मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

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तुम नही अकेली हो प्रियतम

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तुम नहीँ अकेली हो प्रियतम, मैँ हरपल साथ तुम्हारे हूँ।
मैँ कब से तुम्हे पुकार रहा, आ, बैठा सिँधु किनारे हूँ।
मेरी अप्रतिहत गति तुम हो, चिन्तन मेँ रत यह मति तुम हो।
मैँ चलता तो तुम साथ चलो, मैँ रुकता हूँ तो यति तुम हो।
तुम मेरे श्वासोँ मेँ आती, उच्छवासोँ से बाहर जाती।
उर मेँ तुम सदा धड़कती हो, कानोँ मेँ कोयल सी गाती।
तुम मुझमेँ हो, मैँ तुममेँ हूँ, मैँ जीता तेरे सहारे हूँ।
तुम नहीँ अकेली हो प्रियतम, मैँ हरपल साथ तुम्हारे हूँ।
तुम सोच रही मैँ तन्हाँ हूँ, यह भ्रम है, सच्ची बात नहीँ।
अच्छा अब तुम्हीँ बताओ तो, कब तेरा मेरा साथ नहीँ?
कब तुमने अपनाया मुझको? कब तुमने गले लगाया है?
कब तुमने मेरा ध्यान किया? अग- जग सबकुछ बिसराया है।
अपने कपाट को खोल देख, आ पहुँचा तेरे दुआरे हूँ।
तुम नहीँ अकेली हो प्रियतम मैँ हरपल साथ तुम्हारे हूँ।
पर, एक प्रतिज्ञा भी सुन लो, मैँ हूँ तो कोई और नहीँ।
तुम इसे स्वार्थ कह सकती हो, पर मेरा कोई ठौर नहीँ
मैँ रमता हूँ भीतर बाहर, तुम अनुभव तो करना सीखो।
यह एक समर्पण शर्तहीन, तुम अर्पण तो करना सीखो।
तुम केन्द्र बिँदु, मै पूर्ण परिधि आयास तुम्हारा धारे हूँ।
तुम नहीँ अकेली हो प्रियतम, मैँ हरपल साथ तुम्हारे हूँ।

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajan sunderpur, varanasi के द्वारा
August 13, 2010

mujhe बहुत pasand आया.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    August 14, 2010

    dhanyavaad rajan ji

    Reignbeau के द्वारा
    July 12, 2016

    See the BBC are still choosing to avoid the Muslim link in the disgusting sex gang horror. They are a pathetic joke and, along with all those utterly USELESS ‘social’ workers and other agencies who are paid to do the job of caring and intervening in cases of abuse, are complicit in my eyes. I’m disgusted with the left-wing Guardian-reading PC scum who have ruined this cob&;ry!nnbspt&nusp; 35 likes


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