मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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नंदा दीप जलाना होगा|

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deeprangoli

नंदा दीप जलाना होगा|
अंध तमस फिर से मंडराया,
मेधा पर संकट है छाया|
फटी जेब और हाँथ है खाली,
बोलो कैसे मने दिवाली ?
कोई देव नहीं आएगा,
अब खुद ही तुल जाना होगा|
नंदा दीप जलाना होगा||
केहरी के गह्वर में गर्जन,
अरि-ललकार सुनी कितने जन?
भेंड, भेड़िया बनकर आया,
जिसका खाया,उसका गाया|
मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में,
यह दुश्चक्र मिटाना होगा|
नंदा-दीप जलाना होगा|
नयनों से भी नहीं दीखता,
जो हँसता था आज चीखता|
घरियालों के नेत्र ताकते,
कई शतक हम रहे झांकते|
रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि,
नहीं, गरमाना होगा|

नंदा दीप जलाना होगा ||

मनोज कुमार सिंह ”मयंक”

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349 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rashid के द्वारा
November 10, 2010

मनोज जी,, आप की उपरोक्त रचना “नंदा दीप जलाना होगा” मुझे बहुत पसंद आई !! सच है की आज हर तरफ अँधेरा ही है और हमारे लिए रौशनी कोई और नहीं लायेगा,, हमें खुद ही दीप जलाना होगा, ऐसा दीप जलाना होगा जो खुद को रौशनी दे और समाज / देश को भी रोशन कर दे, जो नफरतो का, अविश्वास का अँधेरा मिटा दे और तन मन दोनों को रोशन कर दे !! मेरी बधाई स्वीकार करें !! आप का भाई राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 10, 2010

    आमीन रशीद भाई… ईश्वर से प्रार्थना है की मेरी यह कविता रुग्ण धर्मान्धता और अनावश्यक हिंसावाद के प्रतिरुद्ध महाकाल का मृत्युनाद सिद्ध हो….नफरत भरे माहौल में अमन का पैगाम हो..शांति और भाईचारे का सन्देश बने…राजनैतिक अलगाववाद का सत्यानाश हो…और राष्ट्रवादी हिन्दू और मुसलमान अल्लाह और राम को अलग अलग मानते हुए भी एक दुसरे के लिए प्राणोत्सर्ग तक को उत्सुक हो…वन्देमातरम, जय भारत..जय भारती

arun singh के द्वारा
November 9, 2010

आपको कमेन्ट मिला . फोन जरुर कीजियेगा . बहुत -बहुत धन्वाद , मो. ९४५१११९२५२..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय मित्र अरुण जी… प्रतिक्रिया को सादर प्रणाम

arun singh के द्वारा
November 9, 2010

manoj ji !!!!!!!!! aachchi lagi. aub mai bhi watch karuga.my mob.no. 9451119252…

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय मित्र अरुण जी, सादर वन्देमातरम… आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया भावविभोर करने वाली है..जय भारत,जय भारती

    Happy के द्वारा
    July 12, 2016

    Yea, I re-played it on an xbox colontlrer and you can definitely tell the setup was deisgned with consoles in mind and the PC controls added later, especially the menu systems.

rajan,, के द्वारा
November 9, 2010

प्रिय मनोज जी !!!!!!!! बहुत – बहुत धन्यवाद . आपको सही पहचानने वाला जौहरी मिल जाये तो सच माने आप देश के रतन है . जिसकी खोज समाज को करनी है . मै आपका साथ पाकर गौरवान्वित महसूस करता हूँ.—– राजन

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिय मित्र, राजन जी सादर वन्देमातरम| आपकी मेरे प्रति स्नेहसिक्त प्रतिक्रिया प्राप्त हुई…जिसे पढ़ कर मेरा ह्रदय प्रफुल्लित हो गया…यकीं मानिए..जिस दिन भी राष्ट्र प्रेम की ज्वाला जलेगी …ठीक उसी दिन हम युवाओं का पदार्पण देश के सामाजिक,राजनैतिक और आर्थिक पटल पर होगा और फिर सारा परिदृश्य देखते ही देखते बदल जायेगा| जय भारत, जय भारती

rahul singh 8604171327 के द्वारा
November 7, 2010

hi sr hw r u,?ths ptry is rlly grt we nd sme mre colltn. thank you rahul mob 8604171327

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 8, 2010

    dear Rahul ji, vandemataram, i am very glad to know that you appreciate poetry and want some more poems.i will try my best to satisfy you.thanx for visiting me and giving your opinions about my blog…jai bharat, jai bharti

    Marlie के द्वारा
    July 12, 2016

    Judge Perkins is the devil himself – he has the front row seat in the coloseum – enjoys watching the &#22d0;un2erdogs≵ blood shed by the lions. Shows them no mercy and laughs as they are mangled to their death. Has he no fear in God? What about all the other judges that are putting a disgrace to our judgical system? United we stand – devided we fall. We must fight for what we know is right and to defend the innocent. Especially our children – if we don’t show them a good example to stand up for what is right and change it – it will only continue to get worse!

Ritambhara tiwari के द्वारा
November 6, 2010

बोझिल मृदंग है, मातृभूमि दांग है, छाया ये कैसा तम तरसें एक दिए को हम ! थक गए देव करके सहायता हमारी सो खुद ही दीप प्रज्ज्वलन करना होगा!!! ………………… हाँ नंदा दीप जलना होगा! हाँ नंदा दीप जलना होगा!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 8, 2010

    आदरणीय ऋतम्भरा जी, सादर वन्देमातरम, आपकी कव्यात्मक प्रतिक्रिया ने मुझे निरुत्तर कर दिया है….फिर भी एक छोटा सा प्रयास करता हूँ… फिर मृदंग को कसना होगा, तान नया छेड़ना पड़ेगा| नये मन्त्र रच,नए धनुष पर, वैश्वानर छोड़ना पड़ेगा| अंध तमस की बलिवेदी पर, हमें स्वयं मिट जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा| जय भारत,जय भारती

Arvind Pareek के द्वारा
November 6, 2010

प्रिय श्री मनोज कुमार सिंह जी, कविता के रूप में आपके मन के भाव मुझ तक पहुँच गए हैं । सत्‍यता को बयान करती आपकी कविता लाजबाव है । अरविन्‍द पारीक

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 8, 2010

    आदरणीय अरविन्द जी, मैंने प्रथमतः तो यह विचार किया की प्रतिक्रियाओं के माध्यम से अपनी भावनाएं अपने लोगों तक पहुंचा सकूँ,फिर बाद में यह लगा की एक बड़ा वर्ग इस तरह से मेरे विचारों से वंचित रह जायेगा| इसीलिए पहले मेरे विचार आप तक प्रतिक्रिया के माध्यम से पहुंचे और फिर पोस्ट के रूप में मंच के अन्य लोगों तक…….आपकी प्रतिक्रिया का अभिवादन…जय भारत,जय भारती

ashvinikumar के द्वारा
November 6, 2010

प्रिय अनुज कम्पित होती लौ दीपक की ,छाया घना अँधेरा है , फिर मशाल प्रज्वलित करो,असुरों का यहाँ बसेरा है ,, घोर पातकी राज्य कर रहे ,सत्य नही सुनने वाले , पाप कर्म में लिप्त हुए हैं ,माँ भारत को छलने वाले ,, असुरों का हैं साथ दे रहे ,तुच्छ स्वार्थ के वशीभूत हो , ऐसी ज्वाला धधकाओ ,सत्य पुनः स्थापित हो ,,

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 8, 2010

    प्रिय अग्रज, दीपक की लौ कम्पित होती तो ज्वाला बन जाती है| एक जरा सी चिंगारी लंका में आग लगाती है| पाप कर्म सब स्वाहा होते,पौरुष समिधा बनती है | संघर्षण,छेदन,ताडन से प्रभु की प्रतिमा बनती है| अतः कभी नैराश्य तिमिर का नहीं कल्पना करना है| आखिर हमको ही तो भू पर नव्य अल्पना रचना है| मनोज कुमार सिंह ‘मयंक’ आपका अनुज ,जय भारत,जय भारती

सुनील दत्त के द्वारा
November 5, 2010

दिपावली की हार्दिक शुभकामनायें

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 7, 2010

    आदरणीय सुनील जी सादर वन्देमातरम…. आपकी प्रतिक्रियाओं का सदैव प्रतीक्षा करता हूँ….जय भारत जय भारती

rajkamal के द्वारा
November 5, 2010

अगर आपका है तो अति सुंदर है … अगर नहीं है तो भी अति सुंदर ही है … दीपावली शुभ और मंगलमय हो …सबके लिए …

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 7, 2010

    प्रिय राजकमल भाई दूसरों का जब भी मैं कुछ भी लिखता हूँ तो बकायदा पेज सहित उल्लेख करता हूँ और यदि यह संभव नहीं हुआ तो नाम अथवा स्रोत लिखने का प्रयास करता हूँ ऐसा तो कभी किया नहीं की किसी दूसरे की किसी सामग्री को अनधिकृत रूप से आपने नाम से मंच या कहीं भी रखने का साहस किया हो|हाँ एनी मंचों पर मेरी कुछ कविताओं को अपने नाम से प्रकाशित करने का काम अवस्य चल रहा है और इसीलिए मैंने अपनी कविताओं को अपूर्ण रूप में ही मंच पर रखा है| आपने प्रोत्साहित किया इसके लिए कोटिश आभारी हूँ….जय भारत जय भारती

    Moon के द्वारा
    July 12, 2016

    hola, quisiera adquirir en un plan el samsung galaxy s3 y quisiera saber los precios de los planes en los cuales podria adquirirlo y cuanto tengo que dar de diferencia o de ene38chg&#n2a0; de antemano gracias

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 5, 2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? खूबसूरत भावों से सजी इस कविता के लिए और दीपावली के इस प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आपको व आपके पुरे परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं………………

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 7, 2010

    प्रिय मित्र पियूष जी सादर वन्देमातरम… आपके प्रोत्साहन से मेरा मार्ग प्रशस्त होता रहे इन्ही कामनाओं के साथ जय भारत जय भारती

Alka Gupta के द्वारा
November 5, 2010

नंदा दीप जलाना होगा….बहहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति है। सपरिवार आपको दिवाली मंगलमय  व समृद्धिमय हो।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 7, 2010

    अलका जी सादर वन्देमातरम आपका बहुत बहुत धन्यवाद

    Morrie के द्वारा
    July 12, 2016

    Friends,Our brain and especially our two hemisphere are just like a magic box…and works in a very different way with different peet;nalitirs&#8230o.Percepsion of the same person is also different at each situation and depends upon the belief system which has the impressions of the past life also….Sohiniben.

kmmishra के द्वारा
November 5, 2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| प्रिय मनोज आपको भी सपरिवार दीपावली की शुभकामनाएं ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 7, 2010

    मिश्र जी सादर वंदे मातरम, धन्यवाद

anamika के द्वारा
November 5, 2010

बहुत सुन्दर लिखा है ………….आपको ढेर सारी दिवाली की शुभकामनाये

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 7, 2010

    अनामिका जी सादर वन्देमातरम… आपने मेरी कविता पसंद की इसके लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद जय भारत,जय भारती

    Latrice के द्वारा
    July 12, 2016

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