मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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गंगा भी उल्टे तरफ बह रही है

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ये हिन्दू लहू है, कणोँ मेँ है ज्वाला,1171823277_terrorism
मचलती हुई बिजलियाँ खेलती हैँ।
जरा रौब से इसको छूकर तो देखो
कि इसमेँ प्रलय की शमाँ झूमती है।
गरम है ये इतना कि सूरज की गर्मीvivekananda
और तारोँ की भी रोशनी कुछ नहीँ है।
प्रबल है ये इतना कि तेजाब पानी,
हलाहल जहर का भी सानी नहीँ है।
मगर आज रुख इसका कैसा हुआ है
कि इसमेँ नहीँ अज्म की रोशनाई।
लगातार,हरबार बहता ही रहता
मगर,वेदना ने नहीँ आँख पाई।
ये चीत्कार भी क्योँ नहीँ कर रहा है?
ये हुंकार भी क्योँ नहीँ कर रहा है?
ये पापोँ के साये जगे क्योँ हुये हैँ?
ये अधरोँ पे ताले लगे क्योँ हुये है?
ये काशी की मस्ती को काबे ने लूटा,
नहीँ क्योँ लड़ी अश्क की बह रही है?
ये नजरे इनायत है किसके हवस की?
कि गंगा भी उल्टे तरफ बह रही है।

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

roshni के द्वारा
September 21, 2010

मनोज जी सोते हुए अंतर्मन को जगाने वाले भाव कविता के रूप में लेन के लिए बधाई…..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 22, 2010

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद रोशनी जी आज सारा विश्व हिंदुत्व की रोशनी से प्रकाशित होना चाहता है …हमे अपने चरित्र से सारे संसार को यह दिखा देना है की हम सर्वश्रेष्ट हैं वन्देमातरम

NIKHIL PANDEY के द्वारा
September 21, 2010

मनोज जी आपका ये ओजमय आवाहन राष्ट्रवादी आन्दोलन की धार को और तेज करेगा .. हिंदुत्व की धमनियों में ऐसा ही ओजमय रक्त प्रवाहित होना चाहिए ..आपकी वाणी को नमन

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 22, 2010

    निखिल जी जिस दिन लोगों को यह तथ्य विदित हो गया की इस देश की आत्मा में हिंदुत्व का ही भाव सन्निहित है ..ठीक उसी दिन एक क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा और पूरा विश्व सत्यम शिवम् और सुन्दरम की संकल्पना से पुनह संचेतन हो जायेगा ….वन्देमातरम

NIKHIL PANDEY के द्वारा
September 21, 2010

क्या बात है मनोज जी आपके इस ओजमय आह्वाहन ने कई रगों में खून की गति तेज कर दी होगी.. निश्चित रूप से हिंदुत्व की पताका फिर से राष्ट्रवादी आन्दोलन में प्रेरणास्रोत बनेगी .

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 22, 2010

    निखिल पाण्डेय जी आपका बहुत बहुत आभार वन्देमातरम हिदुत्व ही भारतीयत्व है

rkpandey के द्वारा
September 21, 2010

मनोज जी, राष्ट्र की छवि को दूषित करने वालों तत्वों को हतोत्साहित करना ही होगा. हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिशें चल रही हैं ऐसे में सक्रिय और सतर्क अभियान की जरूरत है. आपके तेजस्वी विचारों के लिए आपका आभार.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    श्रीमान आर के पाण्डेय जी सादर वन्देमातरम… आपकी स्नेह सिक्त प्रतिक्रिया प्राप्त हुई. मैं अपने स्वयं के साधनों aur बल के द्वारा राष्ट्रवाद की धारा प्रवाहित करने में सदैव तत्पर रहूँगा..यदि हम लोगों के prayas से यह kisi अभियान का रूप धारण करता है.तो मुझे अतीव प्रसन्नता होगी…आपका मित्र और एक सहयोगी

rkpandey के द्वारा
September 21, 2010

प्रिय मनोज जी, उदारमना हिन्दू जाति की सहृदयता को अपने ही लोगों से चोट पहुंचती रही है. अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए हिन्दू समुदाय को बदनाम करने की साजिशें निरंतर चल रही हैं. हमारी उदारता लोगों को खल रही है. ऐसे संक्रमणकालीन समय में तेजस्वी स्वर की आवश्यकता स्वयंसिद्ध है.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    प्रिय मित्र आपने इस तरह के स्वरों की आवस्यकता महसूस की इसके लिए main आपका हार्दिक आभारी हूँ. आपलोगों के स्नेह से ही हमें आंतरिक बल मिलता है और माँ वागीश्वरी की साधना फलीभूत होती है ….आपका अभिवादन

    Nyvaeh के द्वारा
    July 12, 2016

    i do;7182#&nt think you need to be rooted but if your willing to do this you might as well just root your device it take about 30sec with gingerbreak app you can always unroot your phone with the same app.

आर.एन. शाही के द्वारा
September 21, 2010

वाह मनोज जी । अपनी भावनाओं के उद्गार को शब्दशिल्प की विद्वता से काव्य में ढाल देने का आपका हुनर लाजवाब है … बधाई ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    आदरणीय शाही जी सादर वन्देमातरम आपका शुक्रिया…आपके प्रोत्साहन से भरे हुए शब्द हमें आतंरिक संतुष्टि प्रदान करते हैं और नवीन कविताओं के सृजन को प्रेरित karten हैं….आपका सदैव आभारी…जय भारत जय भारती

Ramesh bajpai के द्वारा
September 21, 2010

ये नजरे इनायत है किसके हवस की? कि गंगा भी उल्टे तरफ बह रही है। प्रिय मनोज जी आपकी व्यथा व अंतर्मन की चोट को व्यक्त करती पोस्ट ने मर्माहत किया है ..

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    श्रीमान वाजपेयी जी सादर वन्देमातरम जब इतिहास ने ही हमारे मर्मों को निम्बू की तरह निचोड़ कर रख दिया है तो वर्तमान में मर्माहत करने वाली ही रचनाएँ निकलेगी न| जिस तरह आपके मर्म को चोट पहुंची है,काश इसी तरह की चोट..प्रत्येक हिन्दू तक पहुँच पाती तो परिदृश्य ही कुछ दूसरा होता…वन्दे भारत मातरम

rajkamal के द्वारा
September 20, 2010

एक क्रान्तिकारी कविता … बधाई

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    प्रिय मित्र श्री राजकमल जी सादर वन्देमातरम आपकी कविताएँ ..मुझे अत्यंत प्रिय लगती हैं..आपने तारीफ़ की इसके लिए आपका कोटिश आभार… आर्य जननी जय वन्दे त्वां

    Gabby के द्वारा
    July 12, 2016

    I had a great time shopping with Jacb.gnoom but if read for greed has not mentioned their codes i would have never had such experience … thank u

chaatak के द्वारा
September 20, 2010

प्रिय मनोज जी, क्या खूब कहा है! सच है क्या लोग इतने कायर हो गए हैं कि प्रतिकार करना तो दूर फ़रियाद तक नहीं करते? दम नहीं आवाज़ में या कान बहरे हो गए? क्यूँ हमारी बात का उनपर असर होता नहीं? वन्दे-मातरम!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    प्रिय मित्र चातक जी सादर वन्देमातरम भगत सिंह ने कहा है कान बहरे हो गए हों तो आवाज भी दमदार होनी चाहिए…यह कलियुग है और उसका भी प्रथम चरण….तो रिक्तता तो रहेगी ही…जय भारत जय भारती

    Mattingly के द्वारा
    July 12, 2016

    I loved reading your love letter about the Vineyard! I am a Canlforiia girl who married a small-town New Englander (just west of Boston). We have spent many happy vacation days on the Vineyard, and I secretly wish we could retire there someday. It is such a special place!

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
September 20, 2010

ये मुद्दा बेहद संवेदनशील है……. इसलिए इस पर कोई सही अथवा गलत प्रतिक्रिया देना उचित नहीं………… हार्दिक क्षमा प्रार्थी हूँ……… जय माँ गंगे……. शुक्रिया……….

    atharvavedamanoj के द्वारा
    September 21, 2010

    श्रीमान पियूष जी सादर वन्देमातरम आपने हमारी कविता पढ़ी और उसकी संवेदना को स्वीकार किया उसके लिए आपका भूरी भूरी आभार ….जय गंगा की निर्मल धारा… श्रीमान


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