मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

76 Posts

19068 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1151 postid : 136

केन्द्रीय गृहमंत्री के नाम एक खुला पत्र

Posted On: 26 Aug, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

माननीय श्री पी॰ सी॰ चिदम्बरम जी।
भगवा आतंकवाद के बारे मेँ आपके और हिन्दू आतंकवाद के बारे मेँ आपके तथा अन्य प्रगतिगामी राजनीतिज्ञोँ के विचार जानकर मन को अत्यंत ही प्रसन्नता की अनुभूति हुई।सच कहते हैँ आप और आपके समान विचारधारा वाले अन्य लोग।हिन्दू हमेशा से ही आतंकवादी रहा ही है।क्या करेँ, हठी जो ठहरा ‘प्राण जाये पर वचन न जाई’।
मैँने भी एक पाप किया है, गलती से कही से एक कुरान पा गया और उसमेँ जो कुछ भी लिखा था, यथातथ्य वर्णन कर दिया।मेरे कुछ भाई भी मेरा साथ देने लगे।उन सब की तरफ से मैँ क्षमाप्राथी हूँ।मैँ इस देश का सबसे बड़ा हिन्दू आतंकवादी हूँ, क्योँकि मैँने हिन्दुओँ की बात की है।एक काम कीजिए, आप मुझे सूली पर चढ़ा दीजिए, शायद इस देश मेँ कुछ शांति स्थापित हो सके।
आपका गुनाहगार
मनोज कुमार सिँह ‘मयंक’

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

496 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vijendrasingh के द्वारा
September 5, 2010

क्या बात है मनोज जी कहाँ खो गए हो……………………?

ashvini kumar के द्वारा
August 28, 2010

मनोज जी चिदम्बरम साहब कहना कुछ ओर चाह रहे थे यह तो उम्र का असर है जबान फिसल गई असल बात तो यह है की विश्व के समस्त मुस्लिम मुल्कों में जितनी भी हिंसक वारदातें हो रही हैं वह सभी वारदातें हिन्दू आतंकवादी कर रहे हैं [यह देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानो का ]साहब गर्व की बात है जनसख्या में हम दुसरे नम्बर पर हैं ,समस्त विश्व को हमसे डरना चाहिये,उनके अनुसार यदि हम सफल हैं तो कुछ ही दिनों मे दुनिया हमारे देश के कदमों में होगी …..

arun के द्वारा
August 27, 2010

* भारत बहुसख्यक हिन्दुओ के कारण ही धर्मनिरपेक्ष है..? अगर यहा मुसलिम बहुसख्यक होते तो भी क्या यह धर्मनिरपेक्ष होता..? १. विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये “सब्सिडी” देता हो ? २. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ? ३. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ ७०% बहुसंख्यकों को “याचना” करनी पडती है, ३०% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ? ४. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ? ५. किसी “मुल्ला” या “मौलवी” का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ? ६. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य “कश्मीर” में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ? ७. १९४७ में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ? ८. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर ३०% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ? ९. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि “अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है” ? १०. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ? ११. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

    kmmishra के द्वारा
    August 27, 2010

    अरून जी आपके तथ्यों को कोई काट नहीं सकता है । आजकल लोग धर्म के नाम पर आरक्षण की बात करने लगे हैं । धर्म के नाम पर आरक्षण के लिये ही पाकिस्तान का निर्माण हुआ था । अगर सरकार धर्म के नाम पर आरक्षण की बात करती है तो यह संविधान का अपमान होगा ओर संविधान के पंथनिरपेक्ष रूप को अपने ही हाथों ध्वस्त करने का प्रयास भी । अगर यही करना है तब फिर भारत को एक हिंदू राष्ट्र घोषित कर दें फिर आरक्षण दे ते फिरें । समाजवाद और पंथनिरपेक्षता मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे । यह 42वें संविधान संशोधन के तहत इमरेंसी के समय तब जोड़ा गया था जब अधिक्तर विपक्ष जेल में था । फर्जी संविधान संशोधन करके ।

    kmmishra के द्वारा
    August 27, 2010

    अरून जी आपके तथ्यों को कोई काट नहीं सकता है । केवल एक हिंदू ही धर्मनिरपेक्ष होता है । आजकल लोग धर्म के नाम पर आरक्षण की बात करने लगे हैं । धर्म के नाम पर आरक्षण के लिये ही पाकिस्तान का निर्माण हुआ था । अगर सरकार धर्म के नाम पर आरक्षण की बात करती है तो यह संविधान का अपमान होगा ओर संविधान के पंथनिरपेक्ष रूप को अपने ही हाथों ध्वस्त करने का प्रयास भी । अगर यही करना है तब फिर भारत को एक हिंदू राष्ट्र घोषित कर दें फिर आरक्षण दे ते फिरें । समाजवाद और पंथनिरपेक्षता मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे । यह 42वें संविधान संशोधन के तहत इमरेंसी के समय तब जोड़ा गया था जब अधिक्तर विपक्ष जेल में था । फर्जी संविधान संशोधन करके ।

    sebastian के द्वारा
    August 27, 2010

    आतंकवाद के खिलाफ मुस्लिम धर्म गुरु एक नहीं हजारो बार फतवा दे चुके है !! लेकिन जिसकी आँखे नफरतो से भरी हो उनको सच्चाई कहा दिखाई देती है ,, भारत में ८२% हिन्दू है तो ३०% मुसलमान कहा से आगये ,,, कृपया नफरत फैलाना बंद करे !!

    vijendrasingh के द्वारा
    August 28, 2010

    अरुण जी आपके सवालों के जवाब शायद माननीय प्रधानमंत्री जी भी ना दे पाए ,क्यूंकि इन सवालों का जवाब देने से एक वर्ग नाराज हो जायेगा ? एक बात और मन में आती है यदि हिन्दू जात पात भुला दे तो हिन्दुओं को एक होने से कोई नहीं रोक सकता ……और तब तक उपरोक्त आंकड़े और बड़ते रहेंगे जब तक ऐसा ना हो …हम लोग जोश में बहस भी करते है की हिन्दुओं एक हो जाओ लेकिन जात – पात का बंधन और रूडिवादी सोच हमें रोक देती है आओ एक ऐसी मशाल जलाएं जिसके साथ हमारे बीच की सारी दूरियां ख़त्म हो जाये,उसके बाद यदि कोई भारतीय है तो वो हमारा है गैर भारतीय हमारे दुश्मन चाहे वो किसी धर्म सम्प्रदाय के क्यूँ ना हो ?

    rajan,sunderpur,vns के द्वारा
    August 28, 2010

    धन्यवाद अरुण जी !!!! आप ने समाज की असली तस्वीर दिखाई है . आप ने इतने सारे सवाल करके बुद्धिजीवियो को सोचने का मोका दिया है .सत्ता को पाने के मद में आदमी देश का बहुत नुकसान कर रहे है .

    Lorrie के द्वारा
    July 12, 2016

    All three behind Torres contnatsly switching and moving of course. I think Hulk if signed can fit into that as well cos he is very mobile and good dribbler and packs lethal strikes on topReply

saima malik के द्वारा
August 27, 2010

मयंक जी,सादर प्रणाम अप्प दीपो भव: आपके विचारों और लेखनी का हम सम्मान करते हैं,परन्तु आपके द्वारा जो संवेदनशील विन्दु चुना गया है,उसपर स्तरीय जानकारी के आधार पर कोई लेख विना किसी शोध के लिखना आत्म हन्ता प्रयास के अतिरिक्त और कुछा नहीं है. आप की सोच है मुस्लिम हिंदुस्तान पर आक्रमणकारी कौम है,जिसने हमारी भूमि और अधिकारों पर कब्ज़ा कर रखा है,तो आप बहुत कम सोच रहे है,अरे भारत एक प्राकृतिक सम्पदा सदेव से रही है और विश्व की सिरमौर रही है,हमें प्रक्रति ने सब कुछ दिया,जितना किसी अनन्य को नहीं दिया. मै तो कहता हूँ की विश्व की प्रत्येक जाती और धर्म ने हमारी सम्पदा और भूमि पर कब्ज़ा किया है,किसी समय संपूर्ण विश्व का अधिकांश हिस्सा हमारे गोंडवाना महादीप का हिस्सा था,जिसे हम आज वृहत्तर भारत से परिभाषित करते हैं,और समस्त महासागर हमारे देश के मध्य में तेथीज़ सागर के नाम से स्थित था,ये था हमारा वृहत्तर अखंड भारत,इस धरती का सिरमौर,परन्तु तब संभवता हिन्दू अथवा कोई अनन्य धर्म नहीं जन्मा था,और संभवता मानव की उत्त्पत्ति भी नहीं हुई थी. और प्रकृति में सर्वप्रथम हमसे रुष्ट होकर महादिपीय प्लेट विश्थापन गति द्वारा हमारे वृहत्तर भारत (गोंडवाना लैंड ) को और तेथीज़ सागर को कई हिस्सों में बांटकर हमारी भूमि पर अन्यय जातियों और धर्मो के पनपने और आक्रमण का मार्ग प्रशस्त कर दिया,येही हमारी नियति बन गयी.हमारा तेथीज़ सागर वृहद गंगा में परिणत हो गया और कुछ हिमालय निर्माण की भेट चढ़ गया. ” पर कहते हैं ने कि हर कष्ट एक सुख अथवा लाभ का पूर्वगामी होता है” और सब खोकर हमें मिली विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला,भारत का मुकुट,और मिली अमूल्य प्राक्रतिक जैव विवधता से भरपूर धरती,जिसे सजाया और संवारा मानसूनी (दक्षिण पश्चिमी) वर्षा ने,जोकि हिमालय के प्रत्यक्ष लाभ का अतुलनीय उदाहरण है,क्योंकि यदि हिमालय न होता तो ?

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 27, 2010

    आदरणीय मलिक जी. आपने भगवन बुद्ध को उद्धृत किया..और मैं उस दिव्य महापुरुष के सामने नतमस्तक हो जाता हूँ. हालांकि मैं एक कट्टर वैदिक अयाचक ब्राम्हण हूँ और भगवन बुद्ध ने वेदों का तीव्र प्रतिकार किया था फिर भी पता नहीं उस सक्शियत में एसा क्या हैं jo मुझे पूरी तरह से स्तंभित कर देता हैं…और उन्होंने भी अन्याय का ही विरोध किया क्योंकि तत्कालीन वैदिक धर्म में बहुत सी विकृतियाँ घर कर गयी थी और तत्कालीन पुजारीगन उसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहें थे| इसी परिस्थितियों के मध्य शंकराचार्य का भी जन्म हुआ. यह तो आस्तिक और नास्तिक दर्शन की बात हो गयी….में नहीं समझता की भोगौलिक तरीके से दार्शनिक समस्याओं का समाधान हो सकता है| भारतीय दर्शन में तत्व को समझने के लिए तर्क,अनुमान,प्रत्यक्ष और प्रमाण की आवस्यकता होती है| मैं इन चार आधारों पर अपनी जिज्ञासा का समाधान चाहता हूँ..एक बात और गुजरात के शासक जिमोरिन ने जब यह जाना की अरब में एक नयी प्रकार की विचारधारा का अभ्युदय हुआ है तो उन्होंने तत्काल अपने दूतों को अरब से इसलामिक प्रचारकों को लाने भेज दिया…हमारे यहाँ कोई भी विचारधारा तब तक स्वीकार नहीं की जाती जब तक उसे दर्शन की कसौटी पर कास कर देख न लिया जाये…शाश्त्रार्थ में इस्लामिक पंथ प्रचारकों की पराजय हुई…तब जिमोरिन ने रजा होने के नाते अपना अंतिम निर्णय सुनाया…निःसंदेह,इस्लाम का कोई दार्शनिक आधार नहीं है किन्तु एक इश्वर में बिना शर्त सम्पर्पण की भावना शायद हमारे देश में भक्ति की परम्परा को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो..और इस तरह भारत में इस्लामिक पन्थानुयायियों को अपने मजहब के प्रचार की अनुमति मिल गयी…लेकिन मैं मैं यह पूछना चाहूँगा की इस्लाम ने इस देश को क्या दिया और हर बार हिन्दू ही बलिवेदी पर क्यों चढ़ता रहे…पुरे विश्व का कल्याण भी करें और अपनी जमीं भी खोता रहे..इसके साथ ही आतंकवादी होने का ख़िताब भी उसी के सर बंधा जाएँ….आखिर क्यों?

आर.एन. शाही के द्वारा
August 27, 2010

राजनेताओं की बात छोड़िये मनोज जी, वे तो कभी कुछ कभी कुछ कहते ही रहते हैं । अगर आपका दिल कहता है कि आपने कोई सच्ची बात की है, जिससे किसी निर्दोष को कोई ठेस नहीं पहुँची, तो आपको किसी की परवाह नहीं करनी चाहिये ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 27, 2010

    आदरणीय शाही जी, मेरी शिक्षा दीक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हुई है, पूज्य महामना मेरे आदर्श हैं. मुझे यहाँ के कुलगीत में ही सिखाया गया है की सत्य पहले फिर आत्मरक्षा..एक बात और महामना जी ने अपने हिन्दू धर्मोपदेश में लिखा है ”अहिंसका न हन्तव्या आततायी वधार्हंह ” अर्थात अहिंसकों को तो कभी छूना ही नहीं चाहिए और आततायियों का तो वध ही होना चाहिए और यही मेरे जीवन का आदर्श है| आपका margdarshan मिला जिससे मैं अभिभूत हूँ. मुझे किसी की परवाह नहीं हैं|

    Geraldine के द्वारा
    July 12, 2016

    It can be rare to discover a prfnisseooal person in whom you may have some faith. In the world today, nobody truly cares about showing others the answer in this issue. How fortunate I am to have now found such a wonderful website as this. It truly is people like you that make a true difference nowadays through the ideas they reveal.

chaatak के द्वारा
August 26, 2010

मनोज जी, ये छद्म वेशधारी सत्य को सूली पर चढ़ाना तो चाहते हैं लेकिन क्या करें इन्हें पता है एक मनोज को चढाने की देर है हर घर में मनोज पैदा होने शुरू हो जायेंगे | इन चरित्रहीन नेताओं के पास वो आत्मबल नहीं के सत्य का सामना कर सकें लेकिन ये पीठ में छुरा घोपने में माहिर हैं और इनके छुरे का नाम है ‘न्यायालय’ देखना है इस बार ये बेईमान वार किस तरफ से करते हैं|

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 27, 2010

    मैं भी ऐसा ही समझता हूँ चातक जी. स्वामी विवेकानंद ने कहा भी है की हम हिन्दू रक्तबीज के प्राणशक्ति धारण करते हैं और आत्मा की अमरता में विश्वास रखते हैं. फिर आये जिस जिस में हिम्मत हो. मैं भी न्यायालय के निर्णय का इन्तजार कर रहा हूँ. जय श्री राम

vijendrasingh के द्वारा
August 26, 2010

मनोज जी सबसे बड़ी विडंबना यही तो है की भारत देश में वोट की राजनीती चरम पर है पी.चिदम्बरम पहले नेता नहीं है जो हिन्दुओं के खिलाफ सिर्फ इसलिए जहर उगल रहें है क्यूंकि उन्हें किसी वर्ग विशेष को संतुष्ट करना है ऐसे कई नेता हैं जैसे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ,उत्तर प्रदेश से मुलायम सिंह , बिहार से नितीश कुमार और लालू प्रसाद यादव,आदि …यह सर्व विदित है की पूरी दुनिया आज आतंकवादियों के निशाने पर है कहीं हूजी ,कहीं लस्कर ए तय्यबा ,कहीं अल-काएदा कहीं तालिबान ,आतंकवादियों का निर्यातक देश पाकिस्तान भी इसके चंगुल से बच नहीं पाया है मगर क्या हमारे माननीय गृह मंत्री जी ने कभी ये बयान दिया की “इस्लामिक आतंकवाद” दुनियां के लिए खतरा है नहीं क्यूंकि इन्हें पता सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस को मुस्लिम लोग ही देते हैं हाल ही में फारूख अब्दुल्ला साहब ने बयान दिया था की यदि संसद हमले में फांसी की सजा प्राप्त अफजल को यदि फांसी दी गई तो घाटी में अशांति फ़ैल जाएगी ,अब तो लगता है राम देव बाबा की राजनितिक पार्टी ही कांग्रेस और बी जे पी का विकल्प बनकर सामने आएगी ?

    आर.एन. शाही के द्वारा
    August 27, 2010

    बिल्कुल खरी बातें लिखीं आपने सिंह साहब ।

    आर.एन. शाही के द्वारा
    August 27, 2010

    बिल्कुल खरी बातें लिखी हैं आपने सिंह साहब ।

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 27, 2010

    माननीय विजेंद्र जी. मैं भाजपा का समर्थक नहीं हूँ क्योंकि हिन्दू हितों के नाम पर सत्तारूढ़ होने वाले इस दल ने हिन्दुओं के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किया है किन्तु सन्यासियों के सक्रिय राजनीति में आने का समर्थन नहीं कर सकता.

    vijendrasingh के द्वारा
    August 27, 2010

    मनोज जी हमारे देश में यही तो समस्या है की विकल्प नहीं है कांग्रेस या बी जे पी या फिर छुट भैय्ये लोग जैसे मुलायम सिंह या मायावती या फिर विकास के घोर विरोधी और चीन के पिछलग्गू वामपंथी नेता आप ही बताइए एक तरफ धोकेबाज है तो दूसरी तरफ मक्कार लोग है किस पर विश्वास करें …………..और क्यूँ ……

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 27, 2010

    हम लोग कर ही क्या सकते हैं ? पहले कलम लेकर चिल्लाते थे|अब मोबाइल और कंप्यूटर लेकर चिल्ला रहें हैं|कभी कभी तो मन में आता है अपना ही माथा फोंड लूं| M. A., B.Ed. बेरोजगार रहे और स्नातकों को नौकरी मिल जाय. क्या यह कम समस्या नहीं है? आंबेडकर जी को भी मैंने पढ़ा है लेकिन उनकी भी तो नहीं सुनी गयी. क्या करेंगे ”एक होई तो कही समझाओं, कुपही में इन्हा भांग पड़ी है” वन्देमातरम

    आर.एन. शाही के द्वारा
    August 28, 2010

    यहाँ मैं सिंह साहब के समर्थन में ये कहना चाहूँगा मनोज जी, कि आपका सिद्धान्त कि सन्यासियों को सक्रिय राजनीति में नहीं आना चाहिये, अपने स्थान पर बिल्कुल उचित है। परन्तु बाबा रामदेव जी के विचारों को जहाँ तक मैने जाना-सुना है, वे खुद कहते हैं कि उन्हें किसी राजनीतिक पद पर कभी भी आसीन नहीं होना है । महात्मा गाँधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण से बड़ा सन्यासी कौन होगा! सन्यास का मतलब हमें सिर्फ़ गेरुआ और भजन से ही निकालना चाहिये? गाँधी के आश्रम में भी प्रार्थना और भजन होता था । हमेशा धर्म और अध्यात्म ने ही राजनीति को सही दिशा दी है । पतंजलि योगपीठ या उनके किसी संस्थान में भी कोई विशेष पूजा स्थल कहाँ है कि हम सन्यासी मान लें, सिवाय महर्षि पतंजलि की प्रतिमाओं के ।

    vijendrasingh के द्वारा
    August 28, 2010

    मनोज जी मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ की हम क्या कर सकते हैं हम युवा हैं और भारत की सबसे बड़ी आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं आइये मिलकर आव्हान करते देश के सभी युवाओं को जो सिर्फ देश हित मैं सकारात्मक एवं कलात्मक नजरिया रखते हैं युवा ठान ले तो सब कुछ कर सकता है चाहे वो तख्तो ताज पलटने की बात क्यूँ ना हो ,आप एक मशाल हाथ में तो लीजिये उसके बाद वो मशाल किस किस के हाथों में जाएगी वो तो वक़्त बताएगा ……………………..

Anita Paul के द्वारा
August 26, 2010

मनोज जी, आपकी पिछली रचना मैंने पढ़ी और लगा कि आप बिलकुल सही इश्यू उठा रहे हैं. निंदनीय हैं वो लोग जिन्हें तर्क की बजाए कुतर्क का सहारा लेना पड़ता है और जो संवाद की बजाय असहिष्णुता पर उतर जाते हैं. आपकी राष्ट्रवादी अभिव्यक्ति काबिलेतारीफ है. देश को आप जैसे योद्धाओं की जरूरत है.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 27, 2010

    रचना पढ़ने के लिए धन्यवाद् अनीता जी. अब इस देश को आग लगाने वाली रचनाओं की ही आवस्यकता है| कुछ लोगों ने राष्ट्र वाद को खिचड़ीवाद बना दिया हैं. आप से भी अनुरोध है की आप भी राष्ट्रवादी लेखन के कार्य में संलग्न होकर इस पुनीत कार्य में अपना महती योगदान दे. धन्यवाद

    Veruca के द्वारा
    July 12, 2016

    Ma ancora non vedete che sto Raffaele Savigni è un comunista dossettiano in missione ecumenica !!!!! … è inutile scambiar fiorettate …. è “de legno” !!!! Gli hanno conculcato che gli ippopotami volano e lui ora insegna che magari, in alcuni casi, saatrluiamente svolazzano !!!


topic of the week



latest from jagran