मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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नज़्म

Posted On: 20 Oct, 2010 Others में

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सरे महफिल कहूँगा तो मुहब्बत मेँ खता होगी।

तुझे अपनोँ से नफरत है तो गैरोँ से वफा होगी।

वो हमसाया है रहता साथ मेरे पासवाँ बनकर।

तुझे उससे अदावत है तो मुझसे भी जफा होगी।

ये मेरे अश्क हैँ मैने करीने से सँवारा है।

कि आशिक मेरे जैसो की ये यूनानी दवा होगी।

बयाँ करता हूँ जब दिल से मैँ तेरी बेवफाई को।

बयाँ इस बात का होता नहीँ तू बेवफा होगी।

मयंक को पूजती है और पत्थर मारती दुनियाँ।

ये दुनियाँ मनचली है इश्क देगी और खफा होगी।

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349 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ramesh bajpai के द्वारा
October 22, 2010

ये मेरे अश्क हैँ मैने करीने से सँवारा है। कि आशिक मेरे जैसो की ये यूनानी दवा होगी। प्रिय श्री मनोज जी अश्को की यह दरिया क्या खूब बही , झरने से ये भाव सुखद रहे बधाई

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 23, 2010

    आदरणीय वाजपेयी जी सादर वन्देमातरम….. उन्हें तो अपने गुलदस्ते की रौनक से ही मकसद है…कहाँ गुलचीं को फुर्सत है की दर्दे गुलसितां समझे आपने समझा इसके लिए धन्यवाद…आपका आभारी

    Mahalia के द्वारा
    July 12, 2016

    Os programas do Prof. Hermano Saraiva prenderam-me centenas de horas em frente do ecrã de TV, ouvindo histórias e mais histórias relatadas de uma forma genial, que não tem coe.tmênciapA sua última entrevista emcionou-me pela forma totalmente desprendida como encarou o fim próximo da vida e a que o Massano Cardoso já se referiu.Com a sua morte desaparece o melhor comunicador da televisão portuguesa, não havendo ninguém que, de perto ou de longe, se lhe possa comparar.

K M MIshra के द्वारा
October 21, 2010

बयाँ करता हूँ जब दिल से मैँ तेरी बेवफाई को। बयाँ इस बात का होता नहीँ तू बेवफा होगी। सादर वंदेमातरम ! इस छोटी सी नज्म ने बहुत कुछ कह दिया । वाकई आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । आभार ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 23, 2010

    आदरणीय मिश्रा जी सादर वन्देमातरम आपके स्नेह से गदगद होता हूँ …कभी फुर्सत हुई तो और भी नज्म प्रस्तुत करूँगा जय भारत जय भारती

    Marlien के द्वारा
    July 12, 2016

    Reblogged this on and commented:This could have the potential to be one of the greatest remakes ever. I think that the new spin on it may even inspire some readers out there. But, for heaven sake do not recreate all high school no03;s&#82evlespecially “Streetcar Named Desire”.

nikhil के द्वारा
October 20, 2010

क्या बात है मनोज जी बेहतरीन नज्म है …

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 23, 2010

    बहुत बहुत धन्यवाद निखिल जी आपकी प्रतिक्रिया मुझे साहस प्रदान करती है …जय भारत जय भारती

priyasingh के द्वारा
October 20, 2010

आपकी पिछली रचनाये पढने के बाद ये लगा नही की आप ग़ज़ल और कविता में भी दखल रखते है ………. शानदार ग़ज़ल के लिए बधाई ……..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय, प्रिया बहन सादर वन्देमातरम, क्षमा करें, ऐसी दखलंदाजी मैंने शताधिक बार की है…क्या करें जब आस्था का प्रश्न हो तो चुपचाप भी नहीं बैठा जा सकता न…मैंने तो अपने आपको रोकने की कई बार चेष्टा की लेकिन इसी मंच पर अनर्गल बातों की जो परंपरा प्रारम्भ हुई की मैं अपने आपको रोक ही नहीं पाया…अब मैं अपने होंठ सिल लूंगा लेकिन आप ही देखें न उपमा अलंकार का अतिशयोक्ति पूर्ण वर्णन तो अब भी हो रहा है….आपका बहुत बहुत आभार..जय भारत,जय भारती

div81 के द्वारा
October 20, 2010

मयंक जी, bahut खुबसूरत ग़ज़ल ……….. मैं वफ़ा करके भी वफ़ा के इंतजार में हूँ वो बेवफा होके भी मुझसे खफा रहता है

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय दिव्या बहन, वन्देमातरम.. बहुत ही सुन्दर प्रतिक्रिया के आपका बहुत बहुत आभारी…वफ़ा के राह में कांटे बहुत जियादा हैं..मिले न फूल तो काँटों का तलबगार हूँ मैं …अभी अभी बनाया है|अब तो कांटे ही चुनने की आदत पड़ गयी है …जय भारत,जय भारती

roshni के द्वारा
October 20, 2010

मनोज जी .. बढ़िया ग़ज़ल .. दो लफ्ज़ मेरी और से दिल का हाल बताना भी खता होगई रो कर मुस्कुराना भी खता होगई सिर्फ याद ही तो रह गयी मुझमे ये ज़ेहन में बसाना भी खता होगई धन्यवाद सहित

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    रोशनी बहन, वन्देमातरम…. आपका शायराना अंदाज आपकी रचनाओं की तरह ही बहुत सुन्दर है… याद की बात करूंगा तो खता होगी ही| इस ज़माने की याद क्या करना| अब तो उनके भी कान बहरे हैं| उनसे जुल्मों की बात क्या करना? आपका आभार …जय भारत,जय भारती

abodhbaalak के द्वारा
October 20, 2010

मयंक को पूजती है और पत्थर मारती दुनियाँ। ये दुनियाँ मनचली है इश्क देगी और खफा होगी। क्या बात है मयंक जी, दिल को छु लेने वाली रचना, बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय अबोधबालक जी सादर वन्देमातरम, आपकी प्रतिक्रिया का शुक्रगुजार हूँ …जय भारत,जय भारती

    Ivalene के द्वारा
    July 12, 2016

    279c237inna:936c1faЯ категорически против коверкания народных сказок. Не надо делать из них что-то ÐÂôÂ°Ã‘€Ð¼ÐµÐ»Ð°Ð´Ð½Ð¾-шоколамное, они учат детей жизни. Но стоит подбирать сказки адекватно, сообразно возрасту. Некоторые действительно «Ã‘‚яжеловаты» для маленьких детей, зато в 7-8 лет — самое то..19e1

anamika के द्वारा
October 20, 2010

वाह! अति सुन्दर………….हर शब्द दिल को छू गया…………

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    आदरणीया अनामिका जी, सादर वन्देमातरम, आपकी रचना का तो मैं सदा ही प्रशंसक रहा हूँ विशेषकर ‘स्वर्ग सिधारन हो कैसे?” बहुत ही अच्छी लगी…मेरे ह्रदय को आह्लादित करने वाली उस रचना को सादर प्रणाम…जय भारत,जय भारती

    Charlotte के द्वारा
    July 12, 2016

    comoooo??? que la causa es el machismo??? vas con segundas arpias, esto no se puede ni tan siquiera comparar con machismo, esto es asesinato cootatrimpa, por dios que gente mas feminista y asquerosa. Descansa en paz belleza de la naturaleza que pronto se hara justicia mediante las armas con gente como tu padre

ashvini kumar के द्वारा
October 20, 2010

तू सच्चा वीर सपूत धरा का, जिसे माँ भारत हम कहते हैं , पर वो क्या जाने माता को जो ,जो इसको बेंचा करते हैं ,, माँ तो माँ ही होती है , अंतर में लाड़ दुलार भरा, जो इसके पय से पुष्ट हुए,वो इसको नंगा करते हैं ,, मकबूल हुए कुछ लोगों में ,जो थे माँ के हत्यारे , फिदा हुए कुछ भाई अपने ,उसको रहबर कहते हैं ,, बर्बर के जो पूजक हैं ,माँ की ममता क्या जाने वो , रक्षा के पावन धागे को सचमुच क्या पहचाने वो ******************तुम्हारा प्यार भी आभार भी

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    आदरणीय अग्रज… सादर वन्देमातरम.. आपका स्नेह मुझे गदगद कर देता है…आपकी प्रतिक्रिया में एक संशोधन करने की धृष्टता की है …क्षमा कीजियेगा…आपकी प्रतिक्रिया आपके प्रेम को प्रदर्शित करती है… रहबरों रहजन यही दो आफतें थी राह की, राहरों दो आफतों के दरमियाँ मारा गया| मेरा नहीं है …अकस्मात याद हो आया ..जय भारत,जय भारती

    Mira के द्वारा
    July 12, 2016

    I am genuinely surprised that people who prelamubsy love horses (because they are reading a blog on Horse Canada website) would be FOR chuckwagon racing. Thank you Karen for being a voice of reason, and speaking up within the horse community for the love of the horse.

chaatak के द्वारा
October 20, 2010

प्रिय मयंक जी, आपकी इस कविता को पढ़ कर अपना लिखा एक शेर याद आ गया गौर फर्ममाइयेगा- \"नहीं गम है के तू कमज़र्फ है और मुझसे है गाफिल, शिकायत सिर्फ इतनी है – वफ़ा की ये सजा कैसी ?\" एक बेहतरीन काव्यात्मक प्रस्तुति पर हार्दिक बधाइयाँ!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिय मित्र चातक जी… वन्देमातरम आपका सब कुछ लाजवाब होता है…एकदम अवाक् कर देने वाला…. एकदम अधरं मधुरं,वदनं मधुरं मधुराधिपते अखिलं मधुरं जैसा … आपका आभारी जय भारत,जय भारती

    Ramesh bajpai के द्वारा
    October 22, 2010

    क्या खूब शेर अर्ज किया है आपने . इस कड़ी का अगला शेर ……… इंतजार कर रहा हु चातक जी


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