मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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मार्क्स और मार्केट का मारा

Posted On: 30 Sep, 2010 Others में

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वन,उपवन,गिरि,सरिता,गह्वर।
कण-कण,तृण-तृण,अणु जड़-चेतन॥
आज प्रफुल्लित रामलला को-
अवध-सिँह को विधिक समर्थन॥
अब हम वक्ष तान बोलेँगे
रामलला की भूमि हमारी॥
राम रम्मैया भारत संस्कृति,
बाबर तो था अत्याचारी॥
आर्य कहाँ से भारत आये?
बतलाओ वह देश कौन सा?
कहाँ सभ्यता पुरुष उपजते?
सच बोलो परिवेश कौन सा?
भारत छोड़ नहीँ पायेगा,
ऐसी कोई उपमा मूरख॥
जिसमेँ पुरुषोत्तम के सम्मुख,
टिमटिम करने का भी साहस॥
जिनको मिथक कहा था तुमने
ठुकराया अस्तित्व बोध भी॥
उनके पदचिन्होँ को छूकर,
आज चकित है,स्वयं शोध भी॥
गिरि ऊपर उड़ते थे जिनको-
तूने डाइनासोर कहा है॥
इन्द्रवज्र को क्या समझोगे?
परिवर्तित जलवायु गढ़ा है॥
तुममे यदि इतनी मति होती,
बंदूकेँ यूँ नहीँ बदलती॥
कभी स्वयं को क्रांतिदूत तो
कभी दमन का साधन कहती॥
हा हा,ही ही से आगे भी
ओ रे पगले! जीवन धारा॥
वह क्या समझेगा? जो केवल-
मार्क्स और मार्केट का मारा॥

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
October 6, 2010

प्रिय मनोज जी वन्देमातरम | सत्य उद्घाटित करती बेहतरीन कविता बधाई

    atharvavedamanoj के द्वारा
    November 8, 2010

    प्रिय शैलेश जी, सादर वन्देमातरम, आपकी अमूल्य प्रतिक्रिया का आभार….जय भारत,जय भारती

rajkamal के द्वारा
October 1, 2010

प्रिय श्री मनोज भाई …वन्देमातरम ! पूर्व के बारे में पश्चिम की मिथ्या सोच और उनकी खुद के बारे में भ्रामक लेकिन दुनिया को वरगलाने वाली सोच के बारे क्या खूब लिखा है आपने …..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 3, 2010

    प्रिय मित्र राजकमल जी सादर वन्देमातरम प्रतिक्रिया के लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद…जय भारत,जय भारती|

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
October 1, 2010

मनोज जी…. अब वक्ष तान बोलेँगे रामलला की भूमि हमारी॥ राम रम्मैया भारत संस्कृति, बाबर तो था अत्याचारी॥ आपकी वीर रस से भरी रचनाएँ आंदोलित करती हैं………

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय पियूष जी सादर वन्देमातरम आपको न्यायालय के निर्णय की हार्दिक शुभकामनाये |काश यह आन्दोलन अन्यों को भी आंदोलित कर पता..जय भारत,जय भारती

chaatak के द्वारा
October 1, 2010

प्रिय मनोज जी, ॐकार के नाद को सार्थक करती इस रचना पर हार्दिक बधाइयाँ ! सत्य को कब तक छिपा सकेंगे धूल और धुंवें के बादल? अब बहुतों को आत्ममंथन की आवश्यकता है कि गुमराह आखिर कौन कर रहा था? मेरी राय मिश्र जी से पूर्णतयः इत्तेफाक रखती है कि जयचंद इतिहासकारों ने आखिर क्या क्या निगल रखा है अब इसका भी खुलासा हो जाना चाहिए और अब लोगों को ये भी समझ में आना चाहिए कि हिन्दू इतना सहिष्णु है कि उसने ५०० वर्षों तक एक अताताई ढाँचे को अपनी छाती पर सहा और सिर्फ न्याय की फ़रियाद की | मार्क्स और मार्केट का प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण बड़ा ही प्रभावी लगा| अच्छी रचना पर बधाई!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय चातक जी सादर वन्देमातरम, आपको न्यायालय के निर्णय की हार्दिक शुभकामनाये|आपने बिलकुल सत्य कहा है…धुल और धुएं के बादल सत्य को बहुत दिन तक छुपाये नहीं रख सकते..अभी तो सत्य का महज एक पहलू उजागर हुआ है अभी तो न जाने कितनी परते उधरनी बाकी है..जय भारत,जय भारती

K M Mishra के द्वारा
October 1, 2010

मनोज जी वंदेमातरम ! कल 500 वषों से दबाया गया सच काले अंधियारे बादलों की ओट से प्रकाशित सूर्य के समान निकल कर सामने आ गया । राम मंदिर पर माननीय उच्च न्यायालय का दस हजार पेज का फैसला कल शाम आ गया । इस फैसले में राम जन्मभूमि मंदिर के इतिहास को समेटा गया है । राम मंदिर संघर्ष के 500 साल के इतिहास को जयचंद इतिहासकारों ने कभी मान्यता नहीं दी और न उसका कहीं पर उल्लेख किया । परन्तु इसके सैंकड़ों साक्ष्य नंगी आंखों से दिखाई पड़ते हैं । कल उच्च न्यायालय ने उस इतिहास पर अपनी मुहर लगा दी । यह किसी एक विशेष धर्म की हार या जीत नहीं है । ईश्वर की पूजा/इबादत किसी भी नाम से करो वह अंत में उस एक परमपिता की ही पूजा होती है लेकिन देश के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास को दबाने, कुचलने की साजिश का कल पर्दाफाश हो गया । माननीय उच्च न्यायालय का फैसला इन जयचंद कम्युनिस्ट इतिहासकरों के चेहरे पर पड़ा जोरदार तमाचा है जिन्होंने आजादी के बाद की पीढी को अब तक बरगलाये रखा । भक्त श्री मनोज कुमार की यह कविता कल शाम सदियों के बाद उदय हुये सत्यसूर्य का अभिनंदन है । इस महान कविता के लिये मेरी कोटि कोटि बधाई स्वीकार करें ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय मिश्रा जी, सादर वन्देमातरम, आपको न्यायालय के निर्णय की हार्दिक शुभकामनाये |मैंने भी अपने ब्लॉग में ठीक वही बात कहना चाहा है जो आपने समझा है..आपने प्रतीकों को बहुत ही अच्छे ढंग से पकड़ कर कविता की समुचित व्याख्या की है…इसके लिए आपका कोटि कोटि अभिनन्दन..जय भारत,जय भारती

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 1, 2010

श्री मनोज जी नमस्कार………..अब वक्ष तान बोलेँगे रामलला की भूमि हमारी॥ राम रम्मैया भारत संस्कृति, बाबर तो था अत्याचारी…………….बहुत जबरदस्त पेशगी की है आपने,बधाई

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय तिवारी जी सादर वन्देमातरम, आपको न्यायालय के निर्णय की हार्दिक शुभकामनाये,साथ ही प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका आभार जय भारत,जय भारती|

Ramesh bajpai के द्वारा
October 1, 2010

वन,उपवन,गिरि,सरिता,गह्वर। कण-कण,तृण-तृण,अणु जड़-चेतन॥ आज प्रफुल्लित रामलला को- अवध-सिँह को विधिक समर्थन॥ अब वक्ष तान बोलेँगे रामलला की भूमि हमारी॥ राम रम्मैया भारत संस्कृति, प्रिय श्री मनोज जी इन भाव भरे उदगारो की प्रसंसा के लिए मेरा हर शब्द जैसे छोटा पड़ रहा है . इस ओजस्वी अभिव्यक्ति के लिए कोटिश धन्यवाद . बंदेमातरम

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय वाजपेयी जी सादर वन्देमातरम. आपको न्यायालय के निर्णय की हार्दिक शुभकामनाये|आज यह सिद्ध हो गया की न्यायपालिका आम जनता को निराश नहीं करेगी..जय भारत,जय भारती

आर एन शाही के द्वारा
October 1, 2010

उत्प्रेरक और सामयिक उद्गार मनोज जी … बधाई । आपने अपना लोगो अवतार बदल दिया, अच्छा और डैशिंग है । पवित्र ओंकार आपकी पहचान को भी सार्थकता देता है । बस खटका यही है कि मिलते जुलते अवतार वाले लेखक बन्धु के लेख और प्रतिक्रियाओं पर ही पिछले दिनों बवाल हुआ था ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय शाही जी सादर वन्देमातरम आपका बहुत बहुत धन्यवाद, अवतार बदलने के पीछे कोई विशेष उद्द्येश्य नहीं है..अच्छा लगा इसलिए बदल दिया,लेखक बन्धु ने स्वतः ही विवाद खड़ा कर दिया था,मैं भी गया था उन्हें समझाने और उन्होंने मेरी भद्द कर दी…कोई बात नहीं,एक ही बात को लोग अलग अलग तरीके से व्यक्त करते हैं..मेरा भी मन किया की मैं उन लेखक महोदय से कह ही दूं ‘तुम्हारी शान घट जाती की रुतबा घट गया होता,जो गुस्से से कहा तुमने वही हँस कर कहा होता’ लेकिन चुप ही रह गया…खैर वह पुरानी बात हो गयी..आपको न्यायालय के निर्णय की हार्दिक शुभकामनाये…जय भारत.जय भारती


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