मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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हर मुसलमान हत्यारा है

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राहुल मायनो गाँधी और शेख उमर अब्दुल्ला को समर्पित-
तू गाली दे, सर काट मेरा, मुझको उसकी परवाह नहीं|
मैं अमर नहीं होने आया,आगे बढ़ने की चाह नहीं ||
पर मानवता के हत्यारे, ये जेहादी आतंकवादी|
क्या इसको झुठला सकता है, तू सचमुच में है उन्मादी?
तेरे वीभत्स पृष्ठों में बस शोणित ही है, कुछ और नहीं|
भातृत्व,त्याग और प्रेम नहीं और मानवता को ठौर नहीं|
चंगेज,हलाकू,बाबर,औरंगजेब,गजनवी हत्यारे|
नादिर,तैमुर,उलुग,गोरी और बख्तियार जैसे सारे|
कुछ झांकी है,कुछ झांकी है,जिन्ना से कितने बाकी हैं|
जनके हांथों से रक्त सना,मानवता के अपराधी हैं|
इनके विरुद्ध मेरा जीवन खप भी जाए तो कम होगा|
मैं इस धरती पर आऊंगा,जब तक वेदों में दम होगा|
जब तक शैतानी आयत पढ़ ला इल्लाहा चिल्लाएगा|
भारत माता के प्रांगन में आयातित शब्द उठाएगा|
जब तक निकृष्ट हिन्दू ,कुत्सित जैचंद मार्ग के अनुयायी|
पूरब पश्चिम को जोड़ेगें,हिन्दू मुस्लिम भाई भाई|
बेमेल सियासत का सौदा,योरप अमेरिका में होगा|
भारत माता लाचार बनी, सुत ही जब तक देंगें धोखा|
तब तक मयंक इनके विरुद्ध,पूनम सा नहीं सरल होगा|
बाबरी नहीं कट्टरता से बाबर का मसला हल होगा |
हर मुसलमान कटघरे में है,सबने मारा और काटा है|
सन सैतालिस में भारत को एक मुसलमान ने बांटा है|
जब तक आदर्श लुटेरे हैं,जब तक जेहादी प्यारा है|
इसमें कोई शक नहीं यहाँ हर मुसलमान हत्यारा है|
अब कश्मीर की बारी है, तुम काश्मीर को काटोगे|
कांग्रेसी कुत्तों के संग मिल सारे भारत को बांटोगे|
और आरएसएस कुछ न बोले या बीजेपी तलवा चाटे|
तू मुस्लिम मत के लालच में हिन्दू से हिन्दू को बांटे|
यह मुझको नहीं सहन होगा,यह मुझको है स्वीकार नहीं|
में एक अकेला ही काफी,बेशक कोई आधार नहीं ||

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586 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आज़ाद भारतीय के द्वारा
August 18, 2012

जिनकी वजह से है हर खास-ओ-आम खतरे में, जिनकी वजह से अमन का हर पैगाम खतरे में। उनकी तरफ जो हमने इक उंगली उठाई आज, वो चीख पड़े ज़ोरों से की है इस्लाम खतरे में॥

rakeshgupta के द्वारा
October 19, 2010

वन्दे मातरम बन्धुवरों, कमाल है की हमने एक दुसरे को देखा भी नही और मरने मारने की बातें कर रहे हैं…. क्या इतना काफी नही है …….. “”मजहब नही सिखाता आपस मैं बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा “”

    Betsey के द्वारा
    July 12, 2016

    Hey there! I&72#18;m at work surfing around your blog from my new iphone! Just wanted to say I love reading your blog and look forward to all your posts! Keep up the fantastic work!

ashvini kumar के द्वारा
October 17, 2010

भाई मनोज जी कहाँ हो यार रोज दस बार तुम्हे इस मंच पर देखने के लिए पंच करता हूँ,,कुछ तो बयाँ करो मंच पे नही तो मेल पर ही ………………….तुम्हारा

ashvini kumar के द्वारा
October 16, 2010

प्रिय मित्र अधिकतर लोग तुम्हारी कविता के मर्म को समझ भी नही पाए,(भगवान उन्हें स्द्बुधि दे )जब तक आदर्श लुटेरे हैं,जब तक जेहादी प्यारा है| इसमें कोई शक नहीं यहाँ हर मुसलमान हत्यारा है| इन्ही दो पंक्तियों से काव्य का मर्म व्यक्त हो जाता है ,(परन्तु फिर भी स्नेहिल निवेदन है जो न समझ पायें उन्हें काव्य का विश्लेष्ण कर के समझा दो ,(परमार्थ होगा)….तुम्हारा

kumar rajeev के द्वारा
October 15, 2010

मनोज व जलाल जैसे जैसे लोगों के कारण ही तो इस देश की हालत ऐसी हुई है देश प्रेम की बातें करते हैं और लड़ने जैसी बातें करते हैं अगर इतना ही अपने अपने धर्मो से प्यार है तो इस देश के दस बीस टुकड़े और कर दो तभी तुम जैसे लोग खुश रह सकते हैं तभी तुम्हें चैन पड़ेगा तुम में और इस देश के नेताओं में कोई फर्क नहीं है जो अपने अपने स्वार्थ के लिए किसी हद तक जा सकते हैं ………

    khalid.Bareilly के द्वारा
    October 16, 2010

    स्वयं की है दौलत में आसक्ति, वही सिखा रहे हैं सभी को करना देश की भक्ति। न आसमान गिर रहा है न जमीन धंसक रही है आम इंसान उनके रंगीन दृश्यों पर कभी दृष्टि न डाले, अपने अंदर खास होने के कभी ख्याल न पाले, इसलिसे उसे कभी सपने बेचकर बहलाते, कभी सामने पर्दे पर खौफ के मंजर भेजकर डराते, रात की रौशनी से रोमांस करने वाले दिन में पूरे जमाने को भरमाने में लगाते अपनी शक्ति। जिनके लिये जज़्बात हैं, खाने का कबाब , उनके लिये पैसा ही है शराब, असली खून पर उठाकर लाते बेचने आंसु, नकली कामयाबी पर जश्न बेचते धांसु, नारों को सोच बताकर बहस करते, खाली वादों में ही बड़े इंसानों की दरियादिली की हवस भरते, ढेर सारे सामान लुटा लिये फिर भी नहीं होती उनको विरक्ति, जब नहीं होता सामान दुकान में बेचने लगते हैं बाजार में देशभक्ति।

    chandra kant upadhyay के द्वारा
    October 16, 2010

    तुम्हारे जैसे लोग भी तो बिना पैंदे के लोटे जैसे ना हिन्दू हैं ना मुसलमान ….एक किन्नर के समान.

    jalal के द्वारा
    October 16, 2010

    मेरे प्यारे भाई राजीव, आप शायद मुझे समझ नहीं पाए. धर्म से प्यार तो है ही और एक बात यह की किसी इंसान से मुझे नफरत नहीं है. चाहे वोह किसी धर्म से हो या शारीर से, कोढ़ भी हुआ है तो भी मैं गले लगा सकता हूँ. और मुझे ख़ुशी भी होगी. यही मेरे लिए सब से बड़ी बात है. मैं खुद प्यार बढ़ाने के लिए आगे रहूँगा. आपका हाथ अगर मुझे मिला तो मैं ज़रूर चूमूंगा. बाकी आप समझदार खुद है. बाद में मिलता हूँ अभी जाना पद रहा हैं कुछ ज़रूरी काम आन पड़ा है. फिर मिलते हैं.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 16, 2010

    मैं पूछता हूँ सच बता किस ओर है तू ,आदमी है या की आदमखोर है तू ?तुमने न तो मेरी कविता पढ़ी है और न ही टिप्पड़ियां सिर्फ शीर्षक पढ़ा और यहाँ बहस करने चला आया है…जा अभी बच्चा है…माफ़ किया

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 16, 2010

    जलाल भाई और खालिद जी, आप लोग पहले कविता पूरा पढ़ा करें …उसका भाव समझा करें फिर प्रतिक्रिया दें …यदि मुझे आपलोगों से कोई व्यक्तिगत वैर होता तो मैंने आपलोगों की प्रतिक्रियाओं को approve ही न किया होता…भाई जलाल जी मैंने यह जो हर लिखा है उसका मतलब आप हरेक कैसे समझ गएँ? दूसरी बात शायद आपको याद न हो “क्या कहता है कुरान हिन्दुओं के बारे में भाग १,२ और तीन” आप लोगों ने मुझसे आयतों का सन्दर्भ माँगा था और मैंने अपनी प्रतिक्रियाओं में सन्दर्भ दिया भी…आप में से कोई भी मुझे संतुष्ट नहीं कर पाया और सौहार्द्र को देखते हुए मैंने स्वतः तीनों ब्लॉग मंच से हटा दिया..यहाँ तो मोटे-मोटे अक्षरों में सन्दर्भ दिया हुआ है…मुस्लिम तुष्टिकरण का मैं विरोधी हूँ और हमेशा रहूँगा…आप लोग मेरी किसी भी रचना को ध्यान से नहीं पढ़ते यह स्पष्ट है अन्यथा ऐसी बातें न करतें..राम को राम रहने दे और अल्ला को अल्ला…आज की राजनीती राम और अल्ला को मिला कर घालमेल खिचड़ी पका रही है…रामल्ला धर्म का न तो मैं अनुयायी हूँ और न ही आप बनना चाहेंगे..खालिद जी,हमारी दौलत में कोई आसक्ति नहीं हैं….न तो मुझे लिखने के लिए कम्युनिष्टों की तरह चीन से पैसा मिलता है और न ही जेहादियों की तरह अरब से…मैं एक बेरोजगार हूँ और स्वान्तः सुखी ही लिखता हूँ …अगर राहुल ने संघ और सिमी को एक कटघरे में खड़ा किया तथा उम्र अब्दुल्लाह ने कश्मीर के विलय को अप्रासंगिक बताया और आप उनसे सहमत हैं…तो मैं आपका धुर विरोधी हूँ और आप हमारी नजर में हमारे कविता के दायरे में आते हैं और अगर ऐसा नहीं है तो आप हर नहीं हरेक हैं और राष्ट्रवादी मुसलमान होने के कारन मैं आपका सम्मान करता हूँ…कभी फुर्सत मिलें तो मेरे एक और ब्लॉग ”यह वन्देमातरम शब्द नहीं,यह भारत मान की पूजा है भी पढियेगा और उस पर अपने विचार भेजिएगा…जय भारत..जय भारती

    chandra kant upadhyay के द्वारा
    October 17, 2010

    जिस धर्म में अपनी बहनों तक के साथ शादी की जाती है ……पता नहीं ये लोग अपनी सगी बहनों को भी छोड़ देते हैं या नहीं ……..खैर ………आज जो मुसलमान भारत में हैं वो सब हिन्दू ही थे जिन्हें डरा धमका कर मुसलमान बनने पर मजबूर कर दिया गया , में सभी मुसलमानों से सवाल करता हूँ वो मुझे इस्लाम धर्म की की एक खासियत बताये …..की कैसे यह धर्म लोकहित में है जो धर्म अपनी बहनों के साथ शादी करने की इज़ाज़त देता है जहाँ क़ुरबानी के नाम पर लाखों जानवर मर दिए जाते हैं जो धर्म जिहाद के नाम पर अनुयायियों को आतंक का पाठ पढाता है वो धर्म लोकहित में नहीं .

jalal के द्वारा
October 15, 2010

हाँ जी मैंने अभी अभी देखा के लोगों ने मेरे टिप्पणियों को धमकी कहा. लेकिन मैं यह साफ़ कह देना चाहता हूँ की यह धमकी नहीं है, मैंने आगे होने वाली बातों का उल्लेख ही किया है. अगर कोई भी (मैं भी क्यूँ न हूँ) ऐसा करता हूँ तो कल को लोग मुझे भी नहीं छोड़ेंगे. बात बिलकुल पक्की है. इसलिए जो करते हैं पहले उस को देख तो लें की इसका परिणाम अच्छा होगा या बुरा. इश्में धमकी बिलकुल नहीं है. मैं मुस्लिम हूँ इसलिए यह बात कह दी ऐसा नहीं है. कोई भी रहता तो मैं ऐसा ही कहता, यह बात तो आप पूरी तरह जान लें. और जान क्या है, कुछ नहीं या बहुत कुछ. कुत्ता काट ले तो आदमी मर जाता है. भावनाओं को गलत रूप न दें. ऐसा कुछ नहीं है की कोई किसी की जान नहीं ले सकता. लेने को पल भर ही लगते हैं. बस दे नहीं सकता, इसलिए इंसान को समझिये. और इस तरह के फालतू बातें ही न करें जिससे हमारे बीच दुश्मनी फैलती है. मैंने हर गलत बात को टोका है चाहे कोई क्यों न हो. इस से मुझे फर्क नहीं पड़ता और एक इंसान होने के नाते तो आपलोगों को भी फर्क नहीं पड़ना चाहिए. आपके सुझाव की राह देख रहा हूँ के मैंने गलत क्या कहा है. जिस तरह से इनकी लिखावट है उस से गलत बातें ही पैदा होंगी. यहाँ की सारी बात इसका यही सबूत देती है. आप खुद ही देख लें.

    chaatak के द्वारा
    October 15, 2010

    जलाल भाई, आपकी लिखी किसी बात का किसी भी व्यक्ति ने बुरा नहीं माना है और ना ही आपकी बात को कोई धमकी मानने की भूल कर रहा है ये तो हमारी खुशनसीबी है जो आप जैसे कुछ लोग हमारे बीच हैं जो सही और गलत की सही पहचान करते हैं और अपनी दो टूक राय देते है | लोग शब्दों का सही अर्थ ना लगा पाने के कारण आपके सुझाव को धमकी समझ बैठे| यहाँ पर मैं एक बात और भी स्पष्ट करना चाहूंगा- आपने टिप्पड़ी गद्य में लिखी फिर भी देखने पर यही प्रतीत हुआ कि आप धमकी दे रहे हैं जबकि आपका आशय ये नहीं था | अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मनोज जी ने जब कविता में अपनी बात कही तब उनके लिए किसी बात को स्पष्ट करने के कितने कम मौके रहे होंगे | यहाँ हर मुसलमान के प्रति द्वेष नहीं है क्योंकि मेरे ऐतराज़ करने पर मनोज जी ने खुद जवाब दिया कि रसखान जैसे कितने हैं अर्थात ‘कम ही सही पर हैं’ इस बात को मनोज जी भी स्वीकार करते हैं जिसका सीधा सा अर्थ है कि वे भी हर मुसलमान हत्यारा है कहते तो हैं पर उनका ‘हर’ शब्द १००% का समानार्थी नहीं है| आपकी प्रतिक्रिया आपकी अच्छी मानसिकता का द्योतक है और निःसंदेह आप मनोज जी को मानने पर जरूर मजबूर करेंगे कि हर भारतीय मुसलमान आक्रान्ताओं का गुलाम नहीं है|

    rajshahil के द्वारा
    November 12, 2010

    जलाल जी में आपको बताना चाहता हूँ की धर्मराज जी ने संघ द्वारा रचित कुरान की कुछ रचनाए पड़ ली है केवल उसी को दोहराते रहेते है संघ जो बाते मुसलमान के लिए कहता है यह समझते है की यह बाते इस्लाम हिन्दुओ के लिए कहता है यदि मुस्लमान इतना ही कट्टर होता तो पांच सौ वर्ष राज करने पर भी एक भी हिन्दू को छोड़ देता

    rajshahil के द्वारा
    November 12, 2010

    जलाल जी बह धर्मराज जी नहीं अधर्मी मनोज के बारे में कह था धर्मराज को अधर्म मनोज पड़े

kumar rajeev के द्वारा
October 15, 2010

ओछी मानसिकता संभल जाओ नहीं तो मरे जाओगे

    Munish के द्वारा
    October 15, 2010

    राजीव जी, ये ओछी मानसिकता नहीं, सच कहने का बेबाक अंदाज है, इस सच को कहने से डरने वाले लोग, इसे ओछिता का जामा पहना सकते हैं, मनोज जी जो लिखते हैं उन लोगों को बुरा लग सकता है जिन्हें भारत से लगाव कम है और यदि है भी तो मजबूरी में, आप इस बात पर भी ध्यान दीजिये उन्होंने हिन्दुओं में जयचंद जैसे लोगों को भी नहीं बख्शा है, और कविता भी राहुल गाँधी के बयान के कारण लिखी है स्पष्ट है राष्ट्र और राष्ट्रवाद के खिलाफ किसी भी सच को लिखने से वो पीछे नहीं हटेंगे. वैसे राहुल और उमर अब्दुल्ला की मानसिकता को आप क्या कहेंगे…..?

    chaatak के द्वारा
    October 15, 2010

    भाई कुमार रंजीव जी, आप जिस मानसिकता की बात कर रहे हैं उस पर हमारे विचार भी जान लें- http://chaatak.jagranjunction.com/2010/10/15/%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/

    chandra kant upadhyay के द्वारा
    October 16, 2010

    कुमार रंजीव जी …..हर मुसलमान हत्यारा है यह बात इस बात से सिद्ध होती है की वो ईद के दिन कुर्बानी देता है और एक जानवर की हत्या करता है ……..और तुम .भी मुसलमान ही लगते हो ,ऐसा लगता है ……..तुम्हारी धमकी से ……क्यूंकि जिस प्रकार से तुमने असहिष्णु होकर यह धमकी दी है वो तुम्हारी घटिया सोच और मंद बुद्धि होने का परिचायक है …..तुम्हे शब्दों की समझ बिलकुल नहीं …….तुम अपनी खैर मनाओ आगे से धमकी देने की भूल कतई मत करना …

chaatak के द्वारा
October 15, 2010

मुसलमानों को भी धमकी भरी बातें और डराने वाले शब्द मनोज जी के लिए लिखने से पहले सोचना चाहिए कि क्या कट्टर विचार-धारा वाले किसी मुसलमान के कलेजे में वो हिम्मत होगी कि एक राष्ट्रवादी के कुत्ते को भी नुकसान पहुंचा सके? मनोज जी के मवेशी से लेकर उनके परिवार के किसी भी सदस्य के अन्दर कितना साहस होगा इसका अहसास है क्या उन्हें?

chaatak के द्वारा
October 15, 2010

मैं फिर दोहराना चाहूंगा कि हिन्दुओं का कोई विरोध उस मुसलमान से नहीं जो मुसल्लम-ईमान है लेकिन किसी भी सच्चे हिन्दुस्तानी का विरोध हर उस हिन्दू हर उस मुसलमान से है जिसका ईमान बाबर या बाबरी मस्जिद है | ऐसा करने वाला कोई भी हिन्दू चाहे जितने भी एकता के गीत गए लेकिन उसमे सिर्फ कायरता और सत्य से नज़रें च्रुराने के सुर ही हैं वो चाहें तो स्वयं एकांत में बैठ कर आत्म-मंथन कर लें | मनोज जी जिन्हें मैं इस ब्लॉग मंच पर हिन्दू-मुस्लिम एकता का खलनायक कहता हूँ इस पोस्ट के लिए बधाई के पात्र हैं |

chaatak के द्वारा
October 15, 2010

मिश्र जी के द्वारा कल जामा मस्जिद, लखनऊ में घटित हुई घटना मनोज जी की बात को और ज्यादा बल प्रदान करती नज़र आती है साथ ही उन कायर हिन्दुओं के सवालों का भी जवाब दे रही है जिनका मानना है कि हिन्दू धर्म असहिष्णु हो चला है | कुछ एक लोगों ने यहाँ पर अपने ऊपर किये गए व्यक्तिगत अहसानों को सम्पूर्ण हिन्दू धर्म की कुर्बानी दे कर चुकाने तक की वकालत भी की है | यदि ३० करोड़ मुसलमानों में से कुछ एक मुसलमानों ने कमज़ोर हिन्दू परिवारों की सहायता की जबकि अधिकतम मुसलमान कट्टरपंथी हैं तो जरा सोचिये कि ९० करोड़ हिन्दुओं के कितने अहसान मुसलमानों पर क़र्ज़ होंगे (हलाकि ये बात मैं किसी हिन्दू का अहसान जताने के लिए नहीं लिख रहा क्योंकि अहसान जाताना कितना बुरा लगता है ये सभी जानते हैं इसी मंच पे एक बंधू ने अहसान जताने का दर्द लिख छोड़ा है चाहें तो उस पर भी गौर कर सकते हैं)|

kmmishra के द्वारा
October 15, 2010

मनोज जी सादर वंदेमातरम ! अभी कल की ही घटना है । लखनऊ में जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अहमद बुखारी एक प्रेस कांफ्रेन्स में एक मुस्लिम पत्रकार अब्दुल वहीद चिश्ती के सवाल पर भड़क गये और चिश्ती को कौम का गद्दार बताते हुये उन्होंने उसकी गर्दन कलम करने का हुक्म भी सुना दिया । इसके बाद तमाम दूसरे लोगों के साथ इमाम मौलाना बुखारी ने भी उस पत्रकार को जम कर पीटा । . पत्रकार वहीद चिश्ती ने एक सही प्रश्न गलत आदमी से पूछने की जुर्रत की थी । उन्होंने बुखारी से पूछा था कि – ”1528 के खसरे में जब अयोध्या की जमीन राजा दशरथ के नाम दर्ज है, तो उसके वारिस राजा रामचंद्र होते हैं । यह बात हाईकोर्ट के फैसले में भी है और सुन्नी वक्फबोर्ड के अधिवक्ता जफरयाब जिलानी को भी मालूम है । जब ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं तो भाईचारे के नाते उस जमीन को सोने की थाली में सजाकर मुसलमान भाई हिंदुओं को क्यों नहीं दे देते ।” यह होता है हश्र इस्लाम में शांति, भाईचारे और धर्मनिरपेक्षता की बात करने वालों का ।

    Turk के द्वारा
    July 12, 2016

    merhaba aynı modelde aynı sorunu bende yaşıyorum 10. ayda baÅŸladı benim sorunum da videoda kendi telefonumu gördüm resmen1 telefonu teknosadan aldım bugün 3.kez garantiden geldi 10 dakika dolmadan tekrar ayr&0Ä#823±;senvis fiÅŸinde 3.kez yazılım güncelleyip geri gönderiyorlar daha doÄŸrusu fiÅŸte yazan o açıp baktıklarından bile emin deÄŸilim ama neyse.teknosada elemanlar tamamen umursamaz gidin ÅŸikayet edin diyorlar.iade talebinde bulunduÄŸum için mi böyle yapıyorlar bilmiyorum ama telefondan da teknosadan da tiksindim resmen !

अरुण कान्त शुक्ला 'आदित्य ' \\\\\\\\\\\\\\\\\\\' के द्वारा
October 14, 2010

कुछ भी लिखो , लिखते रहो , बुरा भी लगता है , जीवन का हर सपना , इसे पढ़ने के बाद , झूठा लगता है ,

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 16, 2010

    वैसे आपके जीवन का सपना कहीं भारत,पाकिस्तान और बंगलादेश को मिला कर एक बेमेल महासंघ बनाने का तो नहीं है…मैं भी इसे कर सकता हूँ लेकिन दुसरे तरीके से…आपको अभिवादन क्या दूं समझ में नहीं आ रहा है…क्षमा कीजियेगा…जय राम जी की आप कबूल करेंगे नहीं…सलाम आपको बोल नहीं सकता…जय मार्क्स मैं चाहूँगा ही नहीं..क्योंकि मैं तो उस विचारधारा की पुरे विश्व में पराजय चाहता हूँ…सत श्री अकाल बोल कर पूज्य गुरुओं का अपमान नहीं करना चाहता..नमो बुद्धाय कह नहीं सकता क्योंकि आप बौद्ध लगते नहीं..

अरुण कान्त शुक्ला \'आदित्य\' \\\\\\\\\\\\\\\\\\\' के द्वारा
October 14, 2010

कुछ भी लिखो , लिखते रहो , बुरा भी लगता है , तुम्हे पढ़ने के बाद , जीवन का हर सपना , झूठा लगता है ,

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 16, 2010

    वाह भाई अरुण कान्त जी, आपने तो गाने को ही बदल दिया..वैसे आप बदलने में माहिर लगते हो…आपने बहुत कुछ बदल दिया…अब देखो बदल न जाना

Rajeev Kumar Sharma के द्वारा
October 14, 2010

आप के लेख का शीर्षक आप की बीमार, घ्रणित और कुत्सित मानसिकता दर्शाता है, मैं एक हिन्दू हूँ जिसको अपने धर्म से बहुत प्यार है मेरे बचपन मुस्लिम बहुल इलाके में बीता और मेरे माता पिता अभी भी वहीँ रहते है, मैंने तो कभी किसी मुस्लिम को हत्या करते नहीं देखा इसके उलट मेरे परिवार में यदि कोई विपदा आई तो हमेशा मदद करते हे देखा ! मुझे शर्म आती है की आप जैसे लोग भी हिन्दू समाज में है और शर्म आती है उन पर जो आप के लेखो की प्रसंशा करते है !! वैसे यह कटु सत्य है की जो दुसरो के घरो में आग लगते है एक दिन उनका खुद का घर भी जल जाता है !!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    श्रीमान जी, सच कहते हैं आप..इस्लामिक विस्तारवाद ने मुझे बीमार ही कर दिया है..आपकी मानसिकता कौन सी हिंदूवादी है?हाँ आप नाम से जरूर हिन्दू प्रतीत होते हैं…लेकिन कर्म से..भगवान ही जाने?कयामत के पहले तक इंतजार कर लीजियेगा..शायद आपको मुद्लिम मानसिकता की आंच लगने लगे?आपकी पारिवारिक विपदा का मुसलमान बहुत ख्याल रखते है?मुझे तो मुस्लिम बस्ती ही छोडनी पड़ीं..हो सकता है आप भी मलीदा खाते मैं तो शाकाहारी हूँ…मैं अपने घर के जलने की क्या चिंता करूँ? हिंदुस्तान जल रहा है..कश्मीर से हिंदुस्तान पहले ही आधा कट चूका था..अब केरल और बंगाल की बारी है…२०३० तक पूरा हिंदुस्तान मुसलमानों के कब्जे में होगा…कम से कम आई एस आई तो यही मानती है…सिमी जैसे हिन्दुस्तानी इस्लामिक आतंकवादी संगठन इनकी खुल्लमखुल्ला मदद कर रहे हैं…आप जैसे लोग इन्हें वैचारिक संरक्षण दे रहे हैं

    rajshahil के द्वारा
    November 12, 2010

    लगता है मनोज को किसी मुस्लमान ने shararik क्षति पहुचाई या पारिवारिक इसी लिए उनका मुसलमानों के प्रति ऐसा व्यव्हार है ऐसे लोगो की आँखों में sugar ka baal होता है मनोज जी बुरा मत मानना sugar ka baal एक कहाबत है जो आपने सुनी होगी

Rajeev Kumar Sharma के द्वारा
October 14, 2010

आप के लेख का शीर्षक आप की बीमार, घ्रणित और कुत्सित मानसिकता दर्शाता है, मैं एक हिन्दू हूँ जिसको अपने धर्म से बहुत प्यार है मेरे बचपन मुस्लिम बहुल इलाके में बीता और मेरे माता पिता अभी भी वहीँ रहते है, मैंने तो कभी किसी मुस्लिम को हत्या करते नहीं देखा इसके उलट मेरे परिवार में यदि कोई विपदा आई तो हमेशा मदद करते हे देखा ! मुझे शर्म आती है की आप जैसे लोग भी हिन्दू समाज में है और शर्म आती है उन पर जो आप के लेखो की प्रसंशा करते है !! वैसे यह कटु सत्य है की जो दुसरो के घरो में आग लगते है एक दिन उनका खुद का घर भी जल जाता है !!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    श्रीमान जी, सच कहते हैं आप..इस्लामिक विस्तारवाद ने मुझे बीमार ही कर दिया है..आपकी मानसिकता कौन सी हिंदूवादी है?हाँ आप नाम से जरूर हिन्दू प्रतीत होते हैं…लेकिन कर्म से..भगवान ही जाने?कयामत के पहले तक इंतजार कर लीजियेगा..शायद आपको मुद्लिम मानसिकता की आंच लगने लगे?आपकी पारिवारिक विपदा का मुसलमान बहुत ख्याल रखते है?मुझे तो मुस्लिम बस्ती ही छोडनी पड़ीं..हो सकता है आप भी मलीदा खाते मैं तो शाकाहारी हूँ…मैं अपने घर के जलने की क्या चिंता करूँ? हिंदुस्तान जल रहा है

jalal के द्वारा
October 13, 2010

बड़े दिनों बाद जागरण पर आया हूँ. तो इधर उधर नज़र दौड़ाया. साथ में आपका भी लेख दिखा. लेकिन इन कुछ दिनों में आपको और कुछ हो गया है ऐसा लगता है आपका लेख पढ़ कर. आपको और कुछ नहीं मिलता क्या लिखने के लिए. आप जब तब दुसरे के धर्म के बारे में लिखते रहते हैं. लेकिन सभी मुस्लिम को हत्यारा कह रहे हैं. क्या किसी ने आपकी बहन, बीवी,भाई, माँ, बाप या किसी और को मारा है. आप जिस तरह लोगों को उकसा रहे हैं और बिना दुसरे लोगों के कुछ कहे आप दुसरे लोगों को बुरा कह रहे हैं उसमें अगर वोह आपकी हत्या कर दें तो इसका ज़िम्मेदार कौन होगा. जब आप ऐसा कहेंगे तो दूसरों से आशा क्यूँ करते हैं की वोह छोड़ देंगे. जहाँ तक मैंने देखा है अभी तक किसी मुस्लिम ने यहाँ पर किसी दुसरे धर्म के बारे में गलत नहीं कहा. फिर आप कौन सी दुनिया सुधार रहे हैं. इस से आप रिश्तों को बना रहे हैं या आपस के रिश्तों को और बिगाड़ रहे हैं. लेकिन आप के जैसे लोग और आस्तीन के सांप जो पहले से ही यहाँ पर छुपे हुए हैं बीच बीच में बिना मतलब के बैर बाधा रहे हैं. और कहते हैं के दुसरे लोग आतंकी हैं, हिंसक हैं तो फिर आप क्या हैं? आप जो कर रहे हैं क्या वोह सजा के काबिल नहीं ? बिलकुल है. मेरी राय है आप ऐसी उल जुलूल बातें न करें. हमारे माहौल को ख़राब ना करें. नहीं तो सौ बार का चोर एक बार पकड़ा जाता है कहीं ऐसा न हो जाए. अभी तक आप बचे हुए हैं तो इसका मतलब यह नहीं के आप मारने तक लोगों को उकसायें. मेरी बात बुरी लग सकती है. लेकिन अगर आपने ऐसा ही जारी रखा तो यह सच हो सकती है. अगर फिर भी आप ऐसा ही करते हैं तो इसका मतलब आप खुश हैं और बाकी लोगों को भी खुश होना चाहिए ऐसे नतीजों से जो भी साथ दे रहे हैं.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    मित्र..आपकी प्रतिक्रिया निःसंदेह समीचीन है और आपकी व्यथा निरर्थक भी नहीं..किन्तु क्या करूँ..जब हालात ही ऐसे हो गए हों तो कोई भी संवेदी व्यक्ति शांत रह भी कैसे सकता है?मैंने कभी भी किसी भी धर्म की निंदा नहीं की..हाँ पांथिक रूढीग्रस्तता के विरुद्ध अवश्य रहा हूँ..इस्लाम कोई धर्म नहीं मात्र एक राजनैतिक विस्तारवादी विचारधारा है…जिसे कम्युनिष्टों और गांधीवादियों ने लोकग्राह्य बनाने के लिए धर्म का चोला ओढ़ा दिया है|मैं उस महाशक्ति चामुंडा का उपासक हूँ की मेरा तो छोड़ दीजिये मेरे परिवार द्वारा पाले गए पशुओं का भी कोई बाल बांका नहीं कर सकता..मैं आत्मा की अमरता में विश्वास रखता हूँ..फिर मुझे मर देने से भी तो समस्या हल नहीं होने वाली…पिछले १ हजार साल से मुसलमान मार ही तो रहा है…आपको उदाहरण चाहिए जिस इस्लाम ने हंसती खेलती ईरानी सभ्यता को गाजर मूली की तरह नष्ट कर दिया और एक देश नहीं समूची की समूची सभ्यता खा गया वह किसी काफिर के प्रति उदार कैसे हो सकता है? पता नहीं किसी मुस्लिम ने ऐसा कुछ लिखा है की नहीं किन्तु एक प्रतिक्रिया जरूर की है…’जिन कमीनों ने बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया है” आगे नहीं लिखूंगा..यह है सामान्य मुद्लिम मानसिकता..और इसके पहले के पोस्ट में तो आप भी तर्क कर रहे थे..क्या मैंने आपसे कोई असंगत बात की…तर्क आपने भी किया मैंने भी किया हमदोनों ही सीमाओं में रहें..लेकिन उसी पोद्त पर गालियाँ भी आने लगीं..आपके ही कौम के कुछ लोगों की तरफ से…आप इसको स्वीकार क्यों नहीं करते की आपके लोग गाली गलौज करते हैं और तर्क को सुनना ही नहीं चाहतें…अंत में मुझे आपका लहजा धमकी भरा लगा…तो मैं एक बात बताना चाहूँगा शिवाजी और अफजल की कहानी तो आप जानते ही होंगे..वन्देमातरम

    kmmishra के द्वारा
    October 15, 2010

    जलाल जी वंदेमातरम ! इस लेख पर तमाम हिंदू ब्लागरों ने अपनी आपत्ति प्रकट की लेकिन किसी ने धमकी भरी भाषा और मरने मारने की बात नहीं की ।एक मात्र मुस्लिम ब्लागर, आपकी टिप्पणी आयी और आप मरने मारने पर उतर आये । . यह माना जाता है कि अगर मनुष्य विचार करना, तर्क करना बंद कर दे तो उसकी मनुष्यता खत्म हो जाती है और वह मरे हुये के समान है । कल लखनऊ में मौलाना बुखारी के साहसिक कारनामें को देखें और इतिहास की पुस्तकों को खंगालें तो यह बात सामने आती है कि इस्लाम में तर्क का और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हमेशा से ही दमन होता रहा है । सोचने समझने का काम आज से 1400 साल पहले किया गया था, उसके बाद से किसी भी मुस्लिम को तर्क करने और अपने विचारों को अभिव्यक्त करने से महरूम कर दिया गया । जिस किसी ने कोयी कोशिश की (सलमान रश्दी, तसलीम नसरीन आदि) उनको जान से मारने का फतवा जारी कर दिया गया । विचारहीन मनुष्य मृत माना जाता है और विचारों की हत्या करना एक प्रकार से मानवता की हत्या है । अब आप अपनी टिप्पणी को देखिये । आप मनोज जी द्वारा व्यक्त किये गये विचार ही नहीं बल्कि उनको भी मारने की बात कर रहे हैं । कहीं न कहीं आप मनोज जी द्वारा कही गयी बात को ही सत्य साबित कर रहे हैं ।

abodhbaalak के द्वारा
October 13, 2010

प्रिय मनोज जी , सर्वप्रथम तो मैंने विचार किया की आपके इस लेख पर मै अपना कोई विचार ही व्यक्त न करून पर बाद में सोचा की कम से कम , मेरा इस बारे में जो विचार है आप तक पहुंचा ही दूं , आप निसंदेह एक उछ कोटि के लेखक हैं , अपनी कलम का प्रयोग भली भांति जानते हैं , आप जिस तरह से लिखते हैं वो हर पढने वाले के रक्त में गर्मी पैदा करने वाला होता है , लोगों में एक जोश और अग्नि पैदा करता है , लेकिन इसमें अंतर ये है की , जो आपके लेखों को पसंद करते हैं वो ओज से ओत प्रोत हो जाते हैं और कुछ लोग जिनको आपके लेख पसंद नहीं आते उनके रक्त में क्रोध की ज्वाला भर जाती है मित्र , अगर आपने मेरे लेख पढ़े हो तो आप निश्चित तौर पर मुझे स्यूडो सेकुलर की श्रेरनी में रखते होंगे , मै लोगों को , चाहे वो किसी भी संप्रदाय के हों , जोड़ने की बात करता हूँ , और आप एक पूरे संप्रदाय को ही हत्यारा कहते हैं , भारत वर्ष में उस संप्रदाय के लगभल 18 करोड़ लोग हैं , अगर वो सारे के सारे आतंकवादी होते, हत्यारे होते तो देश में हर तरफ आग ही आग होती , ये मेरा मन्ना है , हाँ इस बात को कोई भी अस्वीकार नहीं कर सकता की उनमे से कुछ मुट्ठी भर लोग हैं जो की इस कुकृत्य में शामिल हैं पर उस छोटे से झुण्ड के लिए आप सारे सम्प्रदाय को आतंकवादी बना देन ये मेरे विचार से उचित नहीं है , प्रेम में बहुत शक्ति है , आप तर्क से अपने मत को तो जीत सकते हैं पर किसी के ह्रदय को नहीं. ह्रदय जीतने के लिए आपको अपने आचरण से , अपने वचन और अपने कर्म से दिलो को जीतना होगा , इतना ही कह सकता हूँ , क्योंकि इससे ज्यादा मुझे समझ में आता नहीं , मै आपके तरह से ज्ञानी हूँ नहीं , मै तो ठहरा एक अबोध बालक . http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    श्रीमान अबोधबालक जी, सादर वन्देमातरम, आपने बड़े ही चतुराई से मेरे ह्रदय को जीत लिया है…आपके सम्मोहक टिपण्णी ने निःसंदेह मुझे प्रफुल्लित किया है..सेकुलर और कम्युनल मनगढ़ंत बाते हैं..मैं आपको एक मनुष्य समझता हूँ ..और मनुष्य होने के कारन विचारधारा में तो अंतर होगा ही…दो मनुष्यों के विचार कभी एक जैसे नहीं हो सकते..क्रोध भी सात्विक,राजस और तामस तीन तरह का होता है..इस सृष्टि का कोई ऐसा प्राणी ही नहीं जिसे क्रोध न आये…और क्रोध हमेशा बुरा होता भी नहीं…अगर मनुष्य वैचारिक रूप से द्रिंह है तो कोई भी आक्रोश उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता..आतंकवाद का एकमात्र मतलब ए के ४७ लेकर टहलना ही नहीं है वरन आतंकवादी संस्थाओं को आर्थिक मदद भी पहुचना है..जकात का एक बड़ा हिस्सा इस्लामिक आतंकवादी संस्थाओं को जाता है…और इस बात का खुलासा एक मुसलमान ने ही मुझसे किया है..मैं प्रेम की शक्ति से कभी इनकार नहीं करता किन्तु शत्रुओं को प्रेम करना आत्महंता है…जय भारत,जय भारती

s.p.singh के द्वारा
October 10, 2010

मयंक जी आप के क्रांति कारी परिवार के विषय में जान कर हार्दिक प्रसन्नता हुई \अगर कांग्रेसी सरकार के द्वारा ऐसे परिवार की उपेक्षा की गई है तो यह और भी निंदनीय है/ वैसे आप की व्यथा को समझाना बेहद मुस्किल है कहीं आप की वेदना धार्मिक लगती कहीं विशुद्ध राजनितिक / कविता के माध्यम से आप क्रन्तिकारी की भूमिका में लगते है कही नितांत एक विशेष समुदाय के खिलाफ लगते है ——–”आपका यह कथन मुझे हिन्दू राष्ट्रवाद का नशा है”———पता नहीं आप कौन से हिन्दू राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं वर्तमान संविधान के अनुसार ऐसा संभव नहीं हो सकता — बिना संविधान को बदले किसी हिन्दू राष्ट्रवाद की काल्पना केवल स्वपन के अतिरिक्त कुछ नहीं — अगर हिन्दू इतना धर्म भीरु न होता तो हम चार सौ वर्षों तक मुसलमानों के अधीन नहीं होते और अंग्रेज हमारे ऊपर दो सौ वर्ष तक राज न करते \ हो सकता आपके अनुसार भारत का एक और बटवारा हो और जो कुछ बचे वहाँ हिन्दू राष्ट्र बन जाय \ आपके साहस को नमस्कार/जय भारत/

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    आदरणीय एस.पी. सिंह जी सादर वन्देमातरम, हमारे दादाजी ने जो कुछ भी किया मैं उसका हिसाब किताब नहीं लगाना चाहता हूँ, देश पर शहीद होने वाले ऐसे बहुत से लोग हैं जिनका किसी सरकारी रिकार्ड में नाम ही दर्ज नहीं हैं.किस किस को कांग्रेस सरकार लाभ पहुचती फिरेगी? मेरे दादाजी ने जो कुछ भी किया स्वान्तः सुख के लिए किया|आपको मैं अलग अलग रूपों में दिखता हूँ,इसके लिए आपका धन्यवाद किन्तु मैं तो एक ही हूँ और धर्म,राजनीती तथा क्रांति को एक ही समझता हूँ|नितांत एक समुदाय के विरुद्ध होना अनुचित नहीं है और न ही अप्रासंगिक|रही संविधान की बात तो उसमे भारत जैसा कुछ भी नहीं हैं..भारत इंडिया का पिछलग्गू है..और ऐसे पिछलग्गू संविधान को बदल ही देना चाहिए…१९३५ के अधिनियम से लेकर कनाडा के राजनैतिक उपबंधों तक हमारा संविधान भानुमती के कुनबे से अधिक और कुछ भी नहीं…मैं भारत का बटवारा नहीं चाहता..आसेतु हिमाचल भारत हिन्दू राष्ट्र है …सरकार को इसे हिन्दू राष्ट्र घोषित करना चाहिए…भारत आगे भी मुसलमानों के अधीन होने जा रहा है…जय भारत,जय भारती

swatantranitin के द्वारा
October 10, 2010

आदरणीय मनोज जी ! मैं आपकी बात से कुछ हद तक सहमत हूँ लेकिन आपने सभी मुसलमानों को एक ही लाइन में खड़ा कर कहे दिया की सभी हत्यारे है ये कुछ सहमती देने का दिल इजाजत नहीं देता| मैंने बचपन से सुना है की एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है हाँ इस तालाब में कुछ जादा ही मछलियाँ है जो देश और अपनी कोम दोनों को गन्दा कर रही है लेकिन इस के लिए आप पुरे तालाब की मछलियों को गन्दा नहीं कहे सकते | इस सन्दर्भ में एक लाइन और भी लिखी गयी है — every Muslim are not terrorist but every terrorist are Muslim लेकिन इसमें इनकी भी गलती नहीं लगती है क्योंकि इनको बचपन से वो किताब पढाई जाती है जिसमे कट्टरता को बढावा दिया गया है आप शायद समझ गए होंगे मैंने कुरान पढ़ी तो नहीं है लेकिन आपके द्वारा कुरान में लिखी बातें पढ़ कर मेरी कुरान के प्रति मानसिकता बदल चुकी है | बंदेमातरम…….

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय मित्र श्री स्वतंत्रनितिन जी, सादर वन्देमातरम, आपकी प्रतिक्रिया निःसंदेह उत्साहजनक है,जब हमारे प्रधानमंत्री जी देश के समस्त संसाधनों पर मुसलमानों को पहला हक देंगे तो मुसलमान हिन्दुओं के हक की हत्या ही करेगा न..फिर मुसलमान हत्यारा हुआ की नहीं…भारत का बटवारा करने वाला एक मुसलमान था फिर भारत माता की हत्या हुई की नहीं..और भारत में रहने के कारन सारे भारतियों की हत्या हुई..सामान्य हिन्दू काली माँ पर बलि नहीं चढ़ाता किन्तु बकरीद के दिन सामान्य मुसलमान भेंड,बकरी ऊंट,भैंसा की कुर्बानी देने के नाम पर निरपराध पशुओं की हत्या करता है की नहीं…फिर सामान्य हिन्दू मानसिकता के आधार पर सारे मुसलमानों को हत्यारा नहीं कहा जायेगा तो क्या कहा जायेगा? जय भारत,जय भारती

chaatak के द्वारा
October 8, 2010

प्रिय मनोज जी, एक और ओजस्वी कविता को पढ़ कर अत्यंत हर्ष हुआ कहना गलत न होगा कि आप सिर्फ कथन से ही नहीं बल्कि कर्म से भी धुर दक्षिण पंथी हैं लेकिन यहाँ पर सभी मुसलमानो को हत्यारा कह देने पर मुझे ऐतराज़ है कुछ नाम ऐसे हैं जिनका स्मरण मात्र ही हमें नतमस्तक कर देता है जैसे अब्दुर्रहीम खानखाना जो किसी भी हिन्दू से ज्यादा सच्चे हिन्दू और किसी भी मुसलमान से ज्यादा सच्चे मुसलमान थे | आपका उग्र राष्ट्रवाद निःसंदेह प्रसंशनीय है और मैं इसका पूर्ण समर्थन करता हूँ जिसका कारण यह है कि आप उस निर्विकार अस्त्र के द्योतक हैं जो अपनों और परायों दोनों के लिए समभाव रखता है | आपके इस आक्रोश की चिंगारियां अपने बैठे दोगले लोगों पर बरसें तो राष्ट्र का सही मायनों में हित होगा अब इसमें हिन्दू झुलसे या मुसलमान, सिक्ख हो या ईसाई हर हाल में राष्ट्र को लाभ होगा | मेरी अपनी व्यक्तिगत राय है कि हमारे राष्ट्र को किसी धर्म से किसी सम्प्रदाय से खतरा तब तक नहीं जबतक इसमें दोगलों का, घर में बैठे विभीषनो का दमन पूरी निष्ठा से किया जाय | हिन्दुस्तान इसी एक जगह चूक रहा है आप ये गलती कतई न करे | सामने खड़े बैरी से लड़ा जा सकता है लेकिन आस्तीन में छिपे साँपों से नहीं | जो हमारा धुर विरोधी हो उसका पूरा सम्मान भी हमें करना होगा जलालत सिर्फ उनको देनी है जो पीठ में खंजर मारते हैं और ऐसे मुसलमानों की संख्या नगण्य है लेकिन अपने आपको हिन्दू कहने वाले दोगलों की संख्या करोड़ों में हैं | असली आतंकवादी और असली राष्ट्रद्रोही वही हिन्दू हैं जो भगवा आतंकवाद का नारा लगाकर हमारी आस्तीनों में छिपे बैठे हैं | मुसलमानों को भर्त्सना की नहीं सिर्फ मुख्य-धारा में लाने की जरूरत है और ये काम चरित्र के कमजोर तथाकथित उदारवादी और हिन्दू विरोधी लोग नहीं बल्कि आप जैसे कट्टरपंथी ही कर सकते हैं | ‘इदं न मम, इदं राष्ट्राय’ का बिगुल कट्टर हिन्दू के साथ खड़ा होकर कोई कट्टर मुसलमान ही फूंक सकता है मुझे इस बात का पूरा विश्वास है | ईश्वर इस विश्वास को सत्य साबित करे ! वन्देमातरम!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय मित्र चातक जी सादर वन्देमातरम, मैं नवरात्र में मंच पर न आने की अपनी प्रतिज्ञा तोड़ रहा हूँ,आपकी प्रतिक्रिया और आपके विचार मुझे संबल देने वाले हैं.आपने कहा की कुछ मुसलमानों का नाम मात्र ही आपको नतमस्तक कर देता है..सत्य है..किन्तु ऐसे कितने हैं ..शायद उँगलियों पर गिनने लायक भी नहीं..मुझे तो चार या पांच से अधिक नाम ही नहीं दिखते…शस्त्र निःसंदेह निर्विकार सत्ता ही हैं,दुसरे शब्दों में शस्त्र ब्रम्ह ही है और इसीलिए हमारे धर्मग्रंथों में शस्त्र पूजा के शताधिक मन्त्र है ‘नमो खड्ग खंडं,कृपानं कटारम.सदा एक रूपं सदा निर्विकारं” और शस्त्र अथवा शास्त्र उठाने का एकमात्र उद्देश्य दुष्टों का दलन ही होता है| कहा भी गया है ‘अग्र्श्चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरन्धनु ,उभयोरपि समर्थानाम शापादपि,शराद्पी” और दोमुहें लोगों के विरुद्ध शास्त्र और शस्त्र दोनों का प्रयोग धर्मसम्मत है|आप ठीक कहते है की मुसलमानों को मुख्य धारा में लाये जाने की आवश्यकता है किन्तु कुरान और कम्युनिस्म के होते हुए मुलमान मुख्य धारा में आ ही नहीं सकता….जय भारत,जय भारती

    Kaylee के द्वारा
    July 12, 2016

    Quite a simple, but very nice dressing, abullsteoy to my taste. To give the dressing to the warm potatoes is what we also do. From my mom I learned to first add some hot beef broth to the freshly sliced, still warm, potatoes, a quantity that is just sucked up, not to drown the poptatoes. It adds to the taste.I wish you a good day, Eric

gaurav2911 के द्वारा
October 7, 2010

म्यन्क्जी वाकई में सच में एक खून को खुला देने वाला पोस्ट I सच में हिन्दू भावना को बढ़ानेवाला और युवराज की सहेब्जादी निकलनेवाला I इस पोस्ट के लिए बधाई

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय गौरव जी, सादर वन्देमातरम यकीन जानिए युवराज के अनाप शनाप प्रलाप ने मुझे इस कदर व्यथित कर दिया की मैं अपने आपको संभाल नहीं पाया….और आक्रोश में लिख गया सो लिख गया…जय भारत,जय भारती

daniel के द्वारा
October 7, 2010

प्रिय मित्र मनोज ! निसंदेह आपमें बहुत उर्जा है किन्तु यह उर्जा क्रोध /आक्रोश के रूप में परिवर्तित हो रही है कविता लिखते समय आप किन भावनाओ में बह गए पता नहीं लेकिन अब काफी समय बीत चुका है अपनी ही लिखी दो लाइनों पर नज़र डालें १.हर मुसलमान हत्यारा है २. जब तक शैतानी आयत पढ़ ला इल्लाहा चिल्लाएगा मनोज जी आप हिन्दू है तो गीता को तो मानते ही होंगे , गीता को मानेंगे तो पुनर्जनम को भी मानेंगे यदि आप अगले जनम में किसी मुस्लिम परिवार में जन्मे तो क्या ला इलाहा इल -लल -लाह नहीं बोलेंगे (चिल्लायेंगे) और फिर कोई ………………………चंगेज,हलाकू,बाबर,औरंगजेब,गजनवी हत्यारे| ………………………..नादिर,तैमुर,उलुग,गोरी और बख्तियार हिन्दू परिवार में पैदा होंगे और फिर कहेंगे ” हर मुसलमान हत्यारा है” ……………………….आत्म समीक्षा के लिए इतना ही काफी है ***शुभकामनाओं सहित ***

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय डैनियल जी सादर वन्देमातरम, मैंने जो कुछ भी लिखा है,उसका मुझे थोडा भी अफ़सोस नहीं है,जब एक राज्य का मुख्यमंत्री और एक युवा सांसद बहक सकता है तो मैं क्यों नहीं बहक सकता? क्या बहकना और बहकाना सिर्फ उन्ही लोगों के अधिकार में है,जो साधन संपन्न है?नहीं हमें भी बहकना आता है…और वह नशा ही क्या जो बहका न दे…अंतर सिर्फ इतना है की उन्हें ऐश्वर्य का नशा है और मुझे हिन्दू राष्ट्रवाद का नशा है…..लगता है आपने गीता नहीं पढ़ी है अन्यथा ऐसी बातें न करते..गीता में पुनर्जन्म के साथ ही साथ कर्मवाद की भी चर्चा हुई है…आत्मा और परमात्मा के अंतर्संबंधों की बड़ी सूक्ष्म व्यंजना हुई है…सृष्टि का कोई भी कार्य बिना किसी कारण के नहीं होता…कार्य और कारण का यह अंतर्संबंध ही ऋत को आकार प्रदान करता है..जीवात्मा अंतिम समय में जिस विषय का चिंतन करते हुए अपने प्राण त्यागती है…उसी तरह का देह उसे प्राप्त होता है…तात्पर्य हिन्दू यदि हिंदुत्व के संस्कारबोध से अनुप्राणित है तो हिन्दू ही पैदा होगा और मुस्लमान अपने अत्याचारी संस्कारों के कारण मुसलमान घर में ही पैदा होगा…इसमें व्यतिरेक तभी हो सकता है जब व्यक्ति के संस्कारों की उर्जा एक विशेष धारा की ओर अग्रसर हो जिसका देही के देह से कोई सम्बन्ध न हो…अगर ऐसा न होता तो हिन्दुओं में भी आपको बाबर,गोरी,गजनी,बख्तियार,अलाउद्दीन जैसे उदहारण मिलते…हिन्दू माताएं किसी अत्याचारी को जन्म दे ही नहीं सकती…बशर्ते बीज गलत न हो गया हो…क्षमा कीजियेगा कुछ तल्ख हो गया हो तो मिथ्या बुद्धि विलास समझिएगा…जय भारत…जय भारती

kmmishra के द्वारा
October 7, 2010

मुल्ला मुलायम सिंह के सेकुलर पाखंड को जनता भली भांति समझ गयी । साम्प्रदायिक विद्वेष से लबरेज उनकी कथनी और करनी में भारी अंतर साफ नजर आता है । 500 सालों से निरंतर चले आ रहे राममंदिर संघर्ष में हिंदुओं के लहू की अंतिम आहूति मौलाना मुलायम सिंह ने 1990 में ली थी जब उन्होंने निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलवा दी थीं और सैंकड़ों कारसेवकों की लाशें सरयू में बोरे में डाल कर बहायी गयीं थी । फिर उन्होंने मस्जिद ध्वंस कें मुख्य आरोपी कल्याण सिंह से हाथ मिला लिया था लोध वोट के लिये । आज जब मुस्लिम वोट बैंक उनके हाथों से खिसक गया है तब वे फिर धर्मनिरपेक्षता का पाखंड कर रहे हैं । धर्मनिरपेक्षता का पाखंड मुल्ला मुलायम सिंह के साथ साथ कांगे्रस पार्टी भी कर रही है । अयोध्या फैसले को लटकाये रहने में ही कांग्रेस की भलाई थी । फैसला न आने पाये इस लिये उसने आर सी त्रिपाठी को मोहरा बना कर फैसले को टलवाने में कोयी कसर न छोड़ी । अब इस फैसले से उसको लगता है कि मुस्लिम वोट बैंक हाथ से निकल जायेगा तो उसके तमाम नेताओं को जूड़ी बुखार आने लगा है । फैसले के पहले ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का बयान था कि राम मंदिर के लिये आर एस एस और भाजपा किसी भी हद तक जा सकती है । इसके विपरीत फैसला आने पर भाजपा और आर एस एस की टिप्पणियां बेहद संतुलित थी । उन्होंने कहा कि इस फैसले से किसी की हार जीत नहीं हुयी है । लेकिन कांगे्रस का नुकसान हो चुका था । अब कांग्रेस इस नुकसान की भरपाई के लिये मस्लिम समुदाय को कम्पन्सेट कर रही है । कल ही प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का बयान था कि आउट आफ कोर्ट जा कर (मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिग है) सरकार जामिया मिलिया और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी का दर्जा देगी । अभी तक ये केन्द्रीय विश्व विद्यालय हैं और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार खुद ही इसका सैद्धांतिक विरोध कर रही है । दूसरा मामला । कल ही भोपाल में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने राष्ट्रवादी संगठन आर0 एस0 एस0 की तुलना आतंकवादी संगठन सिमि से की है । यह बिल्कुल वैसा ही बयान है जैसा कि मुल्ला मुलायम सिंह ने अभी दो दिन पहले दिया था कि मुसमान अपने को ठगा महूसस कर रहे हैं । इस फैसले से मुलायम और कांग्रेस दोनों की छद्यम धर्मनिरपेक्षता की हांड़ी चूल्हे पर नहीं चढ़ पायी । राहुल गांधी इसके पहले भी कई ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे उनके अहंकारी और तानाशाही व्यक्तित्व का पता चलता है । कांग्रेस उनको युवराज मानती है और अगला पी एम बनाने की तैयारी में है पर युवराज की बोली और आचार व्यवहार से लगता है कि उनको भारत देश के इतिहास की अधिक जानकारी नहीं है । भाजपा ने सही ही कहा कि उनको कांग्रेस के साम्प्रदायिक इतिहास पर नजर डालनी चाहिये । कुछ लोगों की यह भी राय है (जिन्हें गांधी नेहरू परिवार की कुण्डली ज्ञात है) कि उन्हें अपने खानदान के इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिये । इधर राहुल बाबा के जिगरी उमर अब्दुल्ला इस उमर मंे लौंडहाई से बाज नहीं आ रहे हैं । उनका ताजा बयान है कि कश्मीर का भारत में अधूरा विलय हुआ था । राहुल बाबा की संगत का असर तो पड़ना ही था । न इनको भारत के इतिहास का ज्ञान है और न उनको । कश्मीर का मुख्यमंत्री एक ऐयाश नेता का ऐयाश पुत्र है । इनको इतना भी ज्ञान नहीं है कि अगर भारत सेना कश्मीर में न होती तो ये पिता पुत्र रावलपिंडी या मुल्तान की किसी सैनिक जेल की शोभा बढ़ा रहे होते । मित्रों, देश युवराजों के चक्कर में फंसता जा रहा है । पुराने लंपट जमींदारों के अघाये हुये युवराजों की फौज आज कल सत्ता के गलियारों में घूम रही है । नजरें उठा कर देखिये । चोर का बेटा चोर, भिखारी का बेटा भिखारी, सेठ का बेटा सेठ, आई ए एस का बेटा आई ए एस, डाक्टर का बेटा डाक्टर, विधायक का बेटा विधायक, मंत्री का बेटा मंत्री, सीएम का बेटा सीएम और पीएम का बेटा पीएम बन रहा है । बिहार चुनाव में टिकट भी वंशवाद के आधार पर बांटे गये हैं । संविधान में लोकतंत्र की जो परिभाषा दी गयी है वह सिर्फ चुनाव की डेट घोषित होने से चुनाव के नतीजे घोषित होने तक ही फलीभूत होती है । उसके बाद भारत में फिर वही सामंतयुग प्रभावी हो जाता है । अगर यकीं न आये तो वर्तमान स्थिति और 100 साल पहले की स्थिति दोनो की तुलना करके देख लीजिये । आम आदमी पहले की तरह ही मंहगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी से त्रस्त है । कभी किसी अफसर से, पुलिस वाले से, मंत्री से वर्तमान में पाला पड़े तो पहले की जमीदारी व्यवस्था आंखों के सामने घूम जायेगी । थाने और कचहरी का चक्कर अगर शुरू हुआ तो आपका भगवान ही मालिक है । अब आप कहेंगे कि क्या किया जा सकता है । बहुत आसान काम है । बंदूक उठा कर किसी लाम पर नहीं जाना है । वही तरीका अपनाईये जो गांधी जी ने अपनाया था । शांति पूर्वक विरोध करिये । अपनी बात कहने से झिझकिये नहीं । जो गलत है उसकी शिकायत करिये । संपादक के नाम पत्र, आर टी आई, ब्लाग पर अपनी आवाज बुलंद कीजिये और जो सो रहे हैं और सोचते हैं कि देश ऐसा ही चलने दो उनको जगाईये । धीरे धीरे माहौल बदलने लगेगा । जय हिंद ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय मिश्रा जी सादर वन्देमातरम, आपकी प्रतिक्रिया पाकर कृतार्थ हुआ…मनमोहन सिंह से भरे मंच से कहा था की इस देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमान का है…आखिर क्यों?मैंने मुसलमानों के विरुद्ध कह दिया तो क्या गजब किया? जय भारत…जय भारती

nikhil के द्वारा
October 7, 2010

शायद आपको मेरी प्रतिक्रिया कुछ बुरी लगी हो , दो अनुभव मंच पर बाटना चाहता हु.. 1 -. 3 दिन पहले देखा मैंने.. यहाँ महाराजगंज के एक गाँव में एक बुजुर्ग हिन्दू ब्रह्मण महिला का देहांत हो गया उनकी शव यात्रा जा रही थी और उसमे लग्हब 200 लोग रहे होंगे.. .उसमे मैंने देखा की लगभग 60 -70 मुस्लिम महिलाये और पुरुष थे.. , ये है वह शक्ति जो देश को मिलकर चला रही है अपने कंधो पर . 2 -दूसरी घटना मुझपे ही बीती जीवन की अविस्मर्णीय घटना .1992 में जब ढाचा टूटा उस समय हमलोग मऊ जिले में थे , अस्तुपुरा मोहल्ला था.. हम जहा थे वह सिर्फ हमारा घर हिन्दू था चारो और मुस्लिम थे , कर्फु लगा था और पुलिस गश्त पर थी बहार निकलते ही गोली मरने के ऑर्डर रहते है इस स्थिति में.. चुकी वह क्षेत्र काफी संवेदनशील था.. ऐसे में ही मै अपने एक पडोसी मित्र नौताज की दी हुई पतंग लेकर छत पर चढ़ गया उड़ाने को ,, लेकिन दुर्भाग्य से मै छत से गिर गया दुसरे के घर में.. जिसमे न तो कोई था और न ही उतरने के लिए कोई सीढ़ी थी ,,मेरे घर में भी किसी को पता नहीं था की मै छत से गिर गया हु.. मगर वही लूम में काम करने वाले ने मुझे गिरते हुए देख लिया था और देखते ही देखते पचासों मुस्लिम इकट्ठे हुए .. उन्होंने एके के ऊपर एक चढ़ कर मुझे वहा से निकला क्योकि मै तो फिर 15 घंटे तक बेहोश था .., किसी का हाथ कट गया किसी को पैर में चोट लगी.. उन्होंने मुझे हॉस्पिटल में भारती करवाया क्योकि पिता जी उस समय घर पे नहीं थे.. जब होश आया तब जाकर ये सब पता चला.. .. अब ऐसे अनुभव होने पर ये बात कैसे मान लू.. की हर मुसलमान हिन्दुओ का विरोधी है.. जबकि वे चाहते तो मुझे नहीं निकालते किसी को पता भी नहीं चलता की मै कहा हु.. कोई भी घटना घाट सकती थी.. मगर वहा किसी ने हिन्दू और मुसलमान नही देखा बल्कि इंसानियत देखी.. और यह हिन्दुओ की कॉपीराईट नहीं है .. बल्कि ये ही वह शक्ति है जो हिन्दुस्तान को चला रही है.. इसे न तो भाजपा चला रही है न कोंग्रेस .. हा मुस्लिम कट्टरता का समर्थन करने वालो का मै उतना ही कट्टर विरोधी हु .. और जहा बात हिन्दू कट्टरता या हिन्दू आतंकवाद की आती है तो वहा मै बिना संकोच कहता हु की हिन्दू आतंकवाद जैसी चीज न तो हिन्दुस्तान में थी न होगी..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    मैं पहले भी कह चूका हूँ एक बार फिर कहता हूँ ,व्यक्तिगत अनुभवों से देश नहीं चला करता..खैर शायद आपको मेरे बारे में पता नहीं है…मैं स्वतंत्र सेनानियों के खानदान से ताल्लुक रहता हूँ और गर्व से कह सकता हूँ वतन को काम था तो लहू हमने दिया था, बहार आई है तो कहते है तेरा काम नहीं..खैर मैं नकली स्वतंत्रता सेनानियों की बात नहीं कर रहा हूँ …मेरे दादाजी बताया करते थे की कि उनके साथ जेल में एक डाकू भी बंद था जब देश आजाद हुआ तो बहुत बाद में पता चला कि वह भी स्वतंत्रता सेनानी बन चूका है…पेंशन और सुविधाओं का भी उसने भरपूर लाभ उठाया…मेरे परदादा को काले पानी कि सजा हो चुकी थी और वकीलों का खर्चा उठाते उठाते हमारी जमींदारी बेच दी गयी थी..मेरे दादा का पालन पोषण एक यादव ने किया ….आज अगर मेरे दादाजी जिन्दा होते तो पानी पी पी कर कांग्रेस को गाली देते?और जो कुछ भी मैंने लिखा है उस पर फुले नहीं अघाते…ac में बैठ कर राष्ट्र और राष्ट्रीयता के बारे में गलचौरा करना आसान है..जमीन पर उतर कर लाठी और गोली खाना नहीं..एक कुत्ता भी अपने गली की हिफाजत करने के लिए प्राणप्रण से तैयार हो जाता है और हिन्दुओं के अस्मत पर चोट लगे और मैं कुछ बोलूं भी न,ट्रेन में ढेर सारे हिन्दू और मुसलमान यात्रा करते है तो क्या वे सभी सहिष्णु हो जाते हैं?अंतिम यात्रा भी कुछ ऐसा ही है..मुसलमानों ने आपकी हिफाजत की यह जान कर ख़ुशी हुई..लेकिन यह एक सर्वमान्य नियम कैसे हो सकता है?गणेश शंकर विद्यार्थी और स्वामी श्रद्धानन्द को तो कोई मुसलमान बचाने नहीं आया…शायद उनकी नजर में आप एक कमजोर हिन्दू रहे होंगे जो उनकी कौम का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता..मुझे आपकी बात बुरी नहीं लगी…अगर कोई मुझे हिन्दू आतंकवादी कहना चाहे तो निःसंकोच कह सकता है…क्योंकि सच बोलना आतंकवाद है तो हाँ मैं हूँ आतंकवादी

    nikhil के द्वारा
    October 8, 2010

    मनोज जी हर्ष हुआ ये सुनकर की आप स्वतंत्रता आन्दोलन के सेनानियों के खानदान से तालुक रखते है .क्या आपका परिचय इतना ही है..? वतन के लिए लहू केवल हिन्दुओ ने नहीं दिया.. उसके लिए मुसलमान सिख सभी ने सर कटाया था.. और इस आजादी पर सभी का बराबर का अधिकार है.. देश का बटवारा हिन्दू मुसलमानों ने नहीं कराया बल्कि उसकी वजह नेहरु और जिन्ना के बीच सत्ता का खेल था.. जिसने देश को बाट दिया और आज भी हमारे बीच ऐसे जिन्ना नेहरु है.. जो बार बार उसी चोट पर नमक डाल रहे है..आपके विचार समस्या का समाधान नहीं चाहते बल्कि उसे भड़काना और बढ़ाना चाहते है.. . मेरे माता और पिता पक्ष दोनों तरफ से स्वतंत्रता आन्दोलन की लडाई लड़ने वाले रहे है.. प. चंद्रदेव तिवारी मात्र पक्ष से ,वे सेनानी रहे है जिनके घर के ५६ बार कुर्की हुई और आजादी के बाद संत विनोवा के भूदान आन्दोलन में १२० एकड़ जमीं उन्होंने दान कर दी.. .. और पित्र पक्ष से भी आजादी में बहुत कुछ कुर्बान करने वाले रहे.. यही नहीं उन्होंने अपने जीवन में कोई भी संपत्ति नहीं बनाई…. दूसरी बात न तो आपसे कम हिंदूवादी मै हु और न ही आपसे कम राष्ट्रवादी.. ..आप का हिंदुत्व अगर मात्र एक धर्म विशेष से भय खाकर इसतरह आग उगल रहा है.. तो ये आपकी बौद्धिकता नहीं .आपका भय है .. हिंदुत्व को फिर आपने नहीं समझा है . और आपने सही कहा की व्यक्तिगत अनुभव से राष्ट्र नहीं चलता , लेकिन बेलगाम भावनाओं से भी राष्ट्र नहीं चलता .. हा इन भावनाओं से आप भस्मासुर जरुर बन सकते है… आप जो कह रहे है वह न तो समाज के लिए मानक है न तो संभव है .. ऐसी ही विचारधारा रखने वाले दोनों तरफ है.. और समस्या की जड़ ये ही लोग है.. जिनकी आड़ लेकर राजनीतिग्य अपना खुनी खेल खेल रहे है.. .. आप जैसे विचारक कुछ और नहीं मात्र कठपुतलिया है.. जो कभी कोंग्रेस कभी सपा, कभी भाजपा के इशारो पर अपनी आग उगल जाते है.. आम इंसान न तो लुटेरा है न ही , हत्यारा .. यहाँ तक की आज की तारीख में हर व्यक्ति चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान आपने धर्म की समीक्षात्मक आलोचना करने लगा है.. वजह साफ़ है हर धर्म के नाम पर कुछ अनुपयुक्त समस्याए खड़ी हुई है उन्हें दूर करना आज के लिए जरुरी है.. आप कैसे विभाजन की बात कर रहे है.. यह पूरी तरह से काल्पनिक है एक पकिस्तान का हस्र आपने देख लिया.. मुझे अफ़सोस है की आप जैसा जोशीला व्यक्तित्व ऐसे विघटनकारी विचार रखता है. .. ये असंभव है क्योकि यह आपके राष्ट्र और हिन्दू धर्म की तासीर में ही नहीं है .. यह सनातन धरा तो सिर्फ समाहित करना जानती है .. अलग करना नहीं . .. सनातन धर्म से अलग कुछ है ही नहीं तो आप क्या अलग करेंगे.. …… अकबर को भी ये बात पता चल गई थी की जिस राष्ट्र का धार्मिक इतिहास गड़नातित है , वह इस्लाम जैसा कुछ सौ साल पुराना धर्म क्या सिखा पायेगा.. ..अतः उसने धर्म का सहारा नहीं लिया.. उसने धर्म को शाशन में संयोजन का माध्यम बना लिया.. और यहाँ ऐसे ही चलेगा.. अगर लड़ना है तो इस अवसरवादी राजनीती से लड़े.. आपको क्या लगता है की अगर आप धर्म की अधर पर बाटने में सफल हो गए.. तो क्या ये संभव नहीं है की कलको हिन्दुओ में सैकड़ो जातीय उपजातिय अपने लिए अलग अलग राष्ट्र मांगे.. तब क्या करेंगे.. उनके भी तर्क होंगे आपकी तरह .. हमर शोषण हुआ.. हमें दबाया . हमें उनसे अलग करो.. तब क्या होगा.. ?

    Irish के द्वारा
    July 12, 2016

    A untlmpoicaced page, with demure colors , nor mind having less fireworks during this to feel the pleasure once reading items. As you can understand on a side you can use something simple and as well very agreeable!

nikhil के द्वारा
October 7, 2010

मनोज जी ..आप बेशक लिखते बहुत शानदार है ओज कूट कूट कर भरा है.. मगर शायद ये ओज गलत दिशा में जा रहा है.. आपकी रचना तात्कालिक घटना पर बिना सोचे समझे प्रतिक्रिया है .. आपने शीर्षक दिया हर मुसलमान हत्यारा है.. अब आप राहूल गाँधी और मुलायम सिंह से अलग कहा रह गए.. यही तो वे करवाना चाहते है फर्क ये ही है की उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक है और आपकी प्रतिक्रिया भावनात्मक…जो की अधिक खतरनाक है… जिस देश पर जान देने वाले टीपू सुलतान ,वीर अब्दुल हामिद ,,जैसे जिगर वाले मुसलमान रहे हो.. उस कौम को आप इस तरह प्रतिक्रिया नहीं दे सकते… आपको ये बात समझनी चाहिए की न तो हर मुसलमान का आदर्श लुटेरे और आतंकी है और न ही हर मुसलमान हत्यारा है , लडाई तो इस अवसरवादी राजनीती से है .. हिन्दू और मुसलमान में नहीं है… सुबह राहुल गाँधी का वक्तव्य मैंने भी पढ़ा और मैंने भी इस विषय पर लेख लिखा तुरंत.. लेकिन तबतक कई पोस्ट आ चुकी थी इसलिए चर्चा में भाग लेना ज्यादा उचित समझा.. धार्मिक कट्टरता मुस्लिमो में ज्यादा है इसी वजह से तो उनका राजनीतिक लाभ सबसे ज्यादा उठाया गया.. धर्म के नाम पर वोट के नाम पर… हिन्दुओ का संगठन उनकी जागरूकता और प्रतिक्रिया जरुरी है.. लेकिन वो मुसलमानों से लड़ने के लिए नहीं बल्कि अपने राष्ट्र के सच्चे राष्ट्रवाद को समझने उसे बचने के लिए .. राष्ट्रवाद का मतलब ये नहीं की आप तलवार उठाकर हिन्दुओ के अलावा बाकी सभी को देश निकला दे दे .. समरसता तो आपकी मिटटी की तासीर में है जो दुनिया में और कही नहीं है.. जरुरत इस बात की इस राष्ट्र के और टुकड़े न होने दे जो की हमारी घटिया राजनीती का लक्ष्य है .. राहूल गाँधी और उमर अब्दुल्ला विदेशी शिक्षा प्राप्त है उन्हें राजनीती विरासत में मिली है राष्ट्र की समझ नहीं .. अन्यथा संघ और सिमी की तुलना राहुल ने ऐसे नहीं की होती… वैसे भी वे इस देश को नहीं चला रहे है इससे अभी इस देश की वो जनता चला रही है जिसमे हर धर्म के लोग रहते है…

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय निखिल जी सादर वन्देमातरम. तात्कालिक घटनाएं ही कभी कभी विप्लव के बीज बो जाती हैं,शायद आपने सुना नहीं है की लम्हों ने खता की और सदियों ने सजा पाई..काश मेरा लिखा राहुल जी तक भी पहुँच पाता..तब उन्हें पता चलता की शब्दों की आंच कितनी तेज होती है…मैं अलग होना भी नहीं चाहता..मैं पहले ही कह चूका हूँ की विचारधारा के मात्र दो ही खेमे होते हैं..आज फिर दुहरा रहा हूँ ..चरम वामपंथ और चरम दक्षिणपंथ…शायद आपने मुझे पहचाना नहीं मैं विचारधारा के चरम दक्षिणपंथ की बात कर रहा हूँ ..और वे जिद्दी हैं तो मैं भी हूँ ..देखता हूँ कौन महान जिद्दी है?टीपू सुल्तान का तो इतिहास ही हिन्दू विरोध के बुनियाद पर आधारित है रही अब्दुल हमीद की बात तो जब गोलियां चलने लगती है तो यह नहीं देखती की मरने वाला कौन है? और गोली कहाँ से आ रही है? युद्ध में खड़ा होने का तो मतलब ही मौत है..अब अगर अपने को नहीं बचायेंगे तो दुश्मन की गोली से मारे जायेंगे..वैसे भी देश भावनाओं और व्यक्तिगत उदाहरणों से नहीं चला करता…सिमी आम मुसलमान की की वकालत करती है और उसको पैसा भी आम भारतीय मुसलमान देता है..इतनी सी बात आपको कब समझ में आएगी? waiting for gajanwi नाम से सिमी का एक पोस्टर मैंने सहेज कर रखा हुआ है…महमूद गजनवी कौन था? यह तो शायद आप भी जानते होंगे? और हाँ पोस्टर हिंदुस्तान में छपी हुई है..पाकिस्तान का सर्वाधिक प्रसार वाला अखबार डान वाराणसी से निकला करता था…आज भी उसका दफ्तर ज्यों का त्यों है…देश को बटवारे की आग में झोकने वाला मुस्लिम लीग हमारे देश की एक राजनैतिक पार्टी है….मैं संघ की वकालत सिर्फ इसलिए कर रहा हूँ की शायद यही एकमात्र ऐसी संस्था है जो दबे जुबान से भी मरियल हिन्दुओं की बात करती है…और उसको आतंकवादी संगठन कह दिया…सिमी की तरह…भला बताइए तो संघ का कौन सा प्रचारक आतंकवादी घटना में लिप्त है…मुझे संघ से भी अधिक उग्र और उग्र क्या प्रचंड हिन्दुवाद चाहिए…माफ़ कीजियेगा मैं हिन्दुत्ववादी नहीं,हिंदूवादी हूँ, मुझे जनसँख्या का स्पष्ट विभाजन चाहिए और हाँ पांथिक आधार पर…कांग्रेस अथवा अन्य धर्मनिरपेक्षों के हांथो में हिन्दू और हिंदुत्व सुरक्षित नहीं है

    khalid.Bareilly के द्वारा
    October 16, 2010

    निखिल जी , आपने जिस सरल अंदाज़ में मनोज जी को समझाया है अच्छा लगा काश ये भी देश हित में मोहब्बत के इंसानियत के पैगाम देने वाले लेख पोस्ट करने लगें, यकीन माने मनोज जी अल्लहा सब्र करने वालों के साथ है,हम आपके सारे लेख पड़ते हैं आप गुबार निकाल लें जितना भी है लिख दें एक बार में……………………………………………………………………………………………………….फिर लिखें मानव हित में.

    Kaylin के द्वारा
    July 12, 2016

    One Nation voters were mostly coivtrsaenves disappointed in the 1996-98 Howard govtDepends where you’re talking about, Geoff. They picked up 5 seats off Labor in the 1998 Queensland election, and came close to taking quite a few more. Many were safe ALP seats, as was Oxley when Hanson won it.

s p singh के द्वारा
October 7, 2010

मयंक जी बहुत सुन्दर बधाई स्वीकार करे या न करे आपकी मर्जी ——- पर एक बात है की आप में देश भक्ति कूट कूट कर भरी है तभी तो आक्रोश में शब्दों की मर्यादा से कन्नी काट गए – कुत्ता केवल कुत्ता होता है वह भोंकता है काटता है या फिर केवल तलुवा चाटता है वह बांटता नहीं आपका कथन की ———- ” जब तक आदर्श लुटेरे हैं,जब तक जेहादी प्यारा है| इसमें कोई शक नहीं यहाँ हर मुसलमान हत्यारा है|” इसमें लुटेरे “आदर्श” क्योंकर हो गए ——- देश में कांग्रेस पार्टी का अपना एक इतिहास है आजादी की लड़ाई में योगदान है देश को कई प्रधान मंत्री दिए है

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय एस पी सिंह जी, सादर वन्देमातरम, मैंने आपकी बधाई स्वीकार की और जहाँ तक शब्दों की मर्यादा से कन्नी काटने का सवाल है तो भविष्य के प्रधानमंत्री जब शब्दों की मर्यादा का ध्यान नहीं रखते तो मैं क्यों रखूं ?आपने सही कहा कुत्ता केवल कुत्ता होता है वह भोंकता है,काटता है या फिर केवल तलुवा चाटता है, एक बात मैं और जोड़ना चाहूँगा, कुत्ते की निद्रा भी बड़ी दिलचस्प होती है,हल्की सी आहट से भी उसकी नींद उड़ जाती है…और कांग्रेस में यह सभी गुण है (यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है की मैं सन १९५२ के बाद वाले कांग्रेस की चर्चा कर रहा हूँ)…कांग्रेस कभी कभी भौंकता है,और जब भी भौंकता है,हिन्दुओं पर ही भौंकता है,काटता है तो हिन्दुओं को ही काटता है..और एक पिद्दी से मुसलमान का भी तलुवा चाटने में कोई संकोच नहीं करता..लुटेरों को आदर्श बनाने में उसकी सजगता अथवा स्वान निद्रा की कोई और मिशाल मिल ही नहीं सकती….नेहरु से लगायत मनमोहन सिंह तक कांग्रेस का कौन सा ऐसा प्रधानमंत्री है,जिस पर गंभीर किस्म के आरोप नहीं लगें…कभी अवसर मिला तो माउन्टबेतन पुत्री द्वारा लिखित पुस्तक की भी चर्चा करूँगा..अथवा उनके लेडी माउन्टबेतन के साथ खिचाये गए फोटो भी इस मंच पर दूंगा..वैसे आप http://www.vandematramvaranasi.blogspot.com से नेहरु के कुछ चित्र प्राप्त कर सकते हैं.गाँधी ने अपने जीवन काल में ही कांग्रेस को समाप्त किये जाने की इच्छा व्यक्त कर दी थी,आज की गांधीवादी कांग्रेस पता नहीं किस आदर्श पर चल रही है..देश को प्रधानमंत्री देना यह कहीं से भी सिद्ध नहीं करता की कांग्रेस न्याय के रस्ते पर चल रही है अथवा वह देशभक्तों की मंडली हैं..आपका बहुत बहुत धन्यवाद…जय भारत,जय भारती

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
October 7, 2010

वाह, मयंक जी क्या खूब लिखा है काँग्रेस आज मुस्लिम वोटों को पाने के लिये हिंदूवादी संगठनों को आतंकवादी घोषित कर रही है और उन पर प्रतिबन्ध लगाने को कह रही है कितनी गन्दी राजनीती हो गयी है हमारे देश की मैं आपके साथ हूँ नवीन कुमार शर्मा

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय नवीन जी, सादर वन्देमातरम, आप सत्य कहते हैं,मुस्लिम मतों को प्राप्त करने हेतु कांग्रेस,सपा,बसपा,कम्युनिस्ट जैसे दल हिन्दुओं का गला काटने में कोई संकोच नहीं करते,आप हमारे साथ है,यह जानकर ह्रदय को बल मिला…जय भारत,जय भारती.

jai pandit के द्वारा
October 7, 2010

वाह मयंक जी क्या लिखा है | एक दम सत्य लिखा है | अपनों ने ही अपनों को काटा है दूसरो में इतना कहा दम था | कोई हो या न हो मै आपका समर्थक हूँ ? बहुत बहुत बधाई …….

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 8, 2010

    आदरणीय जय पंडित जी, सादर वन्दे मातरम, मैंने जो भी लिखा है सत्य लिखा है,परिणाम चाहे जो कुछ भी हो और मै इस कविता की एक एक लाइन को सत्य प्रमाणित कर सकता हूँ,आप हमारे साथ है,इससे हमारे ह्रदय को बल मिला है,आपका बहुत बहुत धन्यवाद


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