के हिसाब से लोग चलने लगे तो साले तुम्हारे जैसे लोग तो औरतों को फिर से सटी यानि जिन्दा जलने लगोगे. क्या यही हक दिया है तुम्हारे धर्म ने औरतों को जीने का. पत्नी के मरने पर पति को क्यूँ नहीं जिन्दा जलाते ? येही धर्म है तुम्हारा.

औरतें पवित्र हैं या नहीं इसके लिए तुम्हारे राम ने भी उसे आग पर चलने के लिए मजबूर कर दिया . क्या पत्नी पर विस्वास नहीं रहा तुम्हारा. ऐसी एक घटना हाल ही मैं घटी है. तो क्या तुम्हारे धर्म में मर्दों को ऐसे आग से गुज़ारना पड़ता है. नहीं !. पर क्यूँ. तुमलोगों का बस चले तो हर औरत को आग पर चलवाओ.

अगर औरत को स्तन नहीं हो रहा है तो वोह किसी के साथ भी सो सकती है बच्चा पैदा करने के लिए. क्या येही तुम्हारे धर्म में है. अब ऐसा करने के लिए कहा जाता है तुम्हारे धर्म में औरतों को . क्या येही हिन्दू धर्म है.?

जगह जगह नंगी औरतों की मूर्तियाँ और फोटो बनके तुमलोग क्या साबित करना चाहते हो की औरतों की तुम बहुत इज्ज़त करते हो. सरे अजंता और अल्लोरा की मूर्तियों को देखो, और दुसरे मूर्तियों को भी तो मालूम चलेगा ही यह सब ब्लू फिल्म के स्चेने हैं यानी बिलकुल 100 % porn हैं. क्या ऐसे ही खोल कर रखने की इज़ाज़त देता है तुम्हारा धर्म औरतों के बारे में.

जिस को मान कहते हो ऐसी देवी की मूर्ति बनाते हो. उसके आगे पीछे बार बार हाथ लगते हो. ऊपर नीचे सब जगहों को देखते हो. शर्म नहीं आती तुमलोगों को मान के बदन पर हाथ फेरते हो. और तो और पीछे से डंडा भी लगा देते हो. और कितनी इज्ज़त देना चाहते हो तुमलोग. बंद करो औरतों की अपने धर्म में बेईज्ज़ती . औरतों को सम्मान देना सीखो बेटा.

येही कारण है के हिन्दू औरतें दुसरे धाम के साथ जा रही हैं. क्यूंकि उन्हें वहां इज्ज़त , सम्मान और ज़िन्दगी सभी कुछ मिलता है. सुधर जाओ रे. औरतों की इज्ज़त को नीलम मत करो.

फ़ेंक दो अपने उन किताबों को जिसमें यह सारे गलत बातें लिखी हैं. सुधारो अपने साधू संतों को जो आये दिन रपे और लड़कियों का धंधा करते रहते है. वोह तो वास्तव में दलाल है. कुछ तो शर्म करो.

वोह विष्णु कितना अच्छा था सभी जानते हैं जिसने बलात्कार किया स्त्री का. पवन देवता ने भी ऐसे ही बलात्कार किया जिसका नतीजा हनुमान हुआ. न इधर का रहा न उधर का. एक औरत के साथ पांच पांच मर्द महाभारत में दिखाया. यह तो हद हो गयी.

और तो और सालों ने जुआ में अपने बीवी को ही लगा दिया. यह कौन से इज्ज़त दी है तुमलोगों ने स्त्री को. कृष्ण जहाँ रहा उनकी ही घर में सेंध लगा कर उनकी ही घर के लड़की को भगा ले गया. शर्म करो रे. सुधर जा अभी भी.

जिस लिंग की पूजा करते हो वोह है क्या जानते हो. वोह कुछ और नहीं वोह लिंग ही है. ऐसे स्त्रियों को खेलो मत तुमलोग.|

कहीं ब्लॉगों पर प्रतिक्रिया करने वालो के भी तार इंडियन मुजाहिद्दीन से तो नहीं जुड़े हुए हैं|आप कह सकते हैं की मैंने भी तो प्रज्ञा ठाकुर पर एक पूरी की पूरी कविता ही समर्पित कर दी है,लेकिन मेरा उनसे उतना ही सम्बन्ध है जितना की एक आम पाठक का देश विदेश के अन्य समाचारों के प्रति रहता है|

क्या एक ११ माह के बच्ची की हत्या ही राष्ट्रिय शर्म के प्रतीक बाबरी ढांचे की क्षतिपूर्ति है? यदि हाँ, तो क्षतिपूर्ति हो चुकी है और अब क्या इंडियन मुजाहिद्दीन वाहन पर रामलला के मंदिर निर्माण में सहयोग करेगा? संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर ध्यान दीजिए|ऐसा कभी नहीं होगा|एक नहीं हजारों स्वस्तिकाएं भी जिबह कर दी जाएँ तो भी कुरान की रक्त पिपासा शांत नहीं होगी|यहाँ तक की फितना भी बाकी न रह जाए सिर्फ अल्लाह के|

चलो मान लिया|पुरे विश्व में इस्लाम हो गया….अब ….कुरान मौन है क्योंकि नबी उनके आखिरी पैगम्बर है|और जब सब मुर्दे जिला दिए जायेंगे तब उनसे पूछा जायेगा की तुमने अल्लाह को छोड़कर और किसी की उपासना तो नहीं की? और अगर सब मुस्लमान भी हो जाएँ,तब भी यह सवाल पूछा जायेगा…..मिकाइल और जिब्राईल के द्वारा|

सबसे बड़ी बात तो यह है की चाहे एक मारें या एक हजार|जिन लोगों ने अनदेखे, अनजाने हिंदू आतंकवाद के नाम पर हाय तौबा मचा रखा है, क्या बनारस की घटना के बारे में उनके मुंह में उफ्फ़ करने की भी जुबान नहीं है? जाओ राहुल से पूछो की इंडियन मुजाहिद्दीन के बारे में उनका क्या विचार है और यह संघ का कौन सा आनुसांगिक संगठन है? जाओ चिदंबरम से पूछो की हिंदू आतकवाद के इस रूप पर आपकी क्या टिपण्णी है?जाओ जनार्दन द्विवेदी से पूछो की पुरातत्व संग्रहालय से निकले इस कौम के बारे में उनकी क्या मान्यता है? जाओ सोनिया से पूछो की मुद्दे पर पोप से बात करने के लिए वे कब इटली रवाना होंगी?जाओ मनमोहन से पूछो की हेनरी हाइड एक्ट के रूप में गुप्त समझौता करने वाले अमेरिका का इस घटना के प्रति क्या दृष्टिकोण है?

बनारस के साथ हमेशा ही सौतेला व्यवहार किया गया है|दिल्ली राजनैतिक रूप से चर्चित है,मुंबई आर्थिक रूप से चर्चित है तो बनारस धार्मिक,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से चर्चित है| अगर रोम में पोप को एक चींटीं भी काट ले अथवा काबा में संगे अस्वाद की और मुंह काके एक कुत्ता भी भौंक दे तो वह महीनों तक मिडिया में छाया रहता है|बनारस में २००५ में ही दशाश्वमेघ घाट पर आतंकी हमला हुआ था और प्रशासनिक अमलों में इसे सिलिंडर विस्फोट का नाम दिया गया|क्या सिलिंडर में अमोनियम नाइट्रेट और चारकोल का प्रयोग किया जाता है? बनारस की सुरक्षा के साथ मजाक करने के लिए केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारें दोषी हैं|इस धमाके ने बनारस के अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग को दश साल पीछे धकेल दिया हैं|

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372 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Muhammadnaaz के द्वारा
January 17, 2011

मनोज कुमार! मुझे सबसे पहले यह बताओ कि आप किस अनुवादक के नुस्ख़े से हवाले(सन्दर्भ) दे रहे हैं? क्यों कि हिन्दी में आज तक किसी भी सुन्नी आलिम का अनुवाद उपलब्ध नहीं है.आलमे सुन्नियत में आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा के उर्दू अनुवाद जिसका हिन्दी रूपांतर सैयद आलेरसूल हसनैन मियां का कलामुर रेहमान के नाम से बरकाती पब्लिशर(मुंबई) के द्वारा प्रकाशित हुआ है वो ही एक मान्य हिन्दी रूपांतर है.देवबन्दी आलिमों ने कुराने पाक के अनुवाद में तो हद करदी है! हराम को हलाल ओर हलाल को हरम! जाइज़ को नाजाइज़ ओर नाजाइज़ को जाइज़! मअज़ल्लाह अम्बिया को आम आदमी जैसा लिख दिया है देवबन्दियों ने.न जाने क्या-क्या अनुवाद कर बेठे हैं ये लोग.गैरे-सुन्नी आलिमों के अनुवाद हमारे लिए अस्वीकृत है. महत्व की बात तो यह है की ये लोग ही गैर मुस्लिमों के हाथों में कुरान जैसी मुक़द्दस किताब (जो सिर्फ किताब नहीं है अल्लाह का कलाम है) थमा देते हैं.जिसको आम मुसलमान समझने में असमर्थ हैं.जिसे समझ ने के लिए मुसलमान मदरसे में जाकर हदीस सीखते हैं,अरबी ग्रामर, शाने नुज़ूल(क्यों ओर किसके लिए), ओर फ़िक़ह सीखते हैं तब जाकर कहीं कुराने पाक का ज्ञान सीख पाते हैं. तो भला कोई गैर-मुस्लिम को कुरान दे भी दीया जाए तो उस से वो फायदा नहीं उठा सकता क्यों कि कुरान ईमान वालों के लिए हिदायत(निर्देश) है.ziyada jaankaari ke liye mera blog:www.haqaaya.blogspot.com dekh sakte hain…..

sanjay pal के द्वारा
December 31, 2010

respected sir u have done a great jobs.i have read ur two article.first is related to kuran and second is this. अब हिंदी में लिखता हूँ जो म्यूजिक ने लिखा ह उस को मई बाद में जवाब दूंगा? सर जी हम हमेशा देखते ए ह जब से २० साल हो गए,हमारे मंदिरों पर हमले हो,चाहे हमारे त्योहारों पर भरी र्सद्को पर विस्फोट हो ,हमारे नेता पाकिस्तान पर आरोप लगाकर शांत हो जाते .भारत एक बहुसंख्यक हिन्दू देश हा,अगर यहाँ कभी मस्जिदों पर विस्फोट क्यों नहीं होती,एड की नमाज पर विस्फोट नहीं होते ह,हम इनकी मस्जिदों इनके इलाके में कभी भी सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते ह. अप कही पर ही सरे देश में देख लेना जहा हिन्दू मजोरिटी में ह ,वहा पर चाहे एक मुसल मन परिवार आराम से रह सकता ह,पर अप उल्टा करना शायद हजारो में कोई एक मुस्लमान क़स्बा या मोहल्ला होगा जहा पर कोई हिन्दू परिवार इज्जत और सम्मान के साथ रहता हो.सच तो ये ह की हम अपने देश में ही गुलाम सिर्फ अपने लोगो की वजह से.क्या यादवो के कृष्ण राम से अलग ह,कांग्रेस वाले हिन्दुओ के भगवन अलग ह,बसपा क अलग ह .यार हम अज भी वैसे ही है जैसे गोरी और गजनवी के टाइम पर थे.हम अगर हिन्दू होने की बात करे तो कट्टरपंथ है.और ये मस्जिदों और मदरसों से अन्तंक्वादी पैदा करता रहे. ये सिलसिला चलता रहा तो एक पाकिस्तान २०२५ तक पैदा हो जायेगा.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 19, 2010

भ्राता मनोज जी………… काफी समय से मंच पर उपस्थित नही हो सका हूँ……… इस लिए प्रतिक्रिया नहीं दे पाया……… बनारस मे हुए विस्फोट ने उन लोगों पर चोट की है जो हिन्दू कट्टरता को देश के लिए खतरा बता रहे हैं……..ये हिन्दू सहर्दयता है जो 80 करोड़ हिंदुओं के देश मे कोई हिंदुओं को आतंकवादी कहने के बाद भी आराम से रह जाता है………….. अब इस सहृदयता को किस तरह से देखा जाए ये एक यक्ष प्रश्न है……… कभी यूं भी लगता है की ये हिंदुओं की कमजोरी है की कोई भी उन्हें कुछ भी कह कर अपना हित साध सकता है…….

    Will के द्वारा
    July 12, 2016

    I could squat almost 300 pounds and dead lift over 300 pounds.  Not bad for a recovering Stick Boy.  This book made me a believer in lot-erpewition weight training.  I’ve been preaching

वाहिद के द्वारा
December 15, 2010

आदरणीय मनोज जी| आपकी मुखरता देख कर गदगद हो गया| यह पिछड़ापन १० वर्ष का नहीं बल्के तिल-तिल करके बढ़ने का है| जो दूरी १० वर्ष में तय होनी है उसे पाने में २० वर्ष लग जायेंगे| धर्म और संस्कृति को अलग करना मुश्किल है, मगर कला और राजनीति का कोई नाता नहीं| तुष्टिकरण के वशीभूत केन्द्रीय सत्ता मदमस्त है और इस नशे को अंततः हम और आप जैसे सामान्य जन ही उतारेंगे|अब देश को इसी राष्ट्रवादिता की आवश्यकता है| यह समय है समान नागरिक संहिता के लागू होने का| संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के क्रियान्वित होने का| वाहिद http://kashiwasi.jagranjunction.com

rajkamal के द्वारा
December 8, 2010

राशिद जी ..आदाब ! मैंने अपने पहले के एक वयंग्य में भी कहा था और आज फिर से कहता हूँ कि जब -२ भारत क्रिकेट में कोई उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करता है तो देशवासियों को उसका जश्न मनाने से महरूम करने के लिए ऐसे काण्ड किये जाते रहे है …यह भी उनमे से एक ही है … लेकिन शायद चैनल वालो ने मेरी बात सुन ली…इसलिए ज्यादातर चैनल वाले धमाके कि खबर पर भारत कि जीत कि रिपोर्ट को तरजीह दे रहे थे … धन्यवाद

    rajkamal के द्वारा
    December 8, 2010

    मनोज भाई …माफ कीजियेगा …. आपको लिखी टिप्पणी में जल्दबाजी में भूलवश राशिद जी का नाम लिखा गया ..

    Andie के द्वारा
    July 12, 2016

    Vittu, mitkä kanat..Puput laitakaa turpat kii. Teilla ei oikeastaan oo edes varaa turkiksiin. Mitkä vitun valinnoista te täällä höpötätte. SäÃtlli¤täviä pikku lehmiä…


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