मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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हंगामा है क्यों बरपा ?

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014001बुधवार को भोपाल की किसी सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सर संघचालक माननीय श्री कुप्प सी सुदर्शन ने यूपीये अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लक्ष्य कर
दो तीन आरोप जड़े और पुरे देश में लाखों स्थानों पर उनका पुतला फूंक दिया गया| हमारे देश के माननीय सांसदों और सम्माननीय नेताओं ने उन्हें मानसिक रूप
से दिवालिया तक कह दिया|यह सब करते हुए ब्रिटिशकालीन पुरातत्व विभाग के गणमान्य संरक्षकों को यह भी विस्मृत हो गया की स्पेक्ट्रम घोटाले में आरोपित
अपने माननीय मंत्री का ये लोग कितनी बेशर्मी से बचाव कर रहे हैं? कांग्रेस के महासचिव और मिडिया प्रभारी जनार्दन द्विवेदी ने ”पुरातत्व संग्रहालय से निकले
इस शख्स के प्रति’ जो भाषा इस्तेमाल की उसके बारे में भारतीय जनता के मन में संघ अथवा भाजपा के प्रति कुछ धारणा बनी हो या न बनी हो कांग्रेस के बारे
में एक धारणा अवश्य बन गयी की कांग्रेस को चाहे जो कुछ भी बोलो या न बोलो सोनिया को अवश्य बख्श दो| स्पष्ट है की जम्हूरियत अथवा लोकतंत्र को कांग्रेस
के लोग सोनिया गाँधी के श्री चरणोँ मेँ समर्पित कर चुके हैँ और वे उनके बारे मेँ किसी भी टिप्पणी को न तो बर्दाश्त कर सकते हैँ और न ही टिप्पणीकार को अपना पक्ष रखने का कोई अवसर दे सकते हैँ।
संस्कृति और सभ्यता को अपने पैरोँ तले कुचल देने वाले गाँधी और नेहरु के मानस पुत्रोँ की भाषा शैली स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक क्या रही है ? यह सर्वविदित है।जब भरी आमसभा मेँ लोकतंत्र की निर्माता और निर्देशिका ने एक लोकतंत्रात्मक ढंग से चुने गये मुख्यमंत्री को मौत का सौदागर कह कर पुकारा था, तब यह कौन सी मर्यादित भाषा शैली थी? जब भरी आमसभा मेँ लोकतंत्र के पटकथा लेखक ने संघ और सीमी को एक ही तरह का आतंकवादी संगठन करार दिया था, तब वह कौन सी मर्यादित भाषाशैली थी? जब भरी आमसभा मेँ लोकतंत्र के अभिनेता ने देश के समस्त संसाधनोँ पर एक वर्ग विशेष का हक जताया था, तो वह कौन सी मर्यादित भाषाशैली थी? जब भरी आमसभा मेँ लोकतंत्र के विपणन – प्रभारी ने सभी हिन्दुओँ को बर्बर आतंकी कह कर पुकारा था और समग्र भगवा जीवन पद्धति को नृशंस हत्यारा कहा था, तो वह कौन सी मर्यादित भाषा शैली थी? जब आतंकी हमले के समय, पत्रकारोँ के सामने लोकतंत्र के शब्द शिल्पी प्रत्येक पाँच मिनट मेँ अपना सूट-बूट कस रहे थे, तो वह कौन सा मर्यादित आचरण था? जब भरी आमसभा मेँ लोकतंत्र के अल्पसंख्यक चरित्र ने हेमंत करकरे की शहादत को हिन्दू आतंकवादियोँ का कृत्य बताया था, तो वह कौन सी मर्यादित भाषा थी? जब पहले ही आम चुनाव मेँ गली – गली मेँ ‘गाँधी के हत्यारोँ को वोट देना पाप है’ जैसे आधारहीन नारे लगाये जाते थे, तो वह कौन सा मर्यादित आचरण था? जब हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सम्प्रभुता को ताक पर रखकर, भारत माता के ही एक हिस्से को लक्ष्य करते हुये ‘जिस जमीन पर घास का एक टुकड़ा नहीँ उगता, उसके बारे मेँ क्योँ चर्चा की जाय’ जैसा वाक्य बोला था, तो वह कौन सा मर्यादित आचरण था? जब बिना किसी ठोस कारण के मात्र राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता के वशीभूत होकर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राष्ट्रीय आपातकाल ठोँक दिया गया था, तो यह कौन सा मर्यादित कदम था? जब शहीदोँ की शहादत को भूलकर दिग्गी राजा आजमगढ़ मेँ घड़ियाली आँसू बहा रहे थे और मगरमच्छोँ के आँसू पोँछ रहे थे, तो यह कौन सा मर्यादित आचरण था? जब हमारे देश की प्रभुसत्ता काश्मीर मेँ हुर्रियत और गिलानी के कदमोँ तले रौँदी जा रही थी, तो यह कौन सी मर्यादा थी?
कुप्प सी सुदर्शन ने जो कुछ भी कहा, भावना के वशीभूत होकर कहा।वे किसी संसद मेँ नहीँ बोल रहे थे, जो उनपर असंसदीय शब्दोँ के बोले जाने का आरोप लगे।वर्तमान मेँ न तो माननीय सुदर्शन जी पर संघ का कोई दायित्व है और न ही भाजपा की ही उन पर कोई जिम्मेदारी है,उन्होंने जो कुछ भी कहा एक सामान्य नागरिक की हैसियत से कहा और मैंने ऊपर जो भी उदहारण दिए हैं,वे जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के हैं|कहा भी गया है ‘यथा राजा तथा प्रजा’ जब हमारा नेतृत्व ही भ्रष्ट होगा तो नागरिक किस मर्यादा का अनुसरण करेंगे? और यहाँ तो ‘एक होई तो कही समुझाओं,कुपही में यहाँ भंग पड़ी बा’ की तर्ज पर क्या राजा क्या प्रजा सभी चकरघिन्नी नाच रहे हैं,एकदम से नाच बलिये नाच की माफिक|
विरासत में ही हमारे मुंह में इतना जहर ठूंस दिया गया है की अब नेतृत्व को आम नागरिकों से अच्छे आचरण की उम्मीद त्याग देनी चाहिए|यदि आप हमारे मुंह पर तमाचा जड़ने का साहस करते हैं तो आपको भी मुक्का सहने को तैयार रहना चाहिए|यदि आप किसी के विरुद्ध तीखी शब्दावली का प्रयोग करते हैं तो आप को अपने कानों को वज्र बनाना पड़ेगा|किसी ने कुछ भी बोला और आपने उसके कर्यालय को फूंक दिया ‘यह तो बड़ी नाइंसाफी है रे’ इस तरह का आचरण मेरी समझ से परे है|
यह तो एक बानगी भर है..अगर गाँधी और नेहरु के मानस पुत्रों के चरित्र का फुर्सत से पोस्टमार्टम किया जाय तो ३६५ दिन में ३६५० ऐसे मामले प्रकाश में आयेंगे जब इनके किसी न किसी राष्ट्रिय अथवा राज्यस्तरीय नेता ने पानी पी पी कर संघ,भाजपा,हिन्दू,राष्ट्र और यहाँ तक की संविधान तक की खिल्ली न उड़ाई हो,जी भर कर गरियाया न हो| अब अगर…..’हौ इहै एक इच्छा,अरमान एतना बाकी, तू हमरी ओर ताका,हम तोहरी ओर ताकी’ ही वर्तमान राजनीती का यथार्थ है तो “हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है, लूटा तो नहीं हमने,चोरी तो नहीं की हैं” इस तरह की स्थिति पैदा करने के जिम्मेदार तो आप ही हो|

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhaskar singh, azad bhawan, के द्वारा
November 24, 2010

मनोज जी वन्देमातरम कांग्रेस पार्टी का तो चरित्र ही कने लायक नहीं है….यह हास्यास्पद ही है की आयातित नेतृत्व के सहारे हम देश के समग्र विकास की बात कर रहें हैं…..क्या हमारे देश में नेताओं की कमी हो गयी है

आर.एन. शाही के द्वारा
November 18, 2010

मनोज जी, आपके इस आलेख को टाँप ब्लाग श्रेणी में चयन के लिये ढेरों बधाइयां ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 20, 2010

    आदरणीय शाही जी…. आपको भी बहुत बहुत बधाइयाँ …

rajan,, के द्वारा
November 18, 2010

’हौ इहै एक इच्छा,अरमान एतना बाकी, तू हमरी ओर ताका,हम तोहरी ओर ताकी’ ही वर्तमान राजनीती का यथार्थ है तो “हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है, ——- काफी अच्छा लगा . लोग विरोध प्रदर्शन कर के शीर्स नेतृत्व के नजर में आना चाहते है ..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 20, 2010

    प्रिय मित्र राजन जी, सादर वन्देमातरम… शीर्ष नेतृत्व ही तो नीव की हमेशा से उपेक्षा कर रहा है ….जय भारत,जय भारती

krishnakantshrivastava के द्वारा
November 18, 2010

Dear Manoj Bhai, Jai Hind, Har shakh pe ulloo bathe hai anzame congress kya hoga. Her bhartiya shayad is mugalte me rahta hai are padosi ka ghar zala hai muje kya,per vo a nahi zanta ke padosi ke ghar kee aag mere ghar ko bhi zala sakti hai. Hum sab jante hai congress me PAD-POOJAN Pt.Nehru ke zamane se chala aa raha hai……..(Krishna Kant Shrivastava BHOPAL)

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 20, 2010

    प्रिय कृष्णकांत जी, सादर वन्देमातरम…. सच कहा आपने …बस एक ही उल्लू काफी है बर्बाद गुलिस्तान करने को …हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजामे गुलिस्ता क्या होगा…वाही होगा जो मंजूरे सोनिया होगा….गणेश परिक्रमा करने वाले खामोश थोड़े ही बैठेगे…जय भारत,जय भारती

Munish के द्वारा
November 15, 2010

मनोज जी, क्षमा चाहता हूँ ये लेख पहले नहीं पढ़ सका, काश ये लेख भारत का जन जन पढ़ पाता…..! काश जनता को सही – गलत का आभास हो पाता….! काश जनता स्वार्थपरता और जातिवाद से ऊपर उठकर वोट करती…….! काश इन देशद्रोहियों को कोई सबक सिखा पाता……! काश आप जनता की आवाज़ बनकर संसद में जा पाते…..! काश आप देश के……………………………………………..!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 15, 2010

    priy mitr munish ji.. i am extremely sorry that this time i am entirely unable to comment you in hindi as my transliteration server is non reachable…your love and liking towards my articles is a testimony of your eagerness for change of political power in the right direction. i wish i were meet all of your expectations..thanking you..vandemataram,jai bharat,jai bharati

rajkamal के द्वारा
November 14, 2010

मनोज भाई …वन्देमातरम ! मेरी हाजरी लगा लेना … थोड़े को ज्यादा समझना …

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 15, 2010

    raajkamal ji… hlag gai bhai..lekin roman me lagi..satyanash ho server ka kambkhat..apno kaa bhi saatha nahin deta…thoda hai par mera hai ye…vandemataram,jai bharat jai bharti

abodhbaalak के द्वारा
November 14, 2010

मनोज जी, कहीं पढ़ा था की कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना, छोडो बेकार की बातों को …. मेरा मानना है की बोलने के लिए आज कोई सोचता नहीं है, और बोलकर भी सोचता नहीं है, आपने जिन प्रश्नों को उठाया है वो वासत्व में सत्य है और गंभीर भी, और जनता को इनका उत्तर जान्ने का अधिकार है, रही बात श्री सुदर्शन जी के कमेन्ट की, तो अगर उनके पास कुछ तथ्य हैं तो उन्हें अवश्य सब के सामने रखने चाहिए, ताकि उस सत्य को सब जाने, http://abodhbaalak.jagranjunction.com

nishamittal के द्वारा
November 14, 2010

मनोज जी तथ्य परक लेख पर बधाई.सच से सामना का एपिसोड वैसे भाषा यदि हम स्वयं मर्यादित नहीं रखते तो दूसरों को दोष देने का हक़ हमको नहीं..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 14, 2010

    मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ ,बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाय…मैंने यथासंभव अपनी शब्दावली को संतुलित रखने का ही प्रयास किया है…मैंने हमेशा यह कोशिश की है की सत्य भी न ढकने पाए और जितना तीखा प्रतिपक्षी बोले उतना ही तीखा उत्तर भी पावें…मर्यादा भी बची रह जाय|लेकिन कभी कभी जब धरती अक्ष छोड़ देती है तो दिक्पालों को भी कापना ही पड़ता है|आपका कोटिशः धन्यवाद..जय भारत,जय भारती

chaatak के द्वारा
November 14, 2010

प्रिय मनोज जी, सादर वन्दे-मातरम, सोनिया गांधी का इस देश के साथ सिर्फ इतना नाता है कि कुछ पलों की भावुकता ने उन्हें स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की पत्नी और उनके दो बच्चों की माँ बनाकर कागजों में भारतीय लोकतंत्र का एक नागरिक बना दिया है| माननीय सुदर्शन जी ने अपने नहीं आम भारतीय जनमानस के आक्रोश को शब्द दिए हैं| एक निहायत मौकापरस्त पार्टी (जिसका वास्तविक इतिहास यदि सामने आये तो न जाने कितनी साजिशें नुमाया होंगी) जिस तरह से नंगई पर उतर आई है उससे इमरजेंसी की यादें फिर से ताज़ा होने को हैं| वैसे तमाम सारे नाटक करने वाले राहुल ने एक लम्बे समय में जिस तरह से आम भारतीय जनमानस में अपनी पैठ बनाई थी वो संघ के विरुद्ध दिए गए बयानों और अब माननीय सुदर्शन जी के बयान पर नंगा नाच करने वाले कांग्रेसियों के कुकृत्यों की भेंट चढ़ चुकी है| अगले चुनावों में कांग्रेस को अपने सभी कर्मो का फल वोटिंग मशीन देव चीख-चीख कर सुनायेंगे| सुना है गुजरात के चुनावों में वोटिंग मशीन के बटनों की क्लिक सोनिया और राहुल को सपनो में तोपों की गर्जना की तरह आज भी सुनाई पड़ते हैं| इस बार सलामी पूरा देश देगा| जय भारत जय भारती !

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 14, 2010

    प्रिय मित्र चातक जी.. देखिये न अहिंसा के प्रति कांग्रेसियों की मानसिकता क्या है…इनका दो वेदिया सचिव सीधे धमका रहा है की हम मारेंगें भी और नाम भी तुम्हारा होगा..अगर सुदर्शन जी ने तीखा न बोला होता तो इनका यह असली चेहरा कैसे सामने आता? चुनावों में तो इनकी मिटटी पलीद होनी तय है…लेकिन अगर फिर से विदेशी पैसा भारत में नाजायज ढंग से लुटाया गया तो सत्ता का समीकरण बिगड़ भी सकता है…और सोनिया भक्त इसमें कभी भी पीछे नहीं रहते…वन्देमातरम

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 14, 2010

    आदरणीय मिश्र जी, सादर वन्देमातरम, जब राजीव गाँधी अनधिकृत रूप से रा की बैठकों में भाग ले रहे थे और भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारीयों पर प्राप्त सूचनाओं को इटालियन अधिकारीयों के साथ साझा करने का दबाव बना रहे थे तो क्या वे पूर्वाग्रह युक्त नहीं थे…यह सच्चाई भी तो लोगों को पता होनी चाहिए…लिंक देने का धन्यवाद…अब लोग दूसरा पक्ष भी तो देख लें

सुनील दत्त के द्वारा
November 13, 2010

गद्दारों को अपनी सरदार के भारतविरोधी कुकर्मों का परदाफास होने का डर सता रहा है। इसलिए छाती पीट-पीट कर मातम मना रहे हैं परदा हटने का ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 14, 2010

    आदरणीय सुनील दत्त जी आपका ब्लॉग पढ़ा…सचमुच आइना की तरह लगा…इसमें उनकों अपना मुंह देखना चाहिए जो पानी पी पी कर राष्ट्रवादियों को गाली दे रहे हैं….प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद…कुछ ऐसे भी नालायक होते है जिनको नालायक कहना भी नालायक को गाली देना है…सत्तारूढ़ कुछ बन्दे ऐसे ही हैं..जय भारत,जय भारती

ashvinikumar के द्वारा
November 13, 2010

प्रिय अनुज कांग्रेश को गांधी परिवार ने बहुत पहले ही हाईजेक कर लिया था,,स्वर्गीय गांधी जी का कांग्रेश को त्यागना ही कांग्रेश की (उस समय की मानसिकता )को प्रकट कर देता है ,,स्वर्गीय गांधी जी ने आहत होकर ही कांग्रेश को छोड़ा था,, स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के समय कांग्रेश कुछ स्वतंत्र हुई ,लेकिन यह स्वतंत्रता कब तक टिक पायी ,,तभी से कांग्रेश गांधी परिवार की सेविका ,चरणों की दासी बनी हुई है——-देखो भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है ………तुम्हारा अग्रज

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 14, 2010

    आदरणीय अग्रज, सादर वन्दे मातरम… भारत में कम्युनिस्म के उत्पादन से लेकर कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन तक कांग्रेस का चरित्र हमेशा से संदेहास्पद रहा है,यह बात अलग है की कालांतर में कुछ महान हस्तियाँ भी दिग्भ्रमित होकर इस संगठन से जुड़ गईं…लेकिन उनकी आवाज हमेशा ही इस संगठन में दबी ही रही…आपका अनुज जय भारत,जय भारती

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 13, 2010

बेहतरीन प्रश्न उठाये हैं आपने …………… जब कश्मीर की महिला नेता आज तक के प्रोग्राम सीढ़ी बात में प्रभु चावला से ये कहती हैं की आपके हिंदुस्तान ने कश्मीर में ये किया ……….. आपके हिंदुस्तान ने कश्मीर में वो किया………. तो कोई बवाल नहीं होता……. वो लोग खुद को भारत से अलग बता देते हैं तो कुछ नहीं ……………. कोई कांग्रेस का नेता कुछ कह देता है तो उसको उसकी निजी राय कह कर टाल दिया जाता है…………और जैसे है कांग्रेस सुप्रीम के खिलाफ कुछ कहा जाता है बवाल हो जाता है…………….. क्या सोनिया जी हिंदुस्तान से बड़ी है…… जो महबूबा मुफ्ती के बयां पर सब खामोश और सुदर्शन जी के बयां पर सब तपे हैं……..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 14, 2010

    जी हाँ,पियूष जी और सुदर्शन जी ने जो भी आरोप सोनिया पर मढ़े है…उनकी भी एक बार समीक्षा होनी चाहिए..अगर उन आरोपों में सत्यता है तो सोनिया को upa की अध्यक्षता का कोई अधिकार नहीं और देशहित में जब तब उन आरोपों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिल जाता उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं|जय भारत

आर.एन. शाही के द्वारा
November 13, 2010

बहुत बेबाक़ दृष्टिकोण से लिखा गया तथ्यपरक आलेख मनोज जी … बधाई । कांग्रेस ने कभी भी अपने गिरेबान में झांकना गवारा नहीं किया ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 13, 2010

    आदरणीय शाही जी.. सादर वन्देमातरम| क्या करूं कहने को तो और भी बहुत कुछ है लेकिन क्या करूँ लिखते लिखते बहुत सी बातें विस्मृत हो जाती हैं..अन्यथा कांग्रेस का तो इतिहास ही छल,प्रपंच और माया से भरा हुआ है..(एक दो अपवादों को छोड़कर) जय भारत,जय भारती


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