मनोज कुमार सिँह 'मयंक'

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

76 Posts

19068 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1151 postid : 78

छोड़ो मेरे यार नहीँ बदलेगा भारत (कविता)

  • SocialTwist Tell-a-Friend

भाषाओँ की खीँचातानी, क्षेत्रवाद की विषम कहानी।
आरक्षण के भस्मासुर को पुनः मिला वरदान भवानी।
जिन हाँथोँ को काम चाहिये, उनमेँ ए॰ के॰ सैतालिस है।
कदम-कदम पर नया छलावा,अमृत के धोखे मेँ विष है।
फिर कुरान की पोथी लेकर चंगेजी तलवार उठा है।
एक विदेशी के पैरोँ पर सारा हिंदुस्थान झुका है।
काश्मीर से लेकर केरल और कच्छ से कामरुप तक।
असुरक्षित हैँ लोग,स्थिति होती जाती बद से बदतर।
आओ प्रलय मचाओ रुद्रोँ, स्वागत मृत्यु तुम्हारा स्वागत।
छोड़ो मेरे यार नहीँ बदलेगा भारत।

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 2.25 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

satyamkumar के द्वारा
August 21, 2010

मन खुश हो गया कविता पढ़कर

    Jaylan के द्वारा
    July 12, 2016

    LÄ«va, sākumā ieraugot to apjomÄ«go disku krājumu liekas – aha, Å¡eit bÅ«s ko skatÄ«ties visu gadu. Bet tad, lÄ«dzko brÄ«vs vakars, tā gribas noskatÄ«ties vismaz pāris. Un nemanot – vienā vakarā tiek noskatÄ«tas 6 sÄ“rijas. Un tas vÄ“l neredzÄ“to sÄ“riju krājums plok arvien mazāks un ma3z&ks#82Ä0;


topic of the week



latest from jagran